Kolkata Municipal Election 2026: भाजपा का ड्रॉप-बॉक्स फॉर्मूला, डॉक्टर-वकील भी लड़ सकेंगे पार्षद
Kolkata Municipal Election 2026: भाजपा का ड्रॉप-बॉक्स फॉर्मूला, डॉक्टर-वकील भी लड़ सकेंगे पार्षद
Kolkata Municipal Election 2026: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा खत्म होते ही कोलकाता और हावड़ा के नगर निगम चुनावों की तैयारियां तेज हो गई हैं। भाजपा ने उम्मीदवार चुनने का तरीका ही बदल दिया है। पार्टी ने ‘ड्रॉप-बॉक्स’ व्यवस्था शुरू कर दी है। इसके जरिए कोई भी इच्छुक व्यक्ति अपना बायोडाटा जमा कर सकता है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने साफ कहा कि अब सिर्फ राजनीति के पुराने चेहरों पर निर्भर नहीं रहना है। डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, पत्रकार और समाजसेवी अगर आगे आएं तो उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। सवाल यह है कि क्या यह तरीका वाकई पारदर्शी साबित होगा या फिर पार्टी के अंदर ही नए दबाव शुरू हो जाएंगे।
Kolkata Municipal Election 2026: ड्रॉप-बॉक्स क्यों और कैसे काम करेगा
सुकांत मजूमदार ने सोमवार से कोलकाता के मुरलीधर सेन लेन स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में ड्रॉप-बॉक्स रखने की घोषणा की। इच्छुक उम्मीदवार कार्यालय खुलने के समय अपना बायोडाटा डाल सकते हैं। पार्टी का कहना है कि सिर्फ चुनाव लड़ने की इच्छा काफी नहीं होगी। जीतने की क्षमता और समाज में किए गए कामों को भी देखा जाएगा।
मजूमदार ने समाज के प्रतिष्ठित और सफल लोगों से अपील की कि वे भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरें। उनका तर्क है कि कोलकाता को ‘नया कोलकाता’ बनाने के लिए ऐसे चेहरों की जरूरत है जिनकी छवि साफ हो और जिन्हें जनता पहले से जानती हो। पार्टी का दावा है कि इससे निगम के कामकाज पर प्रमोटर और डेवलपर राज का असर कम होगा।
नया कोलकाता का मतलब क्या है
सुकांत मजूमदार के मुताबिक, भाजपा के नेतृत्व में आम लोगों के लिए एक अलग कोलकाता बनाने की कोशिश होगी। उन्होंने कहा कि पिछले 49 साल से शहर के लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया। अब जब विकास की राह साफ हो रही है तो निगम को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाना जरूरी है।
देवी पक्ष के दौरान इस पहल को शुरू करने का फैसला भी जानबूझकर लिया गया। मजूमदार ने इसे नए कोलकाता की दिशा में एक अहम कदम बताया। पार्टी चाहती है कि डॉक्टरों, इंजीनियरों, पत्रकारों और वकीलों जैसे पेशेवर लोग आगे आएं। जिनकी पहचान सिर्फ राजनीति से नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के काम से बनी हो।
चयन की प्रक्रिया और पार्टी का दावा
ड्रॉप-बॉक्स में बायोडाटा जमा करने के बाद उम्मीदवारों का आकलन कई आधारों पर होगा। सिर्फ कागजी योग्यता नहीं, बल्कि समाज में उनकी स्वीकार्यता और काम करने का रिकॉर्ड देखा जाएगा। मजूमदार ने कहा कि टिकट उन्हीं को मिलेगा जिनमें जीतने की क्षमता हो और जो जनहित के कामों से पहचाने जाते हों।
यह व्यवस्था इसलिए भी शुरू की गई क्योंकि पार्टी को लगता है कि पुराने तरीके से उम्मीदवार चुनने में कई बार अच्छे लोग पीछे रह जाते हैं। अब सीधे आम लोगों से संपर्क करके उन्हें राजनीति से जोड़ने की कोशिश है। कोलकाता की जनता अगर समर्थन करे तो पार्टी को भरोसा है कि निगम के कामकाज में बड़ा बदलाव आ सकता है।
विपक्षी दलों पर निशाना और 49 साल का आरोप
मजूमदार ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और माकपा दोनों पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि इतने सालों तक विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगा रहा। अब जब बाधाएं हट रही हैं तो निगम को प्रमोटरों के प्रभाव से मुक्त करना जरूरी हो गया है। उन्होंने स्पीड-ब्रेकर का जिक्र करते हुए विपक्ष पर कटाक्ष भी किया।
भाजपा का कहना है कि आम लोगों की भागीदारी से कोलकाता के विकास की नई रूपरेखा तैयार की जाएगी। ड्रॉप-बॉक्स को इसी दिशा में एक पारदर्शी कदम बताया जा रहा है। हालांकि, इस पहल को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। क्या पेशेवर लोग सच में राजनीति में उतरना चाहेंगे या फिर यह सिर्फ एक दिखावा साबित होगा।
Kolkata Municipal Election 2026: आगे क्या हो सकता है
ड्रॉप-बॉक्स व्यवस्था सोमवार से शुरू हो गई है। अब देखना यह होगा कि कितने लोग आगे आते हैं और पार्टी अंत में किन चेहरों को टिकट देती है। कोलकाता के 209 वार्डों में उम्मीदवार चुनना आसान काम नहीं है। अगर इस तरीके से कुछ नए और साफ छवि वाले चेहरे मैदान में आते हैं तो निगम चुनाव का रंग थोड़ा बदल सकता है।
सुकांत मजूमदार ने लोगों से अपील की कि वे इस पहल में शामिल हों और कोलकाता के विकास के लिए साथ दें। पार्टी का भरोसा है कि जनता का समर्थन मिलेगा। फिलहाल ड्रॉप-बॉक्स में कितने बायोडाटा आते हैं और उनका क्या होता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। अब सबकी नजर इस पर है कि पार्टी किस तरह के चेहरों को आगे लाती है।
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