Sanjay Sureka: 6210 करोड़ के बैंक घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, संजय सुरेका की करोड़ों की संपत्तियां अटैच, 97 आरोपी जांच के घेरे में

Sanjay Sureka: 6210 करोड़ के बैंक घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, संजय सुरेका की करोड़ों की संपत्तियां अटैच, 97 आरोपी जांच के घेरे में

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Sanjay Sureka: बैंकों के साथ हुए हजारों करोड़ रुपये के धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने अपनी जांच का दायरा और अधिक बढ़ा दिया है। कॉन्कास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड (सीएसपीएल) से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में जांच एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संजय कुमार सुरेका की 20 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। इन संपत्तियों का बाजार मूल्य लगभग 31.30 करोड़ रुपये आंका गया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के तहत की गई है, जिससे घोटाले से जुड़े आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

Sanjay Sureka: देशभर में फैला है अवैध संपत्तियों का जाल

ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि संजय कुमार सुरेका ने बड़े पैमाने पर अपराध से अर्जित धन को छिपाने के लिए एक जटिल जाल बुन रखा था। अटैच की गई संपत्तियों में आवासीय मकान, व्यावसायिक यूनिट, फ्लैट और जमीन के कई टुकड़े शामिल हैं। ये संपत्तियां केवल एक राज्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका फैलाव पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और नई दिल्ली जैसे राज्यों तक है।

एजेंसी के अनुसार, इन संपत्तियों का असली नियंत्रण संजय कुमार सुरेका के पास था, लेकिन इन्हें उनके नाम पर रखने के बजाय रिश्तेदारों, कर्मचारियों, सहयोगियों और विभिन्न शेल कंपनियों के नाम पर दर्ज कराया गया था। इसका उद्देश्य सीधे तौर पर यह था कि जांच एजेंसियों की नजरों से बचकर काले धन को सुरक्षित किया जा सके।

अब तक 777 करोड़ से अधिक की कुर्की

इस ताजा कार्रवाई के साथ ही, कॉन्कास्ट स्टील घोटाले में ईडी द्वारा अब तक कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य लगभग 777.10 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। एजेंसी ने कोलकाता की विशेष पीएमएलए अदालत में दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। इस नई चार्जशीट में 63 अतिरिक्त आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें कई कंपनियां, पार्टनरशिप फर्म और एलएलपी शामिल हैं। इस मामले में अब कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 97 हो गई है। ईडी का दावा है कि ये सभी आरोपी जानबूझकर अपराध से जुड़ी राशि को वैध रूप देने की कोशिश में सक्रिय रूप से शामिल थे।

कैसे दिया गया था हजारों करोड़ का चूना?

इस घोटाले की जड़ें सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में हैं। जांच में सामने आया कि कॉन्कास्ट स्टील एंड पावर लिमिटेड के प्रमोटरों और निदेशकों ने बैंकों के एक कंसोर्टियम से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारी कर्ज लिया था। कंपनी पर आरोप है कि उन्होंने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत दिखाने के लिए स्टॉक स्टेटमेंट को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर किया।

कंपनी, जिसका नेतृत्व संजय कुमार सुरेका करते थे, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में स्टील निर्माण इकाइयां चलाती थी। बैंकों को गुमराह करके लिए गए इस लोन की राशि को बाद में शिफॉन ऑफ कर दिया गया, जिससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों को 6210 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

Sanjay Sureka: 60 से अधिक शेल कंपनियों का जटिल नेटवर्क

मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम देने के लिए सुरेका ने एक बेहद जटिल नेटवर्क तैयार किया था। ईडी की जांच के दौरान 60 से अधिक शेल कंपनियों का पता चला है, जिनका इस्तेमाल केवल पैसों की हेराफेरी के लिए किया जाता था। इन कंपनियों के माध्यम से एकोमोडेशन एंट्री, असुरक्षित ऋण और इंटर-कॉर्पोरेट ट्रांजैक्शन जैसे तरीकों का उपयोग किया गया ताकि धन को कई स्तरों पर घुमाया जा सके।

अंत में, इसी पैसे का उपयोग हाई-वैल्यू एसेट खरीदने और अन्य निवेश करने में किया गया। संजय सुरेका के करीबी रिश्तेदारों और सहयोगियों द्वारा नियंत्रित कई फर्में भी इस नेटवर्क का हिस्सा थीं, जिन्होंने इस पूरे खेल को रूट और लेयर करने में मदद की।

Sanjay Sureka: आगे क्या हो सकता है?

ईडी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह जांच अभी खत्म नहीं हुई है। 97 आरोपियों की सूची और भारी-भरकम कुर्की के बाद भी एजेंसी की नजर उन अन्य संपत्तियों पर है, जिन्हें अवैध रूप से अर्जित धन से बनाया गया है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे होने की उम्मीद है, जो कई अन्य बड़े नामों को भी घेरे में ले सकते हैं।

यह घोटाला न केवल बैंकिंग प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे कॉरपोरेट जगत की आड़ में जटिल नेटवर्क बनाकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया जाता है। फिलहाल कानून की कार्रवाई जारी है और जांच एजेंसियों की सख्ती ने उन तमाम लोगों के लिए चेतावनी जारी कर दी है जो वित्तीय धोखाधड़ी के जरिए रातों-रात संपत्ति बनाने की कोशिश करते हैं। भविष्य में कोर्ट का रुख और ईडी की अगली कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे।

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