Diljit Dosanjh Satluj Movie: ‘सतलुज’ पर क्यों मचा बवाल? सेंसर बोर्ड के फैसले और ZEE5 से हटाए जाने की पूरी टाइमलाइन

Diljit Dosanjh Satluj Movie: 'सतलुज' पर क्यों मचा बवाल? सेंसर बोर्ड के फैसले और ZEE5 से हटाए जाने की पूरी टाइमलाइन

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Diljit Dosanjh Satluj Movie: दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’, जिसे पहले ‘पंजाब 95’ के नाम से जाना जाता था, पिछले तीन सालों से विवादों के घेरे में है। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने पंजाब में उग्रवाद के दौर में कथित फर्जी मुठभेड़ों के मामलों को सामने लाने में अहम भूमिका निभाई थी। फिल्म का सफर सेंसर बोर्ड के 120 से अधिक कट्स और नाम बदलने की जद्दोजहद से शुरू हुआ और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज के महज 48 घंटे के भीतर इसे हटाए जाने तक पहुंच गया। यह फिल्म न केवल अपनी कहानी के कारण, बल्कि प्रशासनिक और कानूनी अड़चनों के चलते भारत की सबसे चर्चा में रहने वाली फिल्मों में से एक बन गई है।

Diljit Dosanjh Satluj Movie: जसवंत सिंह खालड़ा का संघर्ष और फिल्म का आधार

निर्देशक हनी त्रेहन और निर्माता रोनी स्क्रूवाला की यह फिल्म एक ऐसे दौर की सच्चाई को दिखाती है, जब पंजाब में सैकड़ों लोग रहस्यमय तरीके से गायब हो गए थे। जसवंत सिंह खालड़ा ने जब इन लापता लोगों के अवैध अंतिम संस्कारों के मामलों की जांच शुरू की, तो वह खुद भी 6 सितंबर 1995 को अपने घर से अगवा कर लिए गए थे। सीबीआई की जांच में उन पर हुए अत्याचार और पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता का खुलासा हुआ था। फिल्म इसी ऐतिहासिक और संवेदनशील घटना को पर्दे पर उतारने की एक कोशिश है, जिसे लेकर विवाद की जड़ें काफी गहरी हैं।

क्यों हुआ फिल्म का नाम बदलने का सिलसिला?

फिल्म का नाम बदलना इसके संघर्षपूर्ण सफर का हिस्सा रहा है। सबसे पहले इसे ‘घल्लूघारा’ नाम दिया गया था। इसके बाद सेंसर बोर्ड (CBFC) की प्रक्रिया के दौरान इसका नाम बदलकर ‘पंजाब 95’ कर दिया गया। लेकिन जब विवाद थमता नहीं दिखा, तो निर्माता इसे एक नए नाम ‘सतलुज’ के साथ सामने लाए, जो पंजाब की जीवनदायिनी नदी के नाम पर है। बावजूद इसके, फिल्म पर सेंसर की कैंची इतनी बेरहमी से चली कि 120 से ज्यादा कट्स और डायलॉग बदलने के सुझाव दिए गए। निर्माता इन बदलावों को मानने के लिए मजबूर हुए ताकि फिल्म किसी तरह दर्शकों तक पहुंच सके।

ZEE5 से हटाने का क्या है मामला?

लंबे इंतजार के बाद जब 3 जुलाई को यह फिल्म सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई, तो उम्मीद थी कि दर्शकों को सच्चाई देखने को मिलेगी। हालांकि, रिलीज के महज दो दिन के भीतर ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। ZEE5 के आधिकारिक बयान के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों और सरकारी आदेशों को देखते हुए फिल्म को अगले आदेश तक के लिए प्रतिबंधित किया गया है। प्लेटफॉर्म ने हालांकि यह स्पष्ट किया है कि वे रचनात्मक स्वतंत्रता के पक्ष में हैं और इसे दोबारा स्ट्रीम करने के लिए कानूनी रास्ते तलाश रहे हैं।

Diljit Dosanjh Satluj Movie: राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस फिल्म को हटाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और शिरोमणि अकाली दल जैसे संगठनों ने इस कदम की कड़ी निंदा की है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने इस फिल्म की एक क्लिप शेयर करते हुए लिखा कि वे अंधेरे को चुनौती देते हैं। क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी सरकारी ताकत के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए फिल्म के समर्थन में आवाज उठाई है।

Diljit Dosanjh Satluj Movie: आगे क्या होगा?

अभी के लिए फिल्म भारत में उपलब्ध नहीं है। निर्माताओं और ओटीटी प्लेटफॉर्म के सामने अब इसे कानूनी स्तर पर वापस लाने की चुनौती है। यह मामला अभिव्यक्ति की आजादी और सेंसरशिप के बीच के धुंधले फर्क को एक बार फिर से सामने लाया है। लोग सोशल मीडिया पर लगातार यह मांग कर रहे हैं कि फिल्म को बिना कट्स के या पूरी तरह से रिलीज किया जाए।

आने वाले दिनों में देखना होगा कि क्या निर्माता कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं या सरकार के साथ कोई बीच का रास्ता निकलता है। यह विवाद केवल एक फिल्म का नहीं है, बल्कि उस सच्चाई को देखने की चाहत का है जिसे लंबे समय से दबाने की कोशिश की जा रही है। दर्शकों का धैर्य और सामाजिक संगठनों का बढ़ता दबाव यह तय करेगा कि ‘सतलुज’ की यह कहानी लोगों के सामने आ पाएगी या नहीं। अभी के हालात में फिल्म का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है, लेकिन इसने देश में सेंसरशिप को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

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