Dhurandhar Oscars 2027: 3000 करोड़ की फिल्म को क्यों नहीं मिली ऑस्कर एंट्री? 4 वोट वाले मामले का खुलासा

14 सदस्यीय ज्यूरी में धुरंधर को मिले सिर्फ 4 वोट, मराठी फिल्म गोंधल बनी भारत की आधिकारिक प्रविष्टि

0

Dhurandhar Oscars 2027:  99वें अकादमी पुरस्कार यानी ऑस्कर 2027 (Oscars 2027) के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के चयन के बाद फिल्म उद्योग और सिनेमा प्रेमियों के बीच एक नई तीखी बहस छिड़ गई है। बॉक्स ऑफिस पर लगभग 3000 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक वैश्विक कारोबार करने वाली रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर एक्शन ड्रामा ‘धुरंधर’ और उसके सीक्वल ‘धुरंधर: द रिवेंज’ को चयन समिति ने अंतिम मुकाबले में दरकिनार कर दिया। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) की 14 सदस्यीय ज्यूरी ने सभी व्यावसायिक रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ते हुए महाराष्ट्र की लोक-संस्कृति पर आधारित संतोष डावखर की मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को भारत की आधिकारिक प्रविष्टि घोषित किया।

इस अप्रत्याशित निर्णय के बाद उठ रहे सवालों के बीच चयन समिति के वरिष्ठ सदस्य, अभिनेता और फिल्म निर्माता विवेक वासवानी ने पर्दे के पीछे की चयन प्रक्रिया का बड़ा खुलासा किया है। वासवानी के अनुसार 14 सदस्यीय ज्यूरी के मतदान में ‘धुरंधर’ को महज 4 वोट हासिल हुए, जिसके चलते यह ऑस्कर की आधिकारिक दौड़ से बाहर हो गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए केवल बॉक्स ऑफिस के आंकड़े और तकनीकी भव्यता पर्याप्त नहीं होते, बल्कि विषयवस्तु की सांस्कृतिक प्रामाणिकता सबसे निर्णायक पैमाना होती है।

Dhurandhar Oscars 2027: 14 सदस्यों की ज्यूरी और 4 वोट

विवेक वासवानी ने चयन प्रक्रिया की आंतरिक बारीकियों को साझा करते हुए बताया कि ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज’ दोनों ही फिल्में तकनीकी दृष्टि से अत्यंत उन्नत, भव्य और बेहतरीन ढंग से निर्मित सिनेमाई उत्पाद थीं। इसके बावजूद ज्यूरी का स्पष्ट अधिदेश यह था कि ऑस्कर के ‘बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म’ संवर्ग में ऐसी कृति को भेजा जाए जो वैश्विक दर्शकों के सम्मुख भारत की अद्वितीय सांस्कृतिक जड़ों और अस्मिता को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत कर सके।

मतदान के दौरान ज्यूरी के अधिकांश सदस्यों का मानना था कि ‘धुरंधर’ भले ही एक विशाल व्यावसायिक ब्लॉकबस्टर हो, किंतु इसकी कथा संरचना में वह सांस्कृतिक विशिष्टता और स्थानीय माटी की महक अनुपस्थित थी जिसकी तलाश विश्व सिनेमा मंच पर भारतीय कहानियों से की जाती है। इसी वैचारिक विभाजन के चलते 14 सदस्यीय जूरी में फिल्म आवश्यक बहुमत जुटाने में पूरी तरह असफल रही और उसे केवल 4 सदस्यों का ही समर्थन प्राप्त हो सका।

बॉक्स ऑफिस बनाम ऑस्कर मानक: कमाई नहीं, कहानी का सांस्कृतिक आधार था कसौटी

फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के निर्णय ने एक बार फिर यह सिद्धांत स्थापित किया है कि बॉक्स ऑफिस के 3000 करोड़ रुपये के संग्रह का ऑस्कर की चयन प्रक्रिया से कोई सीधा संबंध नहीं होता। हॉलीवुड की अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज (AMPAS) के अंतरराष्ट्रीय फीचर वर्ग में दुनिया भर के देश अपनी-अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान वाली फिल्में भेजते हैं।

यदि कोई भारतीय फिल्म पश्चिमी एक्शन थ्रिलर के खांचे में ढली हुई प्रतीत होती है, तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर वह अपनी विशिष्टता खो देती है। ज्यूरी के अनुसार ऑस्कर चयन का पैमाना यह तय करना होता है कि कौन सी फिल्म भारत के विविध समाज, लोक-परंपराओं और मानवीय संवेदनाओं को सबसे मार्मिक ढंग से पर्दे पर उकेरती है। व्यावसायिक सफलता फिल्म के घरेलू मुनाफे और मनोरंजन मूल्य का पैमाना हो सकती है, किंतु कलात्मक और सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व के मामले में यह कोई विशेषाधिकार नहीं प्रदान करती।

अंतिम मुकाबले में पहुंचीं तीन फिल्में: नागालैंड की ‘अंग’ और ‘मैं वापस आऊंगा’ को मिली टक्कर

इस वर्ष भारत की ओर से विचारार्थ कुल 33 फिल्मों की लंबी सूची तैयार की गई थी, जिसमें 14 हिंदी फिल्में और शेष मराठी, तमिल, तेलुगु, गुजराती, मलयालम, नेपाली और नागालैंड की कोंयाक भाषा की फिल्में शामिल थीं। कई दौर की गहन स्क्रीनिंग और बौद्धिक विमर्श के पश्चात ज्यूरी ने अंतिम तीन फिल्मों को शॉर्टलिस्ट किया।

इन अंतिम तीन दावेदारों में संतोष डावखर की मराठी फिल्म ‘गोंधल’, पूर्वोत्तर भारत की पृष्ठभूमि पर आधारित नागा भाषा की बहुचर्चित फिल्म ‘अंग’ और संवेदनशील सामाजिक ताने-बाने पर रची गई ‘मैं वापस आऊंगा’ शामिल थीं। इन तीनों कलात्मक कृतियों के बीच हुए अंतिम वैचारिक मंथन में ‘गोंधल’ ने अपने अद्वितीय लोक अनुष्ठान, रहस्यमयी थ्रिलर संरचना और उस्ताद इलैयाराजा के कालजयी संगीत के दम पर बाजी मारी।

‘गोंधल’ की सांस्कृतिक गहराई बनी जीत का आधार

महाराष्ट्र की प्राचीन ‘गोंधल’ परंपरा और ग्रामीण परिवेश में रची गई यह फिल्म एक विवाहित स्त्री ‘सुमन’ के जीवन संघर्षों, धोखे और सामाजिक वर्जनाओं के बीच बुनी गई एक सशक्त मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है। विवेक वासवानी ने रेखांकित किया कि ‘गोंधल’ की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह किसी विदेशी सिनेमाई शैली की नकल नहीं करती, बल्कि विशुद्ध भारतीय लोक-संस्कृति के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं के वैश्विक सत्य को उजागर करती है।

इसके साथ ही फिल्म में संगीत के भीष्म पितामह इलैयाराजा द्वारा रचित लोक धुनों और पाश्चात्य आर्केस्ट्रा का संगम फिल्म के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। निर्देशक संतोष डावखर, जो पूर्व में 2025 के भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) में ‘सिल्वर पीकॉक’ जीत चुके हैं, ने इस फिल्म को जिस यथार्थवादी और कलात्मक दृष्टिकोण से गढ़ा है, उसने ज्यूरी के अधिकांश सदस्यों को सर्वसम्मति की ओर मोड़ दिया।

क्या ‘धुरंधर’ के लिए ऑस्कर के सभी दरवाजे बंद हो गए? आरआरआर का उदाहरण

भारत की आधिकारिक प्रविष्टि न बन पाने का अर्थ यह कदापि नहीं है कि ‘धुरंधर’ के लिए ऑस्कर का सफर पूरी तरह समाप्त हो गया है। अकादमी के नियमों के अनुसार ‘बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म’ संवर्ग के अतिरिक्त अन्य सभी मुख्य श्रेणियां—जैसे बेस्ट पिक्चर, बेस्ट ओरिजिनल स्कोर, बेस्ट विजुअल इफेक्ट्स अथवा बेस्ट एक्टर—स्वतंत्र आवेदन के लिए खुली रहती हैं।

विवेक वासवानी ने इस संदर्भ में फिल्म ‘आरआरआर’ (RRR) का ऐतिहासिक दृष्टांत दिया। आरआरआर भी वर्ष 2023 में भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि नहीं बन सकी थी (उस वर्ष गुजराती फिल्म ‘छेल्लो शो’ को आधिकारिक रूप से भेजा गया था)। इसके बावजूद आरआरआर के निर्माताओं ने स्वतंत्र रूप से सामान्य श्रेणियों में फिल्म का अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया और फिल्म के गीत ‘नाटु नाटु’ ने ‘बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग’ का ऑस्कर जीतकर इतिहास रच दिया था। अतः यदि ‘धुरंधर’ के निर्माता चाहें तो वे लॉस एंजिल्स में एक सप्ताह का व्यावसायिक थियेट्रिकल रन पूरा करके फिल्म को सामान्य श्रेणियों की दौड़ में शामिल करा सकते हैं।

Dhurandhar Oscars 2027: निष्कर्ष

रणवीर सिंह की 3000 करोड़ी ‘धुरंधर’ को दरकिनार कर मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को ऑस्कर 2027 के लिए भारत का प्रतिनिधि चुनना भारतीय सिनेमा के वैचारिक परिष्कार का परिचायक है। ज्यूरी सदस्य विवेक वासवानी के खुलासे से स्पष्ट है कि चयन समिति ने बॉक्स ऑफिस के दबाव और स्टारडम के ग्लैमर से परे हटकर देश की माटी, लोक-संस्कृति और कलात्मक ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। ‘गोंधल’ अब 14 मार्च 2027 को होने वाले 99वें अकादमी पुरस्कारों के लिए भारत की अधिकृत उम्मीद बनकर आगे बढ़ चुकी है, जबकि ‘धुरंधर’ की टीम के पास अन्य स्वतंत्र श्रेणियों के जरिए हॉलीवुड के मंच पर अपनी किस्मत आजमाने का विकल्प अभी भी खुला हुआ है।

Read more here

Radha Ashtami 2026: कब है राधा अष्टमी? जानें शुभ तिथि, पूजा विधि और महत्व के साथ खास शुभकामना संदेश

Oscar 2027 के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री बनी मराठी फिल्म ‘गोंधल’, 33 फिल्मों को पछाड़कर बनाई जगह

Health Tips: आयोडीन की कमी से बचना है तो डाइट में शामिल करें ये चीजें, जानें एक्सपर्ट की सलाह

EPS Pension Calculation: 20 साल की नौकरी के बाद कितनी मिलेगी पेंशन? ₹25,000 वेतन सीमा और 2 साल बोनस से समझें पूरा हिसाब

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.