Bihar-Uttar Pradesh Flood Alert: गंडक नदी के रास्ते बिहार और यूपी पर मंडराया खतरा, 8 जिलों में हाई अलर्ट घोषित

गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका, बिहार के 6 और यूपी के 2 जिलों में अलर्ट

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Bihar-Uttar Pradesh Flood Alert: नेपाल के पर्वतीय इलाकों में बुधवार सुबह अचानक आए विनाशकारी सैलाब ने भारी तबाही मचाई है। रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में नदी के उफान ने कई बड़े पुलों, सड़कों और बिजली के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। जलस्तर में आई अप्रत्याशित तेजी के कारण स्थानीय निवासियों को जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की ओर भागना पड़ा।
आपदा प्रबंधन एजेंसियों के अनुसार बाढ़ का यह पानी तिब्बत सीमा के समीप ल्हेंदे नदी के ऊपरी हिस्से से होते हुए रसुवागढ़ी, न्यू त्रिशूली ब्रिज और मालेखु ब्रिज के रास्ते आगे बढ़ा है। नेपाल की त्रिशूली और काली गंडकी मिलकर देवघाट में नारायणी नदी बनती हैं, जो भारत में वाल्मीकिनगर पहुंचते ही गंडक नदी कहलाती हैं। इस भीषण जलप्रवाह के चलते भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में केंद्रीय जल आयोग (CWC) और स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन अलर्ट जारी कर दिया है।

Bihar-Uttar Pradesh Flood Alert: बाढ़ के पीछे तीन प्रमुख वैज्ञानिक आशंकाएं, बारिश नहीं कुछ और है वजह

नेपाल के मौसम विभाग के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी मिन कुमार आर्याल के अनुसार, रसुवा क्षेत्र में पिछले 24 घंटों में मात्र 7 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह सैलाब मानसूनी बारिश का परिणाम नहीं है। वैज्ञानिक और भूगर्भ विशेषज्ञ तीन प्रमुख संभावनाओं की गहन जांच कर रहे हैं।
पहली आशंका यह है कि पहाड़ों से विशालकाय चट्टानें, बर्फ और भारी मलबा खिसककर नदी के संकरे रास्ते में आ गिरे, जिससे एक प्राकृतिक बांध बन गया और दबाव बढ़ने पर रुकावट टूटने से विनाशकारी सैलाब आ गया। दूसरी संभावना बाढ़ आने से ठीक पहले दर्ज हुए 4.4 तीव्रता के भूकंप से जुड़ी है, जिससे बड़े पैमाने पर हिमस्खलन होकर मलबा नदी में गिरा होगा। वहीं तीसरी बड़ी आशंका ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की है, जिसमें तापमान बढ़ने से पहाड़ों पर स्थित बर्फीली झील का पानी अचानक बाहर निकल आया।

बिहार के 6 जिलों में बढ़ाई गई चौकसी, NDRF और SDRF की टीमें मुस्तैद

गंडक नदी के जलप्रवाह के सीधे रास्ते में पड़ने वाले बिहार के छह प्रमुख जिलों—पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली—में प्रशासन को पूरी तरह सतर्क कर दिया गया है। भारत में सबसे पहले जलप्रवाह पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर बैराज पर पहुंचेगा, जिस कारण बैराज के सभी फाटकों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
राहत और बचाव के लिए बेतिया, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं। तटबंधों की सतत निगरानी की जा रही है और गंडक दियारा इलाके के ग्रामीणों व मछुआरों को नदी के किनारे न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक यदि जलस्तर खतरे के निशान को पार करता है, तो तुरंत राहत शिविर सक्रिय कर दिए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर में प्रशासन अलर्ट मोड पर

गंडक (नारायणी) नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों—महराजगंज और कुशीनगर—में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
कुशीनगर और महराजगंज के निचले कछारी इलाकों और गांवों में ग्राम प्रधानों तथा राजस्व कर्मियों को अलर्ट पर रखा गया है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण हर घंटे जलस्तर की रीडिंग ले रहा है। पशुपालकों को मवेशियों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर ले जाने और स्वास्थ्य विभाग को जरूरी दवाओं, ब्लीचिंग पाउडर और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।

Bihar-Uttar Pradesh Flood Alert: केंद्रीय जल आयोग की निरंतर निगरानी, अफवाहों से बचने की अपील

केंद्रीय जल आयोग और दोनों राज्यों के जल संसाधन विभाग नेपाल के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में हैं और पानी के प्रवाह का रियल-टाइम डेटा साझा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मैदानी भागों में नदी का पाट चौड़ा होने से पानी फैलेगा, जिससे बहाव की रफ्तार धीमी हो सकती है, किंतु तटबंधों की सुरक्षा के लिए अगले 48 घंटे बेहद संवेदनशील रहेंगे।
प्रशासन ने आम जनता से किसी भी प्रकार की अपुष्ट अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल सरकारी बुलेटिन व आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। दोनों देशों के आपदा तंत्र स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

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