राजस्थान के कोटा में फॉर्च्यूनर दुर्घटना: लेह-लद्दाख से लौट रहे पुणे के पिंपरी-चिंचवड के तीन युवकों की मौत, सांसद श्रीरंग बारणे के रिश्तेदार समेत कई घायल – जानें पूरा मामला

लेह-लद्दाख यात्रा से लौटते समय राजस्थान में भीषण सड़क दुर्घटना, सांसद के रिश्तेदार सहित तीन युवकों की जान गई

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Kota accident: सफर की खुशी कब मातम में बदल जाती है, यह कोई नहीं जानता। लेकिन 18 मार्च की वह सुबह पुणे के तीन परिवारों के लिए जिंदगी का सबसे काला दिन बन गई, जब उनके बेटे लेह-लद्दाख की यादें लेकर घर लौट रहे थे और राजस्थान की सड़क पर एक पल में सब कुछ बिखर गया।

Kota accident: कहाँ और कब हुआ यह भीषण हादसा?

यह दुर्घटना राजस्थान के कोटा जिले के कैथून थाना क्षेत्र में बालापुरा और कराड़िया गाँव के बीच हुई। घटना 18 मार्च की सुबह करीब साढ़े दस बजे की है। तीन फॉर्च्यूनर गाड़ियों का यह काफिला पुणे की ओर लौट रहा था। कैथून थाना क्षेत्र में पहुँचते-पहुँचते काफिले की एक गाड़ी अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क से उतरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और सवारों को बाहर निकालने में स्थानीय लोगों और प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

Kota accident: कौन थे ये युवक और कहाँ से आए थे?

हादसे का शिकार हुए तीनों युवक पुणे के पिंपरी-चिंचवड के थेरगांव, वाकड और म्हालुंगे इलाकों के निवासी थे। यह सभी एक-दूसरे के घनिष्ठ मित्र थे और लंबे समय से एक साथ लेह-लद्दाख जाने की योजना बना रहे थे। 26 फरवरी को दस सदस्यों का यह ग्रुप तीन फॉर्च्यूनर गाड़ियों में सवार होकर लेह-लद्दाख और जम्मू-कश्मीर की यात्रा पर निकला था। करीब तीन हफ्तों की यात्रा के बाद वे सभी पुणे लौट रहे थे। जिस गाड़ी का हादसा हुआ, उस पर “MP मावल” लिखा हुआ था, जो इस ग्रुप की पहचान के रूप में इस्तेमाल किया गया था।

Kota accident: मृतकों में सांसद के रिश्तेदार भी शामिल, पूरे इलाके में पसरा सन्नाटा

इस दुखद हादसे ने एक राजनीतिक आयाम भी ले लिया जब पता चला कि मृतकों में से एक युवक मावल से सांसद श्रीरंग बारणे के दूर के रिश्ते का भाई था। सांसद बारणे के कार्यालय ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की। श्रीरंग बारणे मावल लोकसभा क्षेत्र के सांसद हैं और पिंपरी-चिंचवड तथा मावल के आसपास के क्षेत्रों में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ है। जैसे ही यह खबर स्थानीय स्तर पर फैली, पिंपरी-चिंचवड और मावल क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। कई परिवार इन युवकों के घरों पर पहुँचने लगे और इलाके में एक गहरी उदासी छा गई।

Kota accident: काफिले के बाकी सदस्यों को क्या हुआ?

दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी के बाकी सदस्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ उनका उपचार जारी है। काफिले की दूसरी दो गाड़ियाँ पीछे-पीछे आ रही थीं। जब उनके साथी की गाड़ी का हादसा हुआ तो बाकी सदस्यों ने रुककर तुरंत स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सूचित किया। घटनास्थल पर पहुँची राजस्थान पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुँचाने में मदद की और शवों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की।

Kota accident: राजस्थान पुलिस ने क्या कदम उठाए हैं?

कैथून थाना क्षेत्र की पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँचकर मामले की जाँच शुरू कर दी है। पुलिस दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में जुटी है। प्रारंभिक जाँच में यह देखा जा रहा है कि गाड़ी अनियंत्रित क्यों हुई, क्या यह चालक की थकान की वजह से हुआ, सड़क की स्थिति कैसी थी और गाड़ी की गति क्या थी। यातायात विशेषज्ञों के अनुसार लंबी दूरी की यात्रा में चालक की थकान एक बड़ा कारण होती है जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है और यही लापरवाही जानलेवा हादसों को जन्म देती है।

Kota accident: शवों को वापस लाने की प्रक्रिया और परिजनों की स्थिति

तीनों मृतकों के परिजनों को जैसे ही इस खबर की जानकारी मिली, वे राजस्थान रवाना होने लगे। प्रशासन की ओर से शवों को उनके गृह नगर वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पिंपरी-चिंचवड नगर निगम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने परिवारों से संपर्क किया और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मावल सांसद के कार्यालय ने भी परिवारों को शव वापस लाने में प्रशासनिक सहयोग देने का वादा किया है।

Kota accident: राजस्थान की सड़कों पर बढ़ते हादसे कब रुकेंगे?

राजस्थान के राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाएँ लगातार एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। हर साल सैकड़ों लोग इन सड़कों पर अपनी जान गँवाते हैं। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी दूरी की यात्रा में हर तीन से चार घंटे पर विश्राम करना अनिवार्य है। चालक को पर्याप्त नींद और पानी का सेवन करना चाहिए। यदि काफिले में एकाधिक गाड़ियाँ हों तो बारी-बारी से चालक बदलते रहना एक समझदारी भरा कदम है।

निष्कर्ष

यह हादसा एक बार फिर यह याद दिलाता है कि सड़क यात्रा में सावधानी और आराम दोनों जरूरी हैं। लेह-लद्दाख जैसी लंबी और कठिन यात्रा के बाद वापसी में अतिरिक्त सतर्कता बरतना जरूरी है क्योंकि थकान में किया गया एक पल का असावधानी भरा फैसला जिंदगियाँ छीन सकता है। तीन परिवारों की खुशी जो घर लौटने का इंतजार कर रही थी, अब शोक में डूब गई है। प्रशासन से अपेक्षा है कि इस मार्ग पर सड़क सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

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