Delhi Weather: दिल्ली में बादलों के बावजूद क्यों नहीं बरस रहा मॉनसून? जानिए मौसम की असली वजह

Delhi Weather: दिल्ली में बादलों के बावजूद क्यों नहीं बरस रहा मॉनसून? जानिए मौसम की असली वजह

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Delhi Weather: दिल्ली के आसमान में इन दिनों एक अजीब सी स्थिति बनी हुई है। सुबह से ही काले-घने बादल छाए रहते हैं, हवा में नमी का अहसास भी होता है, लेकिन जब बारी बरसने की आती है, तो बादल खिसक जाते हैं। यह स्थिति दिल्ली-एनसीआर के निवासियों के लिए एक पहेली बन गई है। उमस इतनी ज्यादा है कि लोग बेहाल हैं, लेकिन अच्छी बारिश का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। आखिर मॉनसून की वह सक्रियता कहां गायब है, जो आमतौर पर जुलाई के इस हफ्ते में दिल्ली को भिगो देती थी? वैज्ञानिक इसे ‘एक्टिव ब्रेक साइकल’ का नाम दे रहे हैं, जिसके पीछे कई जटिल जलवायु कारक जिम्मेदार हैं।

Delhi Weather: क्यों नहीं हो रही दिल्ली में बारिश?

मॉनसून का दिल्ली तक पहुंचना सिर्फ बादलों का आना नहीं है, बल्कि यह समुद्र और हवा के एक बड़े तंत्र का हिस्सा है। इस साल प्रशांत महासागर में ‘अल-नीनो’ की सक्रियता काफी तेज है। जब प्रशांत महासागर का पानी औसत से ज्यादा गर्म हो जाता है, तो हवाओं का वह रुख बदल जाता है जो नमी को भारत की तरफ धकेलता है। ट्रेड विंड्स, जो आमतौर पर नमी वाले बादलों को अपने साथ लाती हैं, वे फिलहाल कमजोर पड़ी हुई हैं।

इसके अलावा, दिल्ली के ऊपरी वायुमंडल में इस समय सूखी और गर्म हवाओं का दबाव बना हुआ है। निचले स्तर पर तो नमी है, जिससे बादल बन जाते हैं, लेकिन ऊपर से पड़ रहे इस दबाव के कारण बादल बरस नहीं पा रहे हैं। वैज्ञानिक भाषा में इसे ‘ब्रेक मॉनसून’ कहा जाता है। यह ऐसा दौर है जब मॉनसून अपनी लय खो देता है और बारिश की प्रक्रिया रुक जाती है।

पश्चिमी विक्षोभ और जेट स्ट्रीम का असर

दिल्ली और उत्तर भारत की बारिश में ‘पश्चिमी विक्षोभ’ का भी बड़ा हाथ होता है, जो मध्य एशिया से ठंडी और नमी वाली हवाएं लेकर आते हैं। इस साल जेट स्ट्रीम यानी ऊपरी वायुमंडल में हवाओं की जो तेज पट्टी होती है, वह अपनी सामान्य जगह से उत्तर की ओर खिसक गई है। इस शिफ्ट के कारण विक्षोभ दिल्ली तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहे हैं।

इसके साथ ही, शहरीकरण का असर भी साफ दिख रहा है। दिल्ली की कंक्रीट की इमारतें और सड़कों ने गर्मी को सोखने की क्षमता बढ़ा दी है। इस बढ़ी हुई गर्मी के कारण स्थानीय स्तर पर जो बारिश के बादल बनने चाहिए थे, वे नहीं बन पा रहे हैं। स्थानीय लोग भी इसे महसूस कर रहे हैं, जहां दिन में तेज धूप के बाद शाम को उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है।

Delhi Weather: आम जनजीवन पर पड़ रहा गहरा असर

इस देरी का सबसे बुरा असर किसानों पर पड़ रहा है। दिल्ली से सटे ग्रामीण इलाकों में धान की रोपाई के लिए बारिश का पानी बहुत जरूरी होता है। खेत सूख रहे हैं और किसानों को सिंचाई के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे उनकी लागत बढ़ गई है। शहर में बिजली की खपत ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं क्योंकि कूलर और एसी बिना रुके चल रहे हैं। स्वास्थ्य के नजरिए से देखें तो यह उमस और गर्मी का मेल सांस की तकलीफ और वायरल संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी कर रहा है। अस्पताल की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया है जो इस उमस भरी गर्मी से बीमार पड़ रहे हैं।

Delhi Weather: क्या आगे स्थिति सुधरेगी?

मौसम विभाग के आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मॉडलों के अनुसार, आने वाले कुछ हफ्तों में अनिश्चितता बनी रहेगी। अगर हिंद महासागर में कोई सकारात्मक बदलाव आता है या कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है, तो हालात बदल सकते हैं। लेकिन फिलहाल अल-नीनो का मजबूत असर जुलाई और अगस्त के महीनों में भी मौसम की लय बिगाड़ सकता है।

दिल्ली का यह मॉनसून अब सिर्फ एक मौसम की घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह जलवायु में हो रहे बड़े बदलावों का संकेत है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र तो गर्म हो रहे हैं, लेकिन बारिश का वितरण असमान हो गया है। कभी बहुत तेज बारिश, तो कभी लंबा सूखा—यही अब दिल्ली के नए मॉनसून की सच्चाई बन गई है। फिलहाल, दिल्लीवासी बादलों की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, लेकिन असली राहत कब मिलेगी, यह बता पाना मौसम विशेषज्ञों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।

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