Chemist Strike India: ऑनलाइन फार्मेसी और कॉर्पोरेट चेन के खिलाफ हड़ताल, दिल्ली-लखनऊ-चंडीगढ़ में मेडिकल स्टोर बंद
ऑनलाइन फार्मेसी और कॉर्पोरेट चेन द्वारा दी जा रही भारी छूट के विरोध में AIOCD का देशव्यापी बंद, कई शहरों में मेडिकल स्टोर बंद
Chemist Strike India: देशभर में दवाओं की उपलब्धता पर आज बड़ा असर दिख रहा है। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने ऑनलाइन फार्मेसी, कॉर्पोरेट चेन स्टोर्स द्वारा दी जा रही भारी छूट और नशा युक्त दवाओं के दुरुपयोग के विरोध में देशव्यापी बंद का आयोजन किया है। बुधवार को कई राज्यों में मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे आम मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ा। हालांकि अस्पतालों के आसपास कुछ दुकानें जरूरी दवाओं के लिए खुली रखी गईं।
केमिस्टों का यह आंदोलन दवा व्यवस्था के भविष्य को लेकर गहरी चिंता को दर्शाता है। छोटे-मध्यम दुकानदार महसूस कर रहे हैं कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और बड़े कॉर्पोरेट चेन उनकी आजीविका छीन रहे हैं। सरकार से GSR 817 अधिसूचना रद्द करने, कोरोना काल के नियमों को खत्म करने और डीप डिस्काउंटिंग पर रोक लगाने की मांग की जा रही है।
बंद का असर: लखनऊ और गुजरात में व्यापक बंदी
लखनऊ में केमिस्टों की हड़ताल का व्यापक असर दिखा। ज्यादातर मेडिकल स्टोर बंद रहे और मरीजों को दवा खरीदने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। कुछ इलाकों में इमरजेंसी दवाएं उपलब्ध कराने के लिए सीमित दुकानें खुली रहीं, लेकिन सामान्य दवाओं की कमी साफ नजर आई।
गुजरात के अहमदाबाद और राजकोट में भी स्थिति लगभग समान रही। बड़े बाजारों में ज्यादातर दुकानें बंद थीं। स्थानीय केमिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि छोटे व्यापारियों का अस्तित्व खतरे में है। वे कहते हैं कि बड़े कॉर्पोरेट चेन 20-30 प्रतिशत तक डिस्काउंट दे रहे हैं, जिससे पारंपरिक दुकानदार टिक नहीं पा रहे।
Chemist Strike India: दिल्ली में मिश्रित प्रभाव, अस्पतालों के पास दुकानें खुली
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बंद का असर आंशिक दिखा। आरएमएल अस्पताल और अन्य बड़े अस्पतालों के आसपास कई दुकानें खुली रहीं ताकि मरीजों और उनके परिजनों को दवा न मिलने की समस्या न हो। हालांकि अन्य बाजारों जैसे करोल बाग, लाजपत नगर और रोहिणी में ज्यादातर मेडिकल स्टोर बंद रहे।
दिल्ली केमिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना प्रिसक्रिप्शन के दवाएं बेच रहे हैं, जो खतरनाक है। खासकर नशे की दवाओं के दुरुपयोग की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने सरकार से सख्ती बरतने की अपील की है।
Chemist Strike India: चंडीगढ़ और अन्य शहरों में बंद की तस्वीर
चंडीगढ़ में भी केमिस्ट दुकानें बंद रहीं। शहर के प्रमुख बाजारों में ताले लटके दिखे। स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह से ही दवा खरीदने पहुंचे मरीज निराश लौटे। ट्राइसिटी क्षेत्र में भी हड़ताल का अच्छा खासा असर रहा।
देश के अन्य हिस्सों में पटना, भोपाल, जयपुर और हैदराबाद जैसे शहरों से भी बंद की खबरें आई हैं। AIOCD का दावा है कि इस बंद में 8 लाख से ज्यादा केमिस्ट शामिल हुए हैं, जो दवा वितरण व्यवस्था की रीढ़ हैं।
Chemist Strike India: केमिस्टों की मांगें और विरोध का कारण
AIOCD ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि GSR 817 अधिसूचना को तुरंत रद्द किया जाए। दूसरी मांग के तहत कोरोना काल में लाए गए उन नियमों को खत्म करने पर जोर दिया गया है जो अब ऑनलाइन फार्मेसी को अनइन्ट्रेस्टेड या अनियंत्रित तरीके से काम करने का मौका दे रहे हैं। तीसरी मुख्य मांग यह है कि कॉर्पोरेट चेन द्वारा दी जा रही डीप डिस्काउंटिंग पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
केमिस्टों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर निवेश के साथ बाजार पर कब्जा कर रहे हैं। वे दवाओं पर 30-40 प्रतिशत तक छूट दे रहे हैं, जो छोटे दुकानदारों के लिए घातक है। साथ ही प्रिसक्रिप्शन के बिना दवाएं बेचने से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहा है।
Chemist Strike India: मरीजों पर पड़ा असर और स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती
हड़ताल के कारण कई मरीजों को परेशानी हुई। खासकर पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोग और बुजुर्ग इस बंद से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। हालांकि केमिस्ट एसोसिएशन ने अस्पतालों के आसपास इमरजेंसी सेवाएं जारी रखने का फैसला किया था, जिससे कुछ हद तक राहत मिली।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि दवा की निरंतर उपलब्धता बेहद जरूरी है। अगर बंद लंबा खिंचा तो क्रॉनिक बीमारियों वाले मरीजों की स्थिति बिगड़ सकती है। सरकार को दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाते हुए जल्द समाधान निकालना चाहिए।
Chemist Strike India: ऑनलाइन फार्मेसी का बढ़ता दबदबा
पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन दवा विक्रेता तेजी से बढ़े हैं। सुविधा और छूट के कारण लोग इन प्लेटफॉर्म्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं। लेकिन पारंपरिक केमिस्टों का आरोप है कि ये कंपनियां बड़े पैमाने पर छूट देकर बाजार बिगाड़ रही हैं और नियमों की अनदेखी कर रही हैं।
सरकार ने पहले कुछ नियम बनाए थे, लेकिन केमिस्टों का कहना है कि इनका सख्ती से पालन नहीं हो रहा। अगर स्थिति नहीं सुधरी तो छोटे व्यापारियों का पूरा नेटवर्क खत्म हो सकता है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में दवा पहुंचाने का मुख्य साधन है।
Chemist Strike India: सरकार की भूमिका और आगे की संभावनाएं
केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की जा रही है कि वे केमिस्टों की मांगों पर गंभीरता से विचार करें। स्वास्थ्य मंत्रालय पहले ही इस मुद्दे पर चर्चा कर चुका है, लेकिन ठोस फैसला अभी तक नहीं आया है।
केमिस्ट संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आगे और सख्त आंदोलन किया जाएगा। दूसरी तरफ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का कहना है कि वे नियमों का पालन कर रहे हैं और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा दे रहे हैं।
Chemist Strike India: व्यापक प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां
यह हड़ताल सिर्फ केमिस्टों और ऑनलाइन कंपनियों के बीच टकराव नहीं है, बल्कि पूरे फार्मेसी इकोसिस्टम की दिशा तय करने वाला मुद्दा है। अगर छोटे केमिस्ट बंद होते गए तो ग्रामीण और छोटे शहरों में दवा पहुंच प्रभावित होगी।
दूसरी ओर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने डिलीवरी और सुविधा के मामले में क्रांति लाई है। जरूरत इस बात की है कि दोनों को साथ लेकर एक संतुलित नीति बनाई जाए, जिसमें न तो छोटे व्यापारी मारे जाएं और न ही उपभोक्ताओं को महंगाई या असुविधा झेलनी पड़े।
निष्कर्ष: संवाद से निकले समाधान
केमिस्टों का देशव्यापी बंद स्वास्थ्य क्षेत्र के एक बड़े मुद्दे को उजागर करता है। सरकार, केमिस्ट संगठन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को बैठकर रास्ता निकालना चाहिए ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो और दवा व्यवस्था मजबूत बने।
आम नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि दोनों पक्ष संवाद के जरिए जल्द समझौता कर लेंगे। स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होनी चाहिए। इस बंद ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दवा क्षेत्र में संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।
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