CM Rekha Gupta: CM रेखा गुप्ता का बड़ा एक्शन, अवैध पांचवीं मंजिल वाली इमारतें होंगी सील

CM रेखा गुप्ता ने बिना मंजूरी बनी पांचवीं मंजिलों को सील करने के MCD को सख्त निर्देश दिए

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CM Rekha Gupta: देश की राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत के अचानक जमींदोज होने और उसमें सात निर्दोष लोगों की जान जाने की दुखद घटना के बाद दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माण और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ व्यापक प्रशासनिक अभियान छेड़ दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नगर निगम और राजस्व विभाग को राजधानी भर में बिना सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के खड़ी की गई अवैध पांचवीं मंजिल वाली सभी इमारतों की तत्काल पहचान कर उन्हें सील करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
सत्य निकेतन की घटना ने छात्र बहुल कॉलोनियों में चल रहे पेइंग गेस्ट (PG), हॉस्टलों और दशकों पुराने कमजोर ढांचों पर किए गए अतिरिक्त निर्माण की पोल खोल दी है। सरकार के इस ताजा फैसले से स्पष्ट संकेत मिलता है कि अब केवल हादसे की जांच या कागजी नोटिस तक सीमित रहने के बजाय मौके पर सख्त सीलिंग और विध्वंस की कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी अन्य निर्दोष नागरिक या छात्र को प्रशासनिक लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर न चुकानी पड़े।

CM Rekha Gupta: सत्य निकेतन त्रासदी के बाद ग्राउंड जीरो पर एक्शन 

साउथ-वेस्ट दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर की दोपहर करीब 1:30 बजे छात्रों के पेइंग गेस्ट के रूप में इस्तेमाल हो रही पांच मंजिला इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी। इस भयानक हादसे के बाद चले मैराथन रेस्क्यू ऑपरेशन में मलबे से सात शव निकाले गए, जबकि कई छात्र और नागरिक गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पतालों में उपचाराधीन हैं।
हादसे के तुरंत बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्वयं घटनास्थल का दौरा किया और राहत व बचाव कार्यों की प्रत्यक्ष निगरानी की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट घोषणा की कि राजधानी के छात्रों और निवासियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति, चाहे वह लालची संपत्ति मालिक हो या आंख मूंदने वाला भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारी, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। इसी कड़ी में अब तक इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजा जा चुका है, जबकि दिल्ली नगर निगम (MCD) के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच वरिष्ठ इंजीनियरों को सीधे निलंबित किया जा चुका है।

अवैध पांचवीं मंजिल पर सीलिंग का हंटर: क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

दिल्ली सरकार के इस व्यापक अभियान का प्राथमिक निशाना वे तमाम इमारतें हैं जहां स्वीकृत नक्शे और निर्धारित फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) का खुला उल्लंघन करके पांचवीं मंजिलें तान दी गई हैं। सत्य निकेतन जैसे पुनर्वसन कॉलोनियों (Resettlement Colonies) में मूल रूप से 40 से 50 वर्ग गज के छोटे भूखंडों पर केवल ग्राउंड प्लस वन (G+1) निर्माण की ही विधिक अनुमति थी। किंतु दशकों से चल रहे भ्रष्ट तंत्र और अनियंत्रित लालच के चलते लोगों ने बिना किसी बीम, पिलर या गहरी नींव के इन ढांचों पर चार और पांच मंजिलें खड़ी कर दीं।
इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के अनुसार, किसी पुरानी इमारत की नींव पर जब स्वीकृत सीमा से दो या तीन गुना अधिक भार लाद दिया जाता है, तो उस ढांचे का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है। जरा सा भी जलजमाव, बेसमेंट की खुदाई या कंपन होने पर पूरी इमारत भरभराकर गिर सकती है। इसी खतरे को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए मुख्यमंत्री ने एमसीडी को निर्देश दिया है कि जिन भी भवनों में पांचवीं मंजिल बिना पूर्व तकनीकी स्वीकृति और लेआउट प्लान के बनाई गई है, उन्हें बिना किसी देरी के सील किया जाए।

MCD को जीरो टॉलरेंस के निर्देश: लापरवाह अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम की साख पर भी गहरे सवाल खड़े हुए हैं। हाल ही में हुए प्री-मानसून सर्वे में एमसीडी ने करीब 28 लाख इमारतों की जांच में केवल 19 इमारतों को ही खतरनाक पाया था, जो अब नागरिक निगरानी की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन चुका है।
सरकार के नए आदेशों के बाद एमसीडी के सभी 12 जोनों के कार्यकारी अभियंताओं (Executive Engineers) को मैदान में उतारा गया है। अधिकारियों को साफ हिदायत दी गई है कि वे अपने-अपने इलाकों में ऊंची इमारतों का औचक निरीक्षण करें। यदि किसी इलाके में अवैध रूप से पांचवीं मंजिल या अतिरिक्त अवैध फ्लोर का निर्माण पाया जाता है, तो न केवल उस संपत्ति को सील किया जाएगा, बल्कि संबंधित क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर और सहायक इंजीनियर के खिलाफ विभागीय व आपराधिक जांच भी शुरू की जाएगी।

छात्र बहुल इलाकों और पीजी हब्स में होगा सघन स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट

दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ और नॉर्थ कैंपस, मुखर्जी नगर, करोल बाग, कालू सराय और कटवारिया सराय जैसे इलाकों में देश के विभिन्न राज्यों से लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं और कॉलेज की पढ़ाई के लिए आते हैं। इन इलाकों में पीजी और हॉस्टल चलाने वाले संचालकों ने छोटे-छोटे कमरों में छात्रों को ठूंस रखा है, जहां न तो वेंटिलेशन का ध्यान रखा जाता है और न ही आपातकालीन निकास द्वारों का।
सत्य निकेतन हादसे के मद्देनजर सरकार अब छात्र आवासों के लिए एक व्यापक विनियामक नीति (Regulatory Policy) तैयार करने पर काम कर रही है। इसके अंतर्गत सभी निजी पीजी और छात्रावासों के लिए अधिकृत स्ट्रक्चरल इंजीनियर से ‘स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट’ और दमकल विभाग से अग्नि सुरक्षा एनओसी लेना अनिवार्य बनाया जाएगा। जिन परिसरों में मानकों की अनदेखी पाई जाएगी, उन्हें तत्काल प्रभाव से खाली कराने की कार्रवाई की जाएगी।

बेसमेंट खुदाई और अनधिकृत मरम्मत पर लगा पूर्ण प्रतिबंध

सत्य निकेतन हादसे की प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई थी कि पांच दशक पुरानी इस कमजोर इमारत के बेसमेंट में अवैध रूप से पिलर की खुदाई और मरम्मत का काम कराया जा रहा था। पानी के रिसाव और कमजोर पिलर के खिसकते ही पूरी इमारत एक झटके में सड़क पर आ गिरी।
इस तकनीकी चूक से सबक लेते हुए नगर निगम और दिल्ली सरकार ने घनी आबादी वाली कॉलोनियों में बिना पूर्व भू-तकनीकी जांच और नगर निगम की लिखित मंजूरी के बेसमेंट में किसी भी प्रकार की खुदाई, मरम्मत या दीवारें तोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसा करने वाले ठेकेदारों और मकान मालिकों के खिलाफ सीधी एफआईआर दर्ज कर संपत्ति को जब्त करने की चेतावनी दी गई है।

भवन मालिकों और पीजी संचालकों में हड़कंप: कड़े नियमों का करना होगा पालन

सरकार के इस आक्रामक रुख से दिल्ली भर के उन संपत्ति मालिकों में हड़कंप मच गया है जिन्होंने बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करके अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया है। कई इलाकों में स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWAs) ने भी अवैध निर्माणों की सूची तैयार कर नागरिक प्रशासन को सौंपना शुरू कर दिया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सीलिंग अभियान के दौरान किसी भी प्रकार का राजनीतिक या सामाजिक दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। केवल वे ही इमारतें सुरक्षित मानी जाएंगी जिनके पास अधिकृत लेआउट प्लान, स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट और निर्धारित मंजिलों की विधिक अनुमति होगी। अवैध निर्माण को ढहाने या सील करने का खर्च भी संबंधित संपत्ति मालिक से ही वसूला जाएगा।

CM Rekha Gupta: राजधानी के रिहायशी परिदृश्य में सुधार की अनिवार्य पहल

सत्य निकेतन की दुर्घटना केवल एक इमारत का गिरना नहीं, बल्कि दिल्ली के बेतरतीब और अवैध शहरीकरण के खिलाफ एक गंभीर चेतावनी है। सात परिवारों द्वारा झेले गए असहनीय दर्द ने व्यवस्था को नींद से जगाने का काम किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा अवैध पांचवीं मंजिलों को सील करने का निर्देश इस दिशा में एक निर्णायक और आवश्यक कदम है।
हालांकि, इस नीति की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह अभियान केवल कुछ हफ्तों के दिखावे तक सीमित न रहकर सालभर एक स्थायी और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था के रूप में लागू रहे। जब तक अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाले तंत्र की जवाबदेही तय नहीं होगी और छात्रों के लिए सुरक्षित रिहायशी विकल्प तैयार नहीं होंगे, तब तक दिल्ली के नागरिक अपने ही घरों में पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर सकेंगे।

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