कानपुर के सीएसजेएमयू में बड़ा फैसला, ज्योतिष और वास्तुशास्त्र में चार वर्षीय स्नातक ऑनर्स शुरू, बीटेक-बीबीए की फीस बढ़ी
CSJMU Kanpur New Courses 2027: कानपुर के सीएसजेएमयू में बड़ा फैसला, ज्योतिष और वास्तुशास्त्र में चार वर्षीय स्नातक ऑनर्स शुरू, बीटेक-बीबीए की फीस बढ़ी
CSJMU Kanpur New Courses 2027: छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) कानपुर की एकेडमिक काउंसिल ने शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में हुई बैठक में ज्योतिषशास्त्र और वास्तुशास्त्र में चार वर्षीय स्नातक ऑनर्स पाठ्यक्रम शुरू करने की मंजूरी दी गई। साथ ही बीटेक, बीबीए, बीकॉम और बीडेस जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की शुल्क संरचना में वृद्धि की गई। पीएचडी कोर्सवर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन रिसर्च को अनिवार्य बनाया गया है। ये बदलाव विश्वविद्यालय को पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में कदम माने जा रहे हैं।
ज्योतिष और वास्तुशास्त्र में कौन से नए कोर्स शुरू होंगे?
दीनदयाल शोध केंद्र के तहत बैचलर ऑफ आर्ट्स (शास्त्री) ज्योतिषशास्त्र और बैचलर ऑफ आर्ट्स (शास्त्री) वास्तुशास्त्र नाम से दो चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम शुरू होंगे। प्रत्येक कोर्स में 30 सीटें होंगी और वार्षिक शुल्क 26,200 रुपये रखा गया है। ये कोर्स सत्र 2027-28 से शुरू होंगे। इसके अलावा गीता ज्ञान संस्थान कुरुक्षेत्र के सहयोग से श्रीमद्भगवद्गीता पर एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम और एक सेमेस्टर का गीता सार प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी अगले सत्र से शुरू होगा। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को अकादमिक स्तर पर मजबूत करना है।
बीटेक, बीबीए और अन्य कोर्सों की फीस कितनी बढ़ेगी?
स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के तहत बीटेक के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, केमिकल इंजीनियरिंग और मैटेरियल्स साइंस एंड मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग का शिक्षण शुल्क अगले सत्र से 10,000 रुपये बढ़ जाएगा। बीडेस की फीस 50,000 रुपये से बढ़कर 60,000 रुपये हो जाएगी। बीबीए की फीस 60,000 रुपये से बढ़कर 75,000 रुपये हो जाएगी। बीकॉम ऑनर्स की फीस अगले सत्र में 65,000 रुपये हो जाएगी। ये वृद्धि मुख्य रूप से कैम्पस के व्यावसायिक और तकनीकी पाठ्यक्रमों पर लागू होगी।
पीएचडी और अन्य पाठ्यक्रमों में क्या बदलाव हुए हैं?
शोधार्थियों को अब पीएचडी कोर्सवर्क में एक क्रेडिट का ‘एआई इन रिसर्च’ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन रिसर्च) पाठ्यक्रम पढ़ना अनिवार्य होगा। स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के तहत बीएससी-एमएससी इंटीग्रेटेड कोर्स में सांख्यिकी और पर्यावरण विज्ञान को अतिरिक्त विषयों के रूप में शामिल करने की अनुमति दी गई है। इस कोर्स में सीटों की संख्या 150 से बढ़ाकर 180 कर दी गई है। शारीरिक शिक्षा विभाग की ओर से योग आधारित दो नए कौशल प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी शुरू होंगे। इनमें ‘योगा फॉर डायबिटीज प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट’ और ‘योगा फॉर कॉरपोरेट सेक्टर’ शामिल हैं। दोनों की अवधि तीन-तीन माह और शुल्क पांच हजार रुपये होगा।
ये फैसले क्यों महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं?
ज्योतिष और वास्तुशास्त्र जैसे पारंपरिक विषयों को चार वर्षीय डिग्री कार्यक्रम में शामिल करना विश्वविद्यालय की ओर से भारतीय ज्ञान प्रणाली को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने का प्रयास है। दूसरी ओर व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस बढ़ने से विश्वविद्यालय की आय बढ़ेगी, जिसका उपयोग इंफ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्ता सुधार में किया जा सकता है। पीएचडी में एआई को शामिल करने से शोध कार्य आधुनिक तकनीकों के साथ जुड़ेगा। योग आधारित कोर्स स्वास्थ्य और कॉर्पोरेट सेक्टर की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किए गए हैं।
छात्रों और अभिभावकों के लिए क्या असर पड़ेगा?
नए कोर्सों में रुचि रखने वाले छात्रों को 2027-28 सत्र से ज्योतिष और वास्तुशास्त्र में औपचारिक डिग्री हासिल करने का मौका मिलेगा। हालांकि बीटेक, बीबीए और बीकॉम की फीस बढ़ने से इन पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन को फीस वृद्धि के साथ छात्रवृत्ति और अन्य सुविधाओं पर भी ध्यान देना होगा। एआई इन रिसर्च कोर्स शोधार्थियों को आधुनिक शोध पद्धतियों से परिचित कराएगा।
सीएसजेएमयू का यह फैसला पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा दोनों को आगे बढ़ाने की दिशा में है। ज्योतिष-वास्तु जैसे विषयों में डिग्री की शुरुआत और व्यावसायिक कोर्सों की फीस में बदलाव से विश्वविद्यालय का शैक्षणिक परिदृश्य प्रभावित होगा। छात्रों को नए अवसरों और बढ़ी हुई लागत दोनों का सामना करना पड़ेगा।
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