Delhi Riots Case 2026: दिल्ली दंगा मामले में सात दोषियों को छह-छह माह का कठोर कारावास, धारा 144 का उल्लंघन पड़ा भारी
Delhi Riots Case 2026: दिल्ली दंगा मामले में सात दोषियों को छह-छह माह का कठोर कारावास, धारा 144 का उल्लंघन पड़ा भारी
Delhi Riots Case 2026: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने सात दोषियों को सजा सुनाई है। धारा 144 के तहत लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने पर प्रत्येक दोषी को छह माह का कठोर कारावास और एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सभी दोषी ट्रायल के दौरान छह महीने से अधिक समय जेल में बिता चुके थे, इसलिए जुर्माना जमा करने के बाद उन्हें दोबारा जेल नहीं जाना पड़ा।
दिल्ली दंगा मामले में कितने दोषियों को सजा मिली और क्या सजा दी गई?
कड़कड़डूमा कोर्ट ने सात दोषियों को छह-छह माह के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह सजा धारा 144 के तहत लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के मामले में दी गई है। दोषी पहले से ही ट्रायल के दौरान छह महीने से ज्यादा समय जेल में बिता चुके थे। जुर्माना जमा करने के बाद उन्हें अतिरिक्त जेल की सजा नहीं भुगतनी पड़ेगी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया।
दोषियों के नाम क्या हैं और मामला किस थाने में दर्ज था?
इस मामले में कुलदीप सिंह, हरजीत सिंह उर्फ हैप्पी, संदीप उर्फ संजीव, राहुल उर्फ अजय, भरत भूषण उर्फ लक्की, सचिन रस्तोगी और धर्मेंद्र उर्फ धाम को दोषी ठहराया गया था। मामला खजूरी खास थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। ये सभी फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में शामिल थे। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत उन्हें दोषी माना। धारा 188 सार्वजनिक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवहेलना से संबंधित है।
धारा 144 और धारा 188 का उल्लंघन क्या है?
धारा 144 के तहत प्रशासन द्वारा निषेधाज्ञा जारी की जाती है, जिसमें किसी इलाके में लोगों के इकट्ठा होने या कुछ गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है। फरवरी 2020 के दंगों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में यह आदेश लागू था। इसका उल्लंघन करने पर धारा 188 के तहत कार्रवाई होती है। अदालत ने माना कि ऐसे आदेशों का उल्लंघन कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती पैदा करता है। निषेधाज्ञा का पालन न करना सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
अदालत ने सजा सुनाते समय क्या कहा?
सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दोषियों की आर्थिक स्थिति और परिवार की जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए नरमी की अपील की थी। अभियोजन पक्ष ने कहा कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे आदेशों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। कानून के प्रति सम्मान बनाए रखने के लिए इस तरह के मामलों में सख्ती जरूरी है। फैसले में यह साफ किया गया कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन गंभीर मसला है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दोषी पहले से कितना समय जेल में बिता चुके थे?
सभी सात दोषी ट्रायल के दौरान छह महीने से अधिक समय जेल में बिता चुके थे। इसलिए छह माह की सजा सुनाए जाने के बावजूद उन्हें अतिरिक्त कारावास नहीं भुगतना पड़ेगा। जुर्माना जमा करने के बाद मामला पूरा हो जाएगा। यह स्थिति कई मामलों में देखने को मिलती है, जहां ट्रायल के दौरान बिताया गया समय सजा में समायोजित हो जाता है। अदालत ने दोष सिद्धि के बाद सजा का फैसला सुनाया।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े इस मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने सात दोषियों को धारा 144 के उल्लंघन पर छह-छह माह का कठोर कारावास और जुर्माना सुनाया है। दोषी पहले से जेल में समय बिता चुके होने के कारण अतिरिक्त सजा नहीं भुगतेंगे। अदालत ने कानून के प्रति सम्मान बनाए रखने पर जोर दिया।
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