राजनाथ सिंह का जर्मनी दौरा: भारत और जर्मनी के बीच 6 अत्याधुनिक पनडुब्बियों की 70 हजार करोड़ की ऐतिहासिक डील से भारतीय नौसेना की ताकत में होगा बड़ा इजाफा

प्रोजेक्ट 75I के तहत भारत में बनेंगी 6 पनडुब्बियां; मझगांव डॉक और जर्मनी की थिसेनक्रुप में समझौता।

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India Germany deal: भारतीय रक्षा क्षेत्र के इतिहास में एक नया अध्याय लिखे जाने की तैयारी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 21 से 23 अप्रैल 2026 तक जर्मनी की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरे में भारत और जर्मनी के बीच प्रोजेक्ट 75I के तहत छह अत्याधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों की खरीद पर 70 हजार करोड़ से 99 हजार करोड़ रुपये तक की ऐतिहासिक डील होने की प्रबल संभावना है। ये पनडुब्बियां मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स में बनेंगी और जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स तकनीकी सहयोग देगी।

India Germany deal: क्या है पूरी डील और इसकी लागत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस दौरे में जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस और वरिष्ठ नेताओं से विस्तृत बातचीत करेंगे। प्रोजेक्ट 75I के तहत भारत को छह उन्नत पारंपरिक पनडुब्बियां मिलने की उम्मीद है। इस डील की अनुमानित लागत 70,000 करोड़ रुपये से लेकर 99,000 करोड़ रुपये यानी लगभग 8 से 12 अरब डॉलर के बीच बताई जा रही है। यह भारत के रक्षा इतिहास की सबसे बड़ी पनडुब्बी खरीद परियोजनाओं में से एक होगी।

India Germany deal: सात साल बाद क्यों हो रही है यह यात्रा

भारत और जर्मनी के बीच रक्षा संबंध पिछले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे मजबूत होते रहे हैं। इससे पहले फरवरी 2019 में तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने जर्मनी का दौरा किया था। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस जून 2023 में भारत आ चुके हैं। राजनाथ सिंह की यह यात्रा उसी दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है। सात साल बाद किसी भारतीय कैबिनेट मंत्री की जर्मनी यात्रा महज एक औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि यह दौरा समुद्री सुरक्षा रणनीति को नई धार देने वाला साबित हो सकता है।

मझगांव डॉक और थिसेनक्रुप: मेक इन इंडिया की असली जीत

इस डील की सबसे खास बात यह है कि इन पनडुब्बियों का निर्माण भारत में ही होगा। मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। जर्मनी की प्रतिष्ठित रक्षा कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स तकनीकी सहयोग और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत इस परियोजना में भागीदार बनेगी। यह व्यवस्था मेक इन इंडिया पहल को वैश्विक मान्यता दिलाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इस साझेदारी से देश में रक्षा उत्पादन क्षमता भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगी।

India Germany deal: भारतीय नौसेना को क्या मिलेगा और सामरिक लाभ

इन छह पनडुब्बियों के बेड़े में शामिल होने से भारतीय नौसेना की हिंद महासागर में निगरानी और प्रतिरोध क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसेनिक उपस्थिति के मद्देनजर यह परियोजना भारत की सामरिक जरूरत बन चुकी थी। इन पनडुब्बियों की तैनाती से भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त मिलेगी और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के मामले में भारत की स्थिति और सुदृढ़ होगी।

विशेषज्ञ विश्लेषण: डिफेंस इंडस्ट्रियल सहयोग का नया दौर

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह यात्रा केवल पनडुब्बी डील तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक और उभरते रक्षा क्षेत्रों में भी सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। यह साझेदारी NATO और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे में भारत की भूमिका को भी रेखांकित करती है। राजनाथ सिंह इस दौरे में जर्मनी की प्रमुख रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे ताकि भारत में प्रत्यक्ष निवेश और तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा दिया जा सके।

India Germany deal: प्रोजेक्ट 75I और भविष्य की रूपरेखा

यदि यह डील इस दौरे में अंतिम रूप ले लेती है तो अगले कुछ महीनों में तकनीकी समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। प्रोजेक्ट 75I के तहत बनने वाली इन पनडुब्बियों में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन जैसी अत्याधुनिक तकनीक शामिल होगी। भारतीय नौसेना के अधिकारियों के अनुसार ये पनडुब्बियां आने वाले दशक में भारत की समुद्री सुरक्षा की रीढ़ बनेंगी। यह पूरी प्रक्रिया भारत को एक वैश्विक रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

निष्कर्ष: रक्षा कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़

राजनाथ सिंह की जर्मनी यात्रा भारत की रक्षा कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। 70 हजार करोड़ से अधिक की यह पनडुब्बी डील केवल एक खरीद समझौता नहीं है, यह भारत की आत्मनिर्भरता, तकनीकी प्रगति और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है। मेक इन इंडिया के तहत देश में बनने वाली ये पनडुब्बियां आने वाले दशकों तक भारतीय नौसेना की ताकत की पहचान बनेंगी।

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