Dusra Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ मास का दूसरा बड़ा मंगल 12 मई को, 19 साल बाद बना है 8 मंगलवारों का महासंयोग, जानें क्यों कहते हैं इसे ‘बुढ़वा मंगल’

Dusra Bada Mangal 2026: 12 मई को दूसरा बड़ा मंगल; 19 साल बाद 8 मंगलवारों का महासंयोग, जानें शुभ मुहूर्त!

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Dusra Bada Mangal 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह का विशेष महत्व होता है और इस महीने में आने वाले मंगलवारों को ‘बड़ा मंगल’ के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में ज्येष्ठ माह की महिमा और भी बढ़ गई है। आगामी 12 मई को इस साल का दूसरा बड़ा मंगल मनाया जाएगा। इस बार का बड़ा मंगल केवल एक धार्मिक आयोजन भर नहीं है, बल्कि यह ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत दुर्लभ है। भक्तों के लिए खुशी की बात यह है कि इस वर्ष ज्येष्ठ माह में 4 या 5 नहीं, बल्कि कुल 8 बड़े मंगलवार पड़ रहे हैं, जो कि 19 साल बाद बनने वाला एक अद्भुत संयोग है।

Dusra Bada Mangal 2026: 19 साल बाद बना है दुर्लभ ‘अधिक मास’ का संयोग

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, साल 2026 में ज्येष्ठ माह के दौरान ‘अधिक मास’ (जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है) लग रहा है। अधिक मास के कारण ज्येष्ठ का महीना विस्तारित हो गया है, जिसके चलते इस बार बड़े मंगलवारों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है। आमतौर पर एक महीने में 4 या 5 मंगलवार ही आते हैं, लेकिन ज्येष्ठ का यह विस्तार भक्तों के लिए बजरंगबली की विशेष कृपा पाने का द्वार खोल रहा है। जानकारों का कहना है कि ऐसा संयोग पिछली बार करीब दो दशक पहले देखा गया था। इस दुर्लभ योग में हनुमान जी की पूजा करने से भक्तों के जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।

लखनऊ और अवध की अनूठी परंपरा: ‘बुढ़वा मंगल’

Dusra Bada Mangal 2026
Dusra Bada Mangal 2026

बड़ा मंगल की धूम पूरे उत्तर भारत में देखने को मिलती है, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और अवध क्षेत्र में इसका स्वरूप बेहद विशाल होता है। इसे स्थानीय भाषा में ‘बुढ़वा मंगल’ भी कहा जाता है। इस दिन लखनऊ की सड़कों पर जगह-जगह भंडारे आयोजित किए जाते हैं, जहां भक्तों को पूड़ी-सब्जी, बूंदी और शरबत का प्रसाद वितरित किया जाता है। गंगा-जमुनी तहजीब के प्रतीक के रूप में इस उत्सव में हर धर्म के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। मान्यताओं के अनुसार, लखनऊ के नवाबों के काल से ही इस दिन बड़े पैमाने पर सेवा कार्य करने की परंपरा चली आ रही है।

क्यों पड़ा इसका नाम ‘बुढ़वा मंगल’? इसके पीछे की पौराणिक कथा

इस पावन पर्व को ‘बुढ़वा मंगल’ कहने के पीछे दो प्रमुख पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जो इस दिन की महत्ता को दर्शाती हैं:

पहली कथा महाभारत काल से जुड़ी है। जब पांडव वनवास में थे, तब भीम को अपनी शक्ति पर अत्यंत अहंकार हो गया था। भीम के इस गर्व को तोड़ने के लिए हनुमान जी ने एक वृद्ध वानर का रूप धारण किया और मार्ग में अपनी पूंछ फैलाकर लेट गए। जब भीम ने उन्हें पूंछ हटाने को कहा, तो वृद्ध वानर ने कहा कि वह असमर्थ हैं और भीम खुद ही पूंछ हटा दें। भीम ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी लेकिन वह पूंछ टस से मस न कर सके। तब भीम को बोध हुआ कि यह कोई साधारण वानर नहीं हैं। चूंकि हनुमान जी ने मंगलवार के दिन ही वृद्ध रूप में दर्शन दिए थे, इसलिए इसे ‘बुढ़वा मंगल’ कहा जाने लगा।

दूसरी मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ मास के मंगलवार को ही वनवास के दौरान संकटमोचन हनुमान जी की पहली मुलाकात भगवान श्री राम से हुई थी। प्रभु श्री राम और उनके सबसे बड़े भक्त का मिलन इसी कालखंड में हुआ था, इसलिए ज्येष्ठ के मंगलवार हनुमान भक्तों के लिए दीपावली के समान होते हैं।

बड़ा मंगल 2026: नोट कर लें सभी 8 तिथियां

इस वर्ष ज्येष्ठ और अधिक मास के मेल से बनने वाले सभी 8 बड़े मंगलवारों की सूची इस प्रकार है:

  1. पहला बड़ा मंगल: 5 मई (यह संपन्न हो चुका है)

  2. दूसरा बड़ा मंगल: 12 मई (आगामी मंगलवार)

  3. तीसरा बड़ा मंगल: 19 मई

  4. चौथा बड़ा मंगल: 26 मई

  5. पांचवां बड़ा मंगल: 2 जून

  6. छठा बड़ा मंगल: 9 जून

  7. सातवां बड़ा मंगल: 16 जून

  8. आठवां बड़ा मंगल: 23 जून

इतने लंबे समय तक चलने वाले इस उत्सव के कारण इस बार जून के अंतिम सप्ताह तक हनुमान मंदिरों में उत्सव का माहौल बना रहेगा।

कैसे करें हनुमान जी की पूजा? जानें सही विधि

12 मई को पड़ने वाले दूसरे बड़े मंगल के दिन जो भक्त व्रत रखना चाहते हैं या विशेष पूजा करना चाहते हैं, उन्हें कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए।

पूजा के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे लाल रंग के वस्त्र धारण करें। लाल रंग हनुमान जी को अत्यंत प्रिय है। इसके बाद घर के मंदिर या किसी हनुमान मंदिर में जाकर बजरंगबली की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। भगवान को चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर (चोला) चढ़ाएं। चोला चढ़ाना हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे उत्तम उपाय माना जाता है।

प्रसाद के रूप में हनुमान जी को बूंदी के लड्डू, गुड़-चना और मौसमी फलों का भोग लगाएं। पूजा के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करें। यदि संभव हो तो सुंदरकांड, बजरंग बाण या संकटमोचन हनुमान अष्टक का पाठ करना जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को टाल देता है। अंत में आरती कर अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें और गरीबों में प्रसाद बांटें।

दान और सेवा का महत्व

बड़ा मंगल केवल पूजा तक सीमित नहीं है, यह सेवा का भी पर्व है। इस दिन प्याऊ लगवाना, भूखों को भोजन कराना और पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। ज्येष्ठ की भीषण गर्मी में राहगीरों को ठंडा पानी पिलाना हनुमान जी की वास्तविक भक्ति मानी जाती है।

इस दुर्लभ संयोग के अवसर पर हनुमान मंदिरों में विशेष श्रृंगार और कीर्तन की तैयारियां जोरों पर हैं। 12 मई को पड़ने वाले दूसरे बड़े मंगल पर सुबह से ही मंदिरों में ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ के जयकारे गूंजेंगे। यदि आप भी बजरंगबली की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस मंगलवार अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजन और सेवा कार्य अवश्य करें।

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