Crude Oil Price: क्रूड ऑयल 110 डॉलर प्रति बैरल के पार, ईरान युद्ध से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद, इराक का उत्पादन 70% घटा, ट्रंप बोले “यह बहुत छोटी कीमत है”

ब्रेंट क्रूड 22% उछलकर 110$+ पहुंचा, पिछले हफ्ते 36% बढ़ोतरी, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद, इराक उत्पादन 70% गिरा, कुवैत ने कटौती की

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Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में ऐसी आग लगाई है जिसकी लपटें अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झुलसा रही हैं। आज सोमवार 9 मार्च 2026 को कच्चे तेल की कीमतें करीब 22 फीसदी उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। इससे पहले पिछले सप्ताह भी कीमतों में रिकॉर्ड 36 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। ईरान युद्ध के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कुवैत ने उत्पादन में कटौती की घोषणा की है और इराक का उत्पादन 70 फीसदी तक घट गया है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने के लिए चुकाई जाने वाली बहुत छोटी कीमत है।

Crude Oil Price: पिछले हफ्ते 36 फीसदी, आज 22 फीसदी और उछाल

कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल अचानक नहीं आया बल्कि पिछले कुछ हफ्तों से लगातार बढ़त जारी है। पिछले सप्ताह कीमतों में एकमुश्त 36 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई थी जो दशकों में सबसे बड़ी साप्ताहिक उछाल थी। अब आज सोमवार को बाजार खुलते ही फिर 22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इन दोनों उछालों को मिला दें तो कुछ ही दिनों में कच्चे तेल की कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष जल्द नहीं थमा तो कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकती हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद – दुनिया की ऊर्जा नस पर संकट

इस पूरी उथल-पुथल की जड़ है होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना। यह दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग है जिससे वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का करीब 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह संकरा जलमार्ग सऊदी अरब, कुवैत, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के तेल को दुनिया के बाकी हिस्सों तक पहुंचाने का एकमात्र समुद्री रास्ता है। ईरान युद्ध के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को खतरा बढ़ गया है और तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। जब यह नली बंद होती है तो दुनियाभर में तेल की आपूर्ति घट जाती है और कीमतें आसमान छूने लगती हैं।

Crude Oil Price: कुवैत ने उत्पादन में की कटौती

ओपेक का पांचवां सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश कुवैत ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एहतियाती कदम उठाया है। कुवैत ने कच्चे तेल के उत्पादन और रिफाइनरी आउटपुट में कटौती की आधिकारिक घोषणा की है। कुवैती अधिकारियों के मुताबिक यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को लेकर धमकियां दी गई हैं। जब तेल टैंकर इस रास्ते से सुरक्षित नहीं गुजर सकते तो उत्पादन जारी रखने का कोई व्यावहारिक मतलब नहीं बचता। इस कटौती ने वैश्विक आपूर्ति की स्थिति को और कठिन बना दिया है।

इराक का उत्पादन 70 फीसदी गिरा

सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा इराक से आया है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इराक के तीन प्रमुख दक्षिणी तेल क्षेत्रों से उत्पादन में करीब 70 फीसदी की भारी कमी आ गई है। इराक का दैनिक उत्पादन जो पहले लगभग 4.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन था वह अब घटकर मात्र 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है। यानी तीन मिलियन बैरल यानी करीब 30 लाख बैरल प्रतिदिन का उत्पादन बाजार से गायब हो गया है। इराक दुनिया के शीर्ष तेल उत्पादकों में शामिल है और इसके उत्पादन में इतनी बड़ी कमी का असर वैश्विक कीमतों पर सीधे पड़ना तय था।

Crude Oil Price: UAE की सतर्क स्थिति

संयुक्त अरब अमीरात ने फिलहाल संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। UAE ने कहा है कि वह मौजूदा हालात को देखते हुए समुद्र में स्थित अपने तेल उत्पादन को सावधानीपूर्वक प्रबंधित कर रहा है ताकि भंडारण जरूरतों का संतुलन बना रहे। हालांकि UAE में जमीन पर स्थित तेल उत्पादन सामान्य रूप से जारी है। UAE की यह सतर्क नीति बताती है कि वह स्थिति के और बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं कर रहा।

ट्रंप का बयान – “बहुत छोटी कीमत है”

जब कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचीं तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने लिखा कि थोड़े समय के लिए तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी जो ईरान का परमाणु खतरा खत्म होते ही तेजी से गिर जाएगी, अमेरिका और पूरी दुनिया की सुरक्षा और शांति के लिए चुकाई जाने वाली बहुत छोटी कीमत है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग इससे अलग सोचते हैं वे मूर्ख हैं। ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अमेरिका फिलहाल इस युद्ध को रोकने के मूड में नहीं है।

Crude Oil Price: भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 फीसदी से अधिक हिस्सा आयात से पूरा करता है। तेल की यह महंगाई भारत के व्यापार घाटे को बढ़ाएगी, रुपये पर दबाव डालेगी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का रास्ता खोल सकती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा जो पहले से ही चिंता का विषय है। आम आदमी के लिए परिवहन से लेकर रसोई गैस तक सब कुछ महंगा हो सकता है।

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