CBSE OSM Glitch पर बड़ा एक्शन: Dharmendra Pradhan ने ली पूरी जिम्मेदारी, IIT विशेषज्ञों की मदद से तकनीकी सुधार की प्रक्रिया तेज

धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों को भरोसा दिलाते हुए तकनीकी जांच के आदेश दिए

0

CBSE OSM Glitch: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रक्रिया में आई तकनीकी गड़बड़ियों ने पूरे देश के छात्रों और उनके अभिभावकों में चिंता पैदा कर दी है। इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को पूर्ण जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी कोई भी शिकायत अनसुनी नहीं रहेगी।

मंत्री ने सीबीएसई मुख्यालय में उच्च अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की और समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की घोषणा की। इस प्रक्रिया में आईआईटी (IIT) कानपुर और आईआईटी (IIT) मद्रास के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है, जो सॉफ्टवेयर और तकनीकी पहलुओं की जांच करेंगे।

OSM प्रक्रिया क्या है और क्यों आई इसमें तकनीकी गड़बड़ी?

ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली सीबीएसई द्वारा इस वर्ष पहली बार बड़े पैमाने पर लागू की गई थी। इसके तहत परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल रूप में मूल्यांकनकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और तेज बनाना था। देशभर से लगभग 17 लाख छात्रों ने इस वर्ष सीबीएसई की 12वीं कक्षा की परीक्षा दी, जिनकी कुल 98 लाख उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन की गईं, जिनमें औसतन 40 पन्ने प्रति कॉपी थे। यानी कुल मिलाकर करीब 40 करोड़ पन्नों का डिजिटल मूल्यांकन किया गया।

इतने बड़े पैमाने पर पहली बार लागू की गई इस प्रणाली में कुछ तकनीकी चुनौतियां सामने आना स्वाभाविक था, लेकिन इन गड़बड़ियों ने छात्रों के पुनर्मूल्यांकन और रिजल्ट संबंधी प्रक्रिया को प्रभावित किया। छात्रों को मुख्य रूप से पुनर्मूल्यांकन के दौरान पोर्टल पर लॉगिन, उत्तर पुस्तिका देखने और भुगतान संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में स्कैन की गई कॉपियां सही से लोड नहीं हो रही थीं या मार्किंग में विसंगतियां दिख रही थीं Lights Max।

शिक्षा मंत्री का स्पष्ट रुख और प्रभावित छात्रों को भरोसा

धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि गड़बड़ियों की जिम्मेदारी वे स्वयं लेते हैं। उन्होंने छात्रों से सीधे संवाद करते हुए आश्वस्त किया कि उनकी हर शिकायत का कूटनीतिक समाधान किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर इस गड़बड़ी में शामिल पाया गया, चाहे वह बोर्ड के अंदर हो या बाहर, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

उन्होंने बैठक के दौरान सीबीएसई अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। भुगतान संबंधी परेशानी को दूर करने के लिए वित्त मंत्रालय की मदद से चार प्रमुख सरकारी बैंकों – स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक – के पेमेंट गेटवे को सीबीएसई पोर्टल से कूटनीतिक रूप से जोड़ दिया गया है।

IIT विशेषज्ञों की भूमिका और सॉफ्टवेयर आधारित तकनीकी समाधान

समस्या के स्थायी समाधान के लिए शिक्षा मंत्रालय ने आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को शामिल किया है। ये विशेषज्ञ सीबीएसई की मौजूदा टीम के साथ मिलकर पूरे सॉफ्टवेयर सिस्टम, सर्वर क्षमता और यूजर इंटरफेस की गहन समीक्षा करेंगे।

विशेषज्ञों का फोकस मुख्य रूप से तीन पहलुओं पर रहेगा – स्कैनिंग क्वालिटी, डेटा सिक्योरिटी और यूजर एक्सपीरियंस। आईआईटी की टीम पहले भी कई सरकारी डिजिटल प्रोजेक्ट्स में सफलतापूर्वक कूटनीतिक योगदान दे चुकी है, इसलिए उम्मीद है कि उनकी सलाह से ओएसएम प्रक्रिया और अधिक मजबूत बनेगी Lights Max Lights Max।

CBSE का आधिकारिक बचाव और वायरल लिंक की सफाई

सीबीएसई ने भी इस संवेदनशील मामले में अपना स्पष्टीकरण जारी किया है। बोर्ड ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यूआरएल (URL) कोई लाइव मूल्यांकन पोर्टल नहीं था, बल्कि केवल टेस्टिंग साइट थी जिसमें सैंपल डेटा था। असली ओएसएम पोर्टल पूरी तरह सुरक्षित है और उसमें कोई सेंध नहीं लगी है।

बोर्ड के अधिकारियों ने जोर दिया कि ओएसएम प्रणाली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत है और कई देशों की परीक्षा बोर्ड इसका सफलतापूर्वक उपयोग कर रही हैं। भारत में पहली बार इतने बड़े स्तर पर लागू होने के कारण ही शुरुआती चुनौतियां आई हैं।

छात्रों पर पड़े व्यावहारिक प्रभाव और मानसिक तनाव का दौर

12वीं कक्षा का रिजल्ट छात्रों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। कई छात्र कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स जैसे जेईई (JEE), नीट (NEET) और विदेशी विश्वविद्यालयों के एडमिशन के लिए सीबीएसई स्कोर पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं। ओएसएम गड़बड़ी के कारण पुनर्मूल्यांकन में देरी और तकनीकी परेशानियां कई छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही हैं।

अभिभावक संगठनों ने भी इस पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने मांग की है कि बोर्ड जल्द से जल्द सभी लंबित शिकायतों का निपटारा करे और जहां गलती पाई जाए, वहां मार्क्स में तुरंत सुधार किया जाए Lights Max।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और केंद्रीय मंत्री का जवाब

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीबीएसई परिणामों में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। इस पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि राहुल गांधी चुनावी हार के कारण निराशा में ऐसे बयान दे रहे हैं। प्रधान ने कहा कि वे पहले राफेल, ईवीएम और डिजिटल इंडिया का भी विरोध कर चुके हैं और ऐसा लगता है कि वे देश की वैज्ञानिक प्रगति के खिलाफ हैं।

हालांकि उन्होंने जोर दिया कि इस समय राजनीतिकरण करने के बजाय छात्रों के हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। चूंकि सरकार ने खुद जिम्मेदारी ली है, इसलिए सभी को कूटनीतिक संयम रखना चाहिए।

OSM प्रणाली के भविष्य और आगामी सुधार की योजना

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ओएसएम जैसी डिजिटल प्रक्रियाएं भविष्य की सही दिशा हैं। ये मानवीय त्रुटियों को कम करती हैं और मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी बनाती हैं। लेकिन पहली बार के अनुभव से सीखते हुए बोर्ड को बैकअप सिस्टम, बेहतर सर्वर क्षमता और यूजर ट्रेनिंग पर ज्यादा ध्यान देना होगा Lights Max Lights Max।

मंत्री ने संकेत दिया है कि अगले वर्ष ओएसएम को और बेहतर बनाने के लिए पहले से पायलट प्रोजेक्ट चलाए जाएंगे ताकि बड़े स्तर पर लागू करने से पहले सभी कमियां दूर हो सकें।

प्रभावित छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सलाह और आगे का रास्ता

सीबीएसई छात्रों को सलाह दे रहा है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित रूप से अपडेट चेक करते रहें। पुनर्मूल्यांकन के लिए सही प्रक्रिया का पालन करें और किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें। शिक्षा मंत्री ने छात्रों से अपील की है कि वे मानसिक तनाव न लें, क्योंकि बोर्ड हर संभव मदद कर रहा है। कई छात्रों ने पहले ही पुनर्मूल्यांकन के बाद अपने मार्क्स में सुधार देखा है, जो सिस्टम के सही दिशा में काम करने का संकेत है।

निष्कर्ष

सीबीएसई ओएसएम विवाद एक चुनौती के रूप में शुरू हुआ, लेकिन शिक्षा मंत्री द्वारा तुरंत जिम्मेदारी लेने और सुधारात्मक कदम उठाने से यह जवाबदेही की मिसाल बन गया है। डिजिटल इंडिया के युग में ऐसी प्रणालियों को अपनाना जरूरी है, लेकिन छात्र हित को सर्वोपरि रखते हुए इन्हें लागू करना और भी महत्वपूर्ण है। सरकार, बोर्ड और तकनीकी विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास से उम्मीद है कि जल्द ही सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा और छात्र अपने भविष्य की राह पर बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सकेंगे।

read more here

Wegovy Side Effects: वजन घटाने की लोकप्रिय दवा से आंखों की रोशनी जाने का खतरा, हालिया स्टडी ने बढ़ाई चिंता

West Bengal News: बंगाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, भंग होंगी सभी स्कूल प्रबंधन कमेटियां, अब ‘एडमिनिस्ट्रेटर’ संभालेंगे सरकारी स्कूलों की कमान

Jharkhand Agriculture Update: झारखंड में कृषि क्रांति, सरकार ने दी 30 नई फसलों को मंजूरी, अब सूखे और मौसम की मार का नहीं होगा असर!

Made in Heaven ने खोली हाई-प्रोफाइल शादियों की चमक के पीछे छिपी सच्चाई: 8.2 IMDb रेटिंग वाली सीरीज ने दहेज, पितृसत्ता और रिश्तों के खोखलेपन पर छेड़ी बड़ी बहस

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.