Crude Oil Price Hike: फरवरी से कच्चा तेल 65% होगा महंगा, ₹10,057 पहुँचा भाव, हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया

हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल ₹6,092 से ₹10,057 प्रति बैरल, भारत समेत दुनिया पर बड़ा असर

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Crude Oil Price Hike: मध्य पूर्व में गहराते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 28 फरवरी से अब तक 65.09 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़त दर्ज की गई है। हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के बंद होने से तेल की आपूर्ति ठप होने की आशंका ने दुनिया भर के बाजारों में हड़कंप मचा दिया है।

कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई?

केडिया एडवायजरी के आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को कच्चा तेल ₹6,092 प्रति बैरल था, जो 4 मई तक उछलकर ₹10,057 प्रति बैरल पर पहुँच गया है। केवल दो महीनों में आई यह 65% की तेजी पिछले कई दशकों के सबसे बड़े उछालों में से एक है। कच्चे तेल के साथ-साथ एल्युमिनियम, कॉपर और जिंक जैसी औद्योगिक धातुओं की कीमतों में भी 5 से 18 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है।

हॉर्मुज स्ट्रेट क्यों महत्वपूर्ण है?

हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ है, जहाँ से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद करने से सऊदी अरब, यूएई और इराक जैसे बड़े उत्पादकों की सप्लाई चेन टूट गई है। चूंकि अधिकांश एशियाई और यूरोपीय देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं, इसलिए इसके बंद होने का सीधा असर वैश्विक कीमतों पर पड़ रहा है।

महंगाई पर क्या असर होगा?

भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ेगा। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की आशंका है। परिवहन लागत बढ़ने से फल, सब्जी और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतें भी आसमान छू सकती हैं। इससे मुद्रास्फीति (Inflation) के बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जो आम आदमी की जेब पर बड़ा बोझ डालेगा।

किन उद्योगों पर असर पड़ेगा?

तेल की कीमतों के साथ-साथ कॉपर (₹1,276.75/kg) और एल्युमिनियम (₹371/kg) जैसी धातुओं की बढ़ती कीमतें ऑटोमोबाइल, निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों के लिए संकट बन गई हैं। कच्चे माल की लागत बढ़ने से गाड़ियां, मकान और घरेलू उपकरण महंगे हो जाएंगे। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो वैश्विक औद्योगिक उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है और मंदी (Recession) का खतरा बढ़ सकता है।

भारत सरकार की क्या तैयारी?

सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अपने ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (Strategic Petroleum Reserves) से तेल निकालने पर विचार कर रही है। साथ ही, रूस और अन्य वैकल्पिक उत्पादकों से अतिरिक्त आयात के लिए कूटनीतिक वार्ता तेज कर दी गई है। राज्यों से वैट (VAT) कम करने और केंद्र द्वारा एक्साइज ड्यूटी में कटौती की संभावनाओं पर भी मंथन चल रहा है, ताकि आम जनता को कुछ राहत मिल सके।

बाजार विशेषज्ञों की क्या राय?

बाजार विशेषज्ञ अजय केडिया का मानना है कि कीमतों में स्थिरता तभी आएगी जब हॉर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित आवागमन के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए बाजार में ‘वोलाटिलिटी’ (उतार-चढ़ाव) बनी रहने की उम्मीद है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे सुरक्षित संपत्तियों जैसे सोने में निवेश बढ़ाएं। ओपेक (OPEC) देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने का फैसला भी कीमतों को काबू करने में सहायक हो सकता है।

भविष्य की क्या है राह?

यह संकट भारत के लिए अपनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ाने का एक बड़ा संकेत है। सरकार अब इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), सौर ऊर्जा और ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ पर और अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है। तेल पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग और नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों को तेजी से विकसित करना अब अनिवार्य हो गया है। वैश्विक कूटनीति के माध्यम से शांति बहाली ही इस संकट का एकमात्र स्थाई समाधान है।

Crude Oil Price Hike: निष्कर्ष

कच्चे तेल की कीमतों में आया यह 65% का उछाल केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक गंभीर वैश्विक संकट की चेतावनी है। हॉर्मुज स्ट्रेट का बंद होना और मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव भारत जैसे आयातक देशों के लिए दोहरी चुनौती है। अब यह देखना होगा कि वैश्विक शक्तियां बातचीत के जरिए इस जलमार्ग को कैसे खुलवाती हैं। फिलहाल, आम नागरिकों को ऊर्जा संरक्षण और सतर्कता अपनाने की जरूरत है क्योंकि आने वाले कुछ हफ्ते आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

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