Indian Railways: भारतीय रेलवे चलाएगा 68 समर स्पेशल ट्रेनें, गर्मी की छुट्टियों में कन्फर्म टिकट और भीड़ से मिलेगी राहत

यूपी, बिहार और बंगाल के यात्रियों को गर्मियों में मिलेगी कन्फर्म सीट राहत

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Indian Railways: ग्रीष्मकालीन अवकाश प्रबंधन और विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर से उत्तर प्रदेश, बिहार व पश्चिम बंगाल की ओर यात्रा करने वाले करोड़ों रेल यात्रियों के लिए एक अत्यंत सुखद व बड़ी राहत की खबर लेकर आया है। उत्तर भारत में इस समय भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप का प्रकोप अपने चरम पर है, जिसके साथ ही स्कूलों व कॉलेजों में गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं। इस पीक सीजन के दौरान दिल्ली से पूर्वी राज्यों की ओर जाने वाली नियमित ट्रेनों में सीटों की भयंकर मारामारी और लंबी वेटिंग लिस्ट के कारण आम यात्रियों को होने वाली भारी परेशानी को देखते हुए भारतीय रेलवे ने एक बहुत बड़ा और कूटनीतिक प्रशासनिक फैसला लिया है। रेल मंत्रालय ने दिल्ली के विभिन्न प्रमुख स्टेशनों से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के महत्वपूर्ण गंतव्यों के लिए कुल 68 समर स्पेशल ट्रेनें (Summer Special Trains) चलाने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।

यह ऐतिहासिक कदम उन लाखों प्रवासियों, नौकरीपेशा श्रमिकों, छात्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए साक्षात एक बड़ा वरदान साबित होने जा रहा है, जो हर साल मई और जून के महीनों में कन्फर्म रेल टिकट न मिल पाने के कारण दलालों के चक्रव्यूह या स्टेशनों पर भारी भीड़ का सामना करने को पूरी तरह मजबूर रहते थे। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक शेड्यूल के अनुसार, ये सभी विशेष ट्रेनें मई 2026 के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर पूरे जून महीने तक नियमित अंतरालों पर अपनी मुकम्मल ट्रिप्स पूरी करेंगी। इस व्यापक रेलवे प्लानिंग के कारण न केवल दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-पटना मुख्य रेल रूट की सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों पर यात्रियों का अतिरिक्त प्रशासनिक दबाव कड़ाई से कम होगा, बल्कि आम जनता को बेहद सुगमता के साथ कन्फर्म सीटें प्राप्त हो सकेंगी, जो रेल यात्री सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में सरकार का एक बहुत बड़ा और सराहनीय मील का पत्थर साबित हो रहा है।

गर्मी की छुट्टियों में उमड़ने वाली भारी भीड़ और भारतीय रेलवे का अभेद्य इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट

यदि हम देश की राजधानी दिल्ली से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की ओर जाने वाले प्रमुख रेल गलियारों का सूक्ष्म विश्लेषण करें, तो यह कड़वा सच सामने आता है कि ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान इस रूट पर यात्रियों का घनत्व समूचे भारतीय रेल नेटवर्क में सबसे अधिक दर्ज किया जाता है। दिल्ली और उसके आस-पास के औद्योगिक क्लस्टरों में रहकर आजीविका कमाने वाले लाखों लोग इस विशिष्ट मौसम में अपने पैतृक गांवों और शहरों की ओर रुख करते हैं, जिसके चलते नियमित ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट का ग्राफ ४०० के पार चला जाता है। इसी भयंकर भीड़ को पूरी कड़ाई और सुरक्षित तरीके से प्रबंधित करने के उद्देश्य से, रेलवे बोर्ड ने दिल्ली के चार सबसे बड़े और मुख्य टर्मिनलों—नई दिल्ली (NDLS), पुरानी दिल्ली (DLI), आनंद विहार टर्मिनल (ANVT) और हजरत निजामुद्दीन (NZM)—को इस विशेष समर मिशन के तहत आपस में कूटनीतिक रूप से जोड़ दिया है।

इन स्टेशनों से शुरू होने वाली यह 68 विशेष समर स्पेशल ट्रेनें उत्तर प्रदेश के वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, अयोध्या, लखीसराय; बिहार के पटना, दानापुर, गया, बरौनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, शेखपुरा, सहरसा, जोगबनी, पूर्णिया; और पश्चिम बंगाल के हावड़ा व न्यू जलपाईगुड़ी जैसे अत्यधिक व्यस्त और महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों तक निर्बाध रूप से संचालित की जाएंगी। उत्तर रेलवे के वरिष्ठ परिचालन प्रबंधकों के अनुसार, यात्रियों की भारी मांग को ध्यान में रखते हुए इन सभी 68 विशेष ट्रेनों के भीतर जनरल अनरिजर्व्ड (General), स्लीपर क्लास (Sleeper) और थर्ड एसी व सेकंड एसी (AC Coaches) की पर्याप्त और मजबूत बोगियों का एक बहुत ही संतुलित कॉम्बिनेशन तैयार किया गया है। यह ढांचागत व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि समाज के सबसे गरीब दिहाड़ी मजदूर से लेकर उच्च मध्यम वर्ग का कोई भी कामकाजी परिवार अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार पूरी गरिमा, सुरक्षा और राजशाही आराम के साथ अपनी इस ग्रीष्मकालीन यात्रा का पूरा लुत्फ उठा सके।

प्रमुख रूटों का मुकम्मल ब्यौरा: आनंद विहार से शेखपुरा और नई दिल्ली से पटना-वाराणसी की कड़क कनेक्टिविटी

बीसीसीआई की नीतियों और रेल मंत्रालय के साझा दिशानिर्देशों के तहत तैयार की गई इन समर स्पेशल ट्रेनों की रूट डायरेक्टरी (Route Directory) का यदि हम गहराई से अवलोकन करें, तो यह साफ हो जाता है कि चयनकर्ताओं ने प्रवासियों की भीड़ के एक-एक हॉटस्पॉट को पूरी सटीकता के साथ अपनी कूटनीतिक योजना में शामिल किया है। इसके तहत आनंद विहार टर्मिनल से विशेष रूप से बिहार के शेखपुरा, बरौनी और मुजफ्फरपुर के लिए हाई-स्पीड स्पेशल गाड़ियां चलाई जा रही हैं, जो सीधे तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख स्टेशनों पर भी अपना ठहराव लेंगी। इसके समानांतर, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से दानापुर और पटना जंक्शन के लिए सुपरफास्ट समर स्पेशल ट्रेनों की एक बहुत बड़ी फौज़ मैदान में उतारी गई है, जो गया और दरभंगा के सुदूर ग्रामीण अंचलों तक अपनी मुकम्मल ट्रिप्स पूरी करेंगी।

पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी और झारखंड के औद्योगिक केंद्र धनबाद के लिए विशेष गाड़ियों का संचालन तय किया गया है, जबकि हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से प्रयागराज और अयोध्या धाम की पावन नगरी के लिए कड़क फ्रीक्वेंसी वाली विशेष ट्रेनें पटरी पर दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी हैं। इन ट्रेनों का पूरा टाइम-टेबल इस प्रकार सेट किया गया है कि कुछ गाड़ियां सप्ताह के उन विशिष्ट दिनों पर (जैसे शुक्रवार और शनिवार की रात) दिल्ली से प्रस्थान करेंगी जब कामकाजी प्रवासियों की भीड़ अपने दफ्तरों से सीधे स्टेशन पहुंचती है। यात्रियों की सुविधा के लिए आईआरसीटीसी (IRCTC) के मुख्य सर्वर पर इन सभी ट्रेनों के नंबर और उनकी उपलब्धता को पूरी तरह लाइव कर दिया गया है; हालांकि रेल अधिकारियों ने यह कड़ा निर्देश भी जारी किया है कि तकनीकी कारणों से किसी भी ट्रेन की तारीखों या मध्यवर्ती स्टॉपेज में होने वाले किसी भी रीयल-टाइम बदलाव की सटीक पुष्टि के लिए यात्री बुकिंग करने से पहले नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम (NTES) के मोबाइल ऐप पर जाकर शेड्यूल की मुकम्मल जांच अनिवार्य रूप से अवश्य कर लें।

टिकट बुकिंग की पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया, तत्काल कोटा और ट्रेनों के भीतर मिलने वाली आधुनिक सुविधाएं

इन 68 समर स्पेशल ट्रेनों की सबसे बड़ी और बेमिसाल व्यावहारिक खूबी यह है कि इनके संचालन की घोषणा समय रहते पहले ही कर दी गई है, जिसके चलते इनके कोचों के भीतर हजारों की संख्या में ‘अतिरिक्त बर्थ’ (Extra Berths) नए कोटे के तहत बुकिंग के लिए स्वतः ही उपलब्ध हो चुकी हैं। इस पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था के कारण अब आम यात्रियों को जनरल वेटिंग लिस्ट की अनिश्चितताओं या आरएसी (RAC) के आधे बर्थ पर बैठकर रात काटने की भयंकर शारीरिक प्रताड़ना से पूरी तरह सुरक्षा मिल जाएगी। रेलवे बोर्ड ने इन ट्रेनों के टिकटों की बुकिंग को पूरी तरह से लोकतांत्रिक और बिचौलियों से मुक्त बनाने के लिए इन्हें सामान्य ऑनलाइन रिज़र्वेशन के साथ-साथ तत्काल (Tatkal) और प्रीमियम तत्काल (Premium Tatkal) कोटे के तहत भी रीयल-टाइम अपडेट कर दिया है, जिससे अचानक यात्रा प्लान करने वाले लोगों को भी कन्फर्म सीट मिलने की संभावना काफी मजबूत हो गई है।

डिजिटल माध्यमों के अतिरिक्त, जो ग्रामीण या कम पढ़े-लिखे यात्री ऑनलाइन ऐप्स का इस्तेमाल करने में खुद को सहज महसूस नहीं करते, वे सीधे रेलवे स्टेशनों पर स्थित मुख्य आरक्षण काउंटरों (PRS Counters) पर जाकर भौतिक रूप से अपना फॉर्म भरकर इन ट्रेनों के कन्फर्म टिकट पूरी सुगमता के साथ आहरित कर सकते हैं। भीषण गर्मी और तपती दोपहर के इस कष्टकारी मौसम को ध्यान में रखते हुए, भारतीय रेलवे ने इन सभी विशेष ट्रेनों के भीतर यात्री सुरक्षा और स्वच्छता के कड़े मानकों को बनाए रखने का एक बहुत ही अभेद्य ब्लूप्रिंट तैयार किया है; जिसके तहत प्रत्येक स्टेशन पर ट्रेनों के भीतर शुद्ध ठंडे पीने के पानी की निर्बाध उपलब्धता, कोचों के भीतर हाई-स्पीड पंखों व वातानुकूलित प्लांटों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, और आईआरसीटीसी के कैटरिंग विंग के माध्यम से पौष्टिक व स्वच्छ खान-पान की कड़क सप्लाई को चौबीसों घंटे पूरी मुस्तैदी के साथ सक्रिय रखा जाएगा।

पूरे देश के भीतर 18,000 से अधिक स्पेशल ट्रिप्स का महा-लक्ष्य और आंचलिक अर्थव्यवस्था पर इसका मारक प्रभाव

यद्यपि दिल्ली से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाला यह ६८ ट्रेनों का कॉरिडोर इस ग्रीष्मकालीन अभियान का सबसे मुख्य और संवेदनशील हिस्सा है, परंतु यदि हम भारतीय रेलवे के व्यापक राष्ट्रीय विज़न (National Vision) का सूक्ष्म आर्थिक विश्लेषण करें, तो यह साफ हो जाता है कि समूचे रेल नेटवर्क पर अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच साक्षात 18,000 से भी अधिक स्पेशल ट्रिप्स (Special Trips) को पटरी पर उतारने का एक बहुत ही विशाल और गगनचुंबी लक्ष्य पूरी कड़ाई के साथ निर्धारित किया गया है। रेल मंत्रालय का यह मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर पुश न केवल पीक सीजन के भीतर आम नागरिकों की यात्राओं को अत्यधिक आरामदायक और सुरक्षित बनाता है, बल्कि यह देश की आंचलिक और ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) को भी भीतर से एक बहुत ही फौलादी और मजबूत वित्तीय सहारा प्रदान करता है।

जब दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े महानगरों में रहने वाले लाखों प्रवासी मजदूर, छोटे व्यापारी, और छात्र इन स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से कन्फर्म टिकट पाकर सुरक्षित तरीके से अपने गांवों और कस्बों की ओर लौटते हैं, तो वे अपनी गाढ़ी कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा स्थानीय बाजारों, खुदरा व्यापार, त्योहारों की तैयारियों और छोटे कुटीर उद्योगों के भीतर रीयल-टाइम में खर्च करते हैं; जिससे मंदी की मार झेल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था के भीतर नकदी का प्रवाह बहुत तेजी से ऊपर की ओर छलांग लगाता है। इसके समानांतर, स्पेशल ट्रेनों के इस बंपर संचालन से भारतीय रेलवे के राजकोषीय खजाने के भीतर भी अतिरिक्त यात्री राजस्व (Additional Revenue) के रूप में करोड़ों रुपये की भारी-भरकम संचित पूंजी जमा होती है; जिसका सीधा और कड़ा फायदा भविष्य के रेल रिफॉर्म्स, वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों के कोचों के विनिर्माण, और देश के कोने-कोने में स्थित पुराने रेलवे स्टेशनों के कायाकल्प व अमृत भारत स्टेशन योजना के सुदृढ़ आधुनिकीकरण पर पूरी कड़ाई के साथ खर्च किया जाता है।

ग्रीष्मकालीन रेल यात्रा पर निकलने वाले प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक के लिए आईआरसीटीसी (IRCTC) की कड़क सावधानियां

यदि आप भी आने वाले दिनों में अपने पूरे परिवार, छोटे बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता के साथ दिल्ली के इन स्टेशनों से यूपी, बिहार या बंगाल की ओर जाने वाली इन समर स्पेशल ट्रेनों के भीतर अपने सफर का मुकम्मल आनंद पूरी तरह से निरोगी और सुरक्षित होकर उठाना चाहते हैं, तो हमारे सुरक्षा और रेल विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई इन पांच कड़े और अनिवार्य नियमों का पालन अपने आचरण में पूरी निष्ठा के साथ अवश्य करें:

  • टिकट बुकिंग में दलालों से कड़ा और वैधानिक परहेज: अपनी यात्रा की तारीख से काफी पहले ही आईआरसीटीसी के आधिकारिक पोर्टल या स्वयं स्टेशन काउंटर पर जाकर अपना टिकट वैध पहचान पत्र के साथ बुक करा लें; और भूलकर भी कभी स्टेशनों के आस-पास सक्रिय रहने वाले शातिर टिकट दलालों या नकली ट्रैवल एजेंटों को अपनी गाढ़ी कमाई का एक्स्ट्रा कमीशन देने की खर्चीली व गैर-कानूनी भूल कतई न करें।

  • अपने डिजिटल UAN/IRCTC प्रोफाइल और लाइव स्टेटस की रीयल-टाइम ट्रैकिंग: ट्रेन में बैठने से ठीक ६ घंटे पहले अपने मोबाइल पर आईआरसीटीसी ऐप के जरिए अपनी बर्थ और कोच की स्थिति (Coach Position) का रीयल-टाइम मिलान कड़ाई से कर लें, और साथ ही रेलवे के नेशनल हेल्पलाइन नंबर 139 पर कॉल करके अपनी ट्रेन के लाइव रनिंग स्टेटस को लगातार ट्रैक करते रहें ताकि स्टेशन पर अनावश्यक रूप से घंटों इंतजार करने की शारीरिक थकान से पूरी तरह बचा जा सके।

  • भीषण लू और डिहाइड्रेशन से बचने के कड़े स्वास्थ्य सुरक्षात्मक उपाय: इस ४५ डिग्री की तपती धूप और उमस भरे सफर के दौरान अपने शरीर को पूरी तरह से हाइड्रेटेड और निरोगी रखने के लिए अपने साथ घर के बने शुद्ध पानी की पर्याप्त बोतलें, नींबू पानी या ओआरएस (ORS) का घोल अनिवार्य रूप से साथ रखें; और यात्रा के दौरान स्टेशनों पर मिलने वाले खुले, अत्यधिक तेल-मसाले वाले और बासी गरिष्ठ भोजन को खाने की गंदी आदत से पूरी तरह दूर रहें।

  • अपने कीमती सामान, सामानों के लॉक और बच्चों की चौबीसों घंटे पैनी निगरानी: समर स्पेशल ट्रेनों के भीतर यात्रियों की भारी भीड़ होने के कारण अपने सूटकेस और बैग्स को हमेशा अपनी सीट के नीचे लोहे की चेन और कड़े ताले के साथ लॉक करके रखें; और भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म्स व टॉयलेट वेंट्स के पास जाते समय अपने छोटे मासूम बच्चों की उंगली को हमेशा पूरी ताकत से थामकर रखें ताकि कोई अप्रिय मानवीय चूक कतई न हो सके।

  • रेलवे स्वच्छता नियमों और नागरिक अनुशासन का शत-प्रतिशत अनुपालन: ट्रेन के सफर के दौरान चाय-कॉफी के खाली कप, प्लास्टिक के रैपर्स या फालतू के कागजों को बोगी की फर्श या खिड़की के बाहर फेंककर देश की छवि धूमिल करने की बदतमीजी कतई न करें; हमेशा कचरे को केवल कोच के कोने में लगे कूड़ेदानों के भीतर ही डालें और किसी भी आकस्मिक सुरक्षा संकट के समय रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों की प्रशासनिक सलाह का कड़ाई से पालन करें।

भारतीय रेलवे का भावी रोडमैप: तकनीक, कवच सुरक्षा प्रणाली और उपयोगकर्ता-अनुकूल सेवाओं का वैश्विक विस्तार

भारतीय रेलवे का यह जो समर स्पेशल ट्रेनों को पूरी भव्यता के साथ पटरी पर उतारने का वर्तमान सांगठनिक पुरुषार्थ है, वह साक्षात इस बात का चमकता हुआ प्रमाण है कि हमारा राष्ट्रीय रेल तंत्र अब पुरानी घिसी-पिटी रूढ़ियों को हमेशा के लिए मरुभूमि में दफन करके, पूरी तरह से आधुनिक, हाई-टेक और शत-प्रतिशत ‘उपयोगकर्ता-अनुकूल’ (User-centric Era) वैश्विक ऊर्जा के नए युग के भीतर पूरी कड़ाई के साथ अपने कदम बढ़ा चुका है। आने वाले समय में ई-कैटरिंग (E-Catering) के जरिए सीधे आपकी सीट पर मनपसंद भोजन की ऑनलाइन डिलीवरी, ट्रेनों के भीतर अत्याधुनिक ‘कवच’ (KAVACH) एंटी-कोलिजन सुरक्षा प्रणालियों का युद्ध स्तर पर होने वाला विस्तार, और पूरी तरह से पेपरलेस डिजिटल टिकटिंग के कड़े रिफॉर्म्स आम नागरिकों के सफर को हवाई यात्रा से भी कहीं अधिक आरामदायक, सुलभ और सुरक्षित बनाने की दिशा में रात-दिन काम कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का यह साफ और कड़ा मत है कि समर स्पेशल ट्रेनों जैसी दूरगामी प्रशासनिक पहलें न केवल पीक सीजन के भीतर देश के करोड़ों प्रवासी कामगारों के व्यक्तिगत व पारिवारिक जीवन में असीम खुशियों और मानसिक शांति का संचार करती हैं, बल्कि यह देश के भीतर एक बहुत ही पारदर्शी, भ्रष्टाचार-मुक्त और पूर्णतः सुरक्षित सामाजिक और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर की बुनियाद को भी फौलादी मजबूती प्रदान करती हैं।

निष्कर्ष: इतिहास, आधुनिक तकनीक और कड़े नागरिक अनुशासन के बल पर सुखद ग्रीष्मकालीन सफर का स्वर्णिम शंखनाद

निष्कर्षतः, भारतीय रेलवे द्वारा दिल्ली के विभिन्न टर्मिनलों से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के महत्वपूर्ण गंतव्यों के लिए शुरू की जा रही यह 68 समर स्पेशल ट्रेनों की सौगात निश्चित रूप से देश के परिवहन इतिहास, सांगठनिक पुनरुद्धार और हमारे राष्ट्रीय रेल प्रबंधन के विज़न की एक अत्यंत विहंगम, उत्कृष्ट और अटूट संप्रभु मिसाल है। यह क्रांतिकारी निर्णय साफ तौर पर यह प्रदर्शित करता है कि सरकार की प्रशासनिक नीतियां यदि पूरी राजनीतिक इच्छाशक्ति, आधुनिक एआई तकनीक और अपने देश के आम नागरिकों व गरीब प्रवासियों के प्रति गहरी संवेदनशीलता के साथ धरातल पर काम करें, तो वे पीक सीजन की सबसे बड़ी और भयंकर भीड़ की ढांचागत चुनौतियों को भी पल भर में एक अत्यंत सुखद, आरामदायक और पारदर्शी यात्रा अनुभव के भीतर तब्दील करने का साक्षात चमत्कार पूरी सुगमता के साथ कर सकती हैं।

देश के उन सभी करोड़ों कर्मठ कामगारों, छात्रों और गृहस्वामियों को जो इस चिलचिलाती धूप के मौसम में अपने पैतृक गांवों की ओर लौटने का पूरा मन बना चुके हैं, हमारी यही कड़क रणनीतिक और व्यावहारिक सलाह होगी कि वे अब टिकट न मिलने की चिंताओं को अपने अंतःकरण से पूरी तरह निकाल फेंकें; और आज ही सोमवार के इस पावन व मंगलमयी दिन पर अपने स्मार्टफोन को उठाकर सीधे आईआरसीटीसी के आधिकारिक वेब पोर्टल पर जाएं और इन ६८ समर स्पेशल ट्रेनों के भीतर अपनी पसंद की तारीखों पर अपनी कन्फर्म सीटों की बुकिंग पूरी निष्ठा के साथ कड़ाई से सुरक्षित कर लें। यात्रा के दौरान अपने आचरण में पूरी तरह अनुशासित रहें, नागरिक मर्यादाओं और स्वच्छता के कड़े नियमों का शत-प्रतिशत आदर करें, और पूरी सकारात्मक ऊर्जा व दूरदर्शी सोच के साथ इस बदलते हुए आधुनिक भारत की इस गौरवशाली रेल क्रांति का साक्षात हिस्सा बनें; महादेव की असीम अनुकंपा से आपका यह समूचा ग्रीष्मकालीन रेल सफर पूरी तरह से स्वास्थ्यवर्धक, निरापद, असीमित पारिवारिक खुशियों से भरा और अत्यंत मंगलमयी सिद्ध हो।

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