Dhruv Rathee News: मानहानि केस में जमानती वारंट जारी, पेशी से पहले लंदन रवाना होने की खबर
साकेत कोर्ट में पेश नहीं हुए ध्रुव राठी, 2018 के वीडियो विवाद में जमानती वारंट जारी
Dhruv Rathee News: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और लोकप्रिय यूट्यूबर ध्रुव राठी एक बार फिर पुराने कानूनी विवाद को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की साकेत जिला अदालत ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को आठ साल पुराने आपराधिक मानहानि के एक मामले में सुनवाई करते हुए ध्रुव राठी के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। अदालत में पेशी के निर्धारित दिन उपस्थित न होने और समन की तामील के बावजूद सुनवाई में शामिल न होने के बाद न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (JMFC) राहुल जैन की अदालत ने यह कड़ा रुख अपनाया है। इससे ठीक पहले ध्रुव राठी के अचानक भारत छोड़कर लंदन रवाना हो जाने की खबरें भी सामने आई हैं। यह पूरा मामला साल 2018 में उनके यूट्यूब चैनल पर प्रसारित एक राजनीतिक वीडियो और उससे जुड़े गंभीर आरोपों से संबंधित है। हालांकि, न्यायशास्त्र के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार मानहानि की यह कार्यवाही अभी विचाराधीन है और वारंट जारी होने को किसी भी रूप में दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
Dhruv Rathee News: साकेत कोर्ट में पेशी से पहले लंदन रवानगी और जमानती वारंट की कार्रवाई
साकेत अदालत ने पूर्व में निर्देश जारी करते हुए ध्रुव राठी को 17 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत अथवा विधिवत कानूनी माध्यम से पेश होने का आदेश दिया था। शिकायतकर्ता की ओर से अदालत को यह जानकारी दी गई थी कि ध्रुव राठी सामान्य रूप से ऑस्ट्रिया में निवास करते हैं, किंतु हाल के दिनों में वे भारत प्रवास पर थे। इसी आधार पर अदालत ने गुरुग्राम स्थित उनके आवास पर नए सिरे से समन तामील कराने और नोटिस चस्पा करने की प्रक्रिया की अनुमति दी थी।
शनिवार को जब मामले की पुकार हुई, तो ध्रुव राठी की ओर से अदालत में कोई उपस्थिति दर्ज नहीं कराई गई। इस बीच मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया गतिविधियों से यह बात सामने आई कि वे निर्धारित तारीख से पूर्व ही दिल्ली से लंदन के लिए उड़ान भर चुके हैं। अदालत ने प्रतिवादी की लगातार गैर-मौजूदगी और प्रक्रिया के विलंब को गंभीरता से लेते हुए उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से औपचारिक जमानती वारंट जारी करने का विधिक आदेश पारित कर दिया।
क्या है साल 2018 का ‘BJP IT Cell Part 2’ वीडियो विवाद?
ध्रुव राठी के खिलाफ यह कानूनी विवाद मार्च 2018 में उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए एक वीडियो से शुरू हुआ था, जिसका शीर्षक ‘BJP IT Cell Part 2’ रखा गया था। इस वीडियो को लेकर भारतीय जनता पार्टी के सोशल मीडिया और आईटी सेल से जुड़े कार्यकर्ता विकास सांकृत्यायन उर्फ विकास पांडे ने दिल्ली की अदालत में भारतीय दंड संहिता की मानहानि से संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक परिवाद दायर किया था।
शिकायतकर्ता विकास पांडे का आरोप है कि वीडियो में उनके नाम, सोशल मीडिया अकाउंट और उनकी गतिविधियों को लेकर ऐसे अपमानजनक और तथ्यहीन दावे किए गए जिससे सार्वजनिक जीवन में उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, पेशेवर छवि और व्यक्तिगत सम्मान को अपूरणीय क्षति पहुंची। शिकायत में कहा गया कि वीडियो में उन पर झूठे आरोप मढ़े गए थे कि वे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को बदनाम करने और दुर्भावनापूर्ण सामग्री प्रसारित करने वाले एक संगठित तंत्र का संचालन करते हैं। इसी कथित दुर्भावना को आधार बनाकर विकास पांडे ने आपराधिक मानहानि की कानूनी कार्यवाही शुरू की थी।
समन तामील कराने की लंबी जद्दोजहद और गुरुग्राम आवास पर चस्पा नोटिस
यह मामला पिछले कई वर्षों से अदालत में समन की उचित तामील न हो पाने के तकनीकी पेच में फंसा हुआ था। चूंकि ध्रुव राठी अधिकांश समय भारत से बाहर यूरोप (ऑस्ट्रिया) में रहते हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय पते पर समन की कानूनी तामील कराना शिकायतकर्ता के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। इसी वजह से मामले की सुनवाई बार-बार आगे खिसकती रही।
हाल ही में शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत में एक नई अंतरिम अर्जी दाखिल कर यह दलील दी कि ध्रुव राठी भारत आए हुए हैं और हरियाणा के गुरुग्राम में अपने पारिवारिक आवास पर रुके हैं। इस सूचना का संज्ञान लेते हुए साकेत कोर्ट ने शिकायतकर्ता को निर्धारित प्रक्रिया शुल्क जमा करने और गुरुग्राम स्थित आवास के दरवाजे पर समन चस्पा करने (Affixation) का निर्देश दिया था। अदालत का मानना था कि आवास पर नोटिस चस्पा होने के बाद यह विधिक रूप से मान लिया जाता है कि संबंधित व्यक्ति को अदालती आदेश की विधिवत जानकारी प्राप्त हो चुकी है।
विधिक दृष्टिकोण: क्या होता है जमानती वारंट और इसके मायने?
आपराधिक न्याय प्रणाली में जमानती वारंट (Bailable Warrant) अदालत द्वारा उठाया जाने वाला एक अनिवार्य प्रक्रियात्मक कदम है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसी अभियुक्त अथवा प्रतिवादी को अदालत के समक्ष उपस्थित होने के लिए विवश करना होता है। जब कोई व्यक्ति अदालत द्वारा जारी समन की बार-बार अनदेखी करता है या निर्धारित तारीख पर बिना किसी वैध कारण के अनुपस्थित रहता है, तो अदालत पुलिस या कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जमानती वारंट जारी करती है।
जमानती वारंट का सीधा अर्थ गिरफ्तारी या जेल भेजना नहीं होता। इस आदेश के तहत संबंधित व्यक्ति को पुलिस के समक्ष एक निश्चित मुचलका और जमानत राशि प्रस्तुत करनी होती है, जिसमें वह अदालत की आगामी तारीख पर अनिवार्य रूप से उपस्थित होने का वचन देता है। यदि वह व्यक्ति मुचलका भरने को तैयार हो जाता है, तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाता। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति जमानती वारंट के बावजूद पेश नहीं होता है, तो अदालत अगले कदम के रूप में गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी करने और भगोड़ा घोषित करने जैसी कठोर विधिक कार्रवाई कर सकती है।
Dhruv Rathee News: न्यायिक प्रक्रिया के आगामी चरण और संभावित कानूनी विकल्प
साकेत अदालत द्वारा जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद अब गेंद पूरी तरह ध्रुव राठी और उनकी कानूनी टीम के पाले में है। विदेश में होने के कारण ध्रुव राठी के वकील अब अगली सुनवाई पर वकालतनामा और हाजिरी माफी की अर्जी दाखिल कर सकते हैं या फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए वर्चुअल रूप से अदालत की कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति मांग सकते हैं। इसके अलावा वे इस वारंट को निरस्त (Recall) कराने के लिए सक्षम अदालत में मुचलका भरने की अर्जी भी लगा सकते हैं।
यदि प्रतिवादी पक्ष चाहे तो वह इस मानहानि की कार्यवाही और समन को रद्द कराने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख कर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 (पूर्ववर्ती सीआरपीसी की धारा 482) के तहत याचिका भी दायर कर सकता है। फिलहाल अदालत के इस ताजा आदेश ने आठ साल पुराने इस राजनीतिक-कानूनी विवाद को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है और मामले की अगली सुनवाई पर अदालती रुख अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।
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