CEC Gyanesh Kumar के खिलाफ सभी याचिकाएं एक साथ सुनी जाएंगी, 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
CEC Gyanesh Kumar के खिलाफ सभी याचिकाएं एक साथ सुनी जाएंगी, 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर दायर सभी याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट एक साथ सुनवाई करेगा। अदालत ने तय किया है कि इन मामलों को 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया जाएगा। विपक्षी दलों की ओर से लंबे समय से चुनाव आयोग के फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं और कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी जारी हैं। इस पृष्ठभूमि में आगामी सुनवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें आयोग की निर्णय प्रक्रिया और SIR से जुड़े सवालों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है।
CEC Gyanesh Kumar: SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों पर क्या आपत्तियां उठाई गई हैं?
याचिकाओं में मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि कुछ महत्वपूर्ण निर्णय अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद लिए गए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आयोग की आंतरिक प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही और फैसलों की वैधानिकता की जांच होनी चाहिए। उन्होंने इन निर्णयों को असंवैधानिक घोषित करने की भी मांग की है। साथ ही, कथित अनियमितताओं की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT गठित करने की बात भी कुछ याचिकाओं में कही गई है। अदालत अब इन दावों की पड़ताल उपलब्ध दस्तावेजों और पक्षों के तर्कों के आधार पर करेगी।
राहुल गांधी की याचिका में क्या मांगें रखी गई हैं?
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई है। इस याचिका को डायरी नंबर आवंटित हो चुका है। राहुल गांधी की कानूनी टीम ने पहले रजिस्ट्री से समय बढ़ाने की मांग की थी। याचिका में निर्वाचन आयोग में कथित अनियमितताओं और नई दिल्ली में इस मुद्दे पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों को उठाया गया है। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से याचिका दायर करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। अदालत ने अब इसे अन्य याचिकाओं के साथ जोड़कर सुनने का फैसला लिया है, जिससे पूरे मामले पर एक व्यापक नजरिया सामने आ सकता है।
27 अक्टूबर की सुनवाई से पहले क्या उम्मीदें हैं?
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग और केंद्र सरकार अपने पक्ष रखने के लिए तैयार होंगे। अदालत यह देख सकती है कि संबंधित फैसले मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुरूप लिए गए थे या नहीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से SIR प्रक्रिया की वैधता और आंतरिक आपत्तियों को नजरअंदाज करने के आरोपों पर जोर दिया जाएगा। इससे पहले अदालत ने निलंबन की मांग को अंतरिम रूप से खारिज कर दिया था, इसलिए इस बार भी राहत संबंधी मांगों पर तुरंत फैसला होने की संभावना कम मानी जा रही है। कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत पहले रिकॉर्ड मंगाकर स्थिति साफ करने की कोशिश कर सकती है।
विपक्ष के विरोध और इस्तीफे की मांग का क्या असर पड़ सकता है?
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पक्षपात झलक रहा है। ये प्रदर्शन मुख्य रूप से मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कुछ हालिया फैसलों को लेकर हैं। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इन प्रदर्शनों से अलग है, लेकिन राजनीतिक माहौल पर इसका असर पड़ सकता है। अदालत के फैसले से पहले दोनों पक्षों के बयान और दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे। आम नागरिकों के लिए भी यह मुद्दा इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि मतदाता सूची की शुद्धता चुनावों की विश्वसनीयता से जुड़ी होती है।
क्या अदालत SIR प्रक्रिया पर कोई अंतरिम आदेश दे सकती है?
अभी तक अदालत ने SIR प्रक्रिया को रोकने या मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने संबंधी कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। 5 अक्टूबर के आदेश में केवल पक्षों से जवाब मांगे गए थे। 27 अक्टूबर की सुनवाई में याचिकाकर्ता फिर से अंतरिम राहत की मांग कर सकते हैं, लेकिन अदालत आमतौर पर ऐसे मामलों में पूर्ण सुनवाई के बाद ही कोई बड़ा फैसला लेती है। चुनाव आयोग की ओर से यह तर्क दिया जा सकता है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण नियमित और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। अंतिम रूप से क्या होगा, यह अदालत के समक्ष पेश किए गए साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख भारतीय चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता और स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। याचिकाओं में उठाए गए सवालों का जवाब मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल सभी पक्ष 27 अक्टूबर की तारीख पर नजर रखे हुए हैं। अदालत के आदेश से पहले किसी भी तरह की अटकलें लगाना जल्दबाजी होगी, क्योंकि अंतिम फैसला रिकॉर्ड और कानून के आधार पर ही आएगा।
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