CBSE ने स्कूल काउंसलरों और वेलनेस टीचर्स के लिए शुरू की AI आधारित ऑनलाइन परीक्षा, 10000 काउंसलरों की होगी दक्षता जांच, घर बैठे दे सकेंगे टेस्ट, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम

AI आधारित ऑनलाइन टेस्ट से काउंसलरों की स्किल जांच, 10000 शिक्षक होंगे शामिल

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School counsellors: स्कूल की दीवारों के भीतर पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों का मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है जितना उनका शैक्षणिक प्रदर्शन। इस बात को पहचानते हुए CBSE ने एक ऐसा कदम उठाया है जो भारतीय स्कूल शिक्षा प्रणाली में एक नई और जरूरी बदलाव की शुरुआत करता है। बोर्ड ने स्कूल काउंसलरों और वेलनेस शिक्षकों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI पर आधारित ऑनलाइन मूल्यांकन परीक्षा शुरू की है।

School counsellors: CBSE की यह नई पहल क्या है और इसका उद्देश्य क्या है

CBSE ने अपने क्षमता विकास कार्यक्रम के तहत स्कूल काउंसलरों और वेलनेस शिक्षकों के लिए AI आधारित ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली की शुरुआत की है। इसके जरिए यह जांचा जाएगा कि ये शिक्षक बच्चों की मानसिक और भावनात्मक समस्याओं को किस हद तक समझ सकते हैं और उनसे कितने प्रभावी तरीके से निपट सकते हैं।

इस परीक्षा की एक बड़ी खासियत यह है कि इसे घर बैठे ऑनलाइन दिया जा सकता है। इससे देश के दूरदराज के इलाकों में काम करने वाले काउंसलर भी बिना किसी परेशानी के इसमें भाग ले सकेंगे।

School counsellors: इस परीक्षा में कितने काउंसलर शामिल होंगे और यह कैसे होगी

CBSE की इस पहल के पहले चरण में कुल 10000 स्कूल काउंसलर और वेलनेस शिक्षक शामिल होंगे। इसे अलग-अलग चरणों में आयोजित किया जाएगा ताकि प्रक्रिया सुव्यवस्थित और प्रभावी रहे।

AI आधारित मूल्यांकन में प्रश्नों की प्रकृति परंपरागत परीक्षाओं से अलग होगी। यह प्रणाली काउंसलर की व्यावहारिक समझ, संवाद कौशल और भावनात्मक बुद्धिमत्ता को परखने के लिए डिजाइन की गई है।

School counsellors: CBSE कौन है और इस बोर्ड का शिक्षा में क्या योगदान है

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड भारत का सबसे बड़ा और सबसे प्रतिष्ठित शिक्षा बोर्ड है। देश भर में इससे हजारों सरकारी और निजी स्कूल संबद्ध हैं और लाखों छात्र हर साल इसकी परीक्षाओं में बैठते हैं।

CBSE लगातार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए नई नीतियां और कार्यक्रम लाता रहता है। हाल के वर्षों में बोर्ड ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों में काउंसलिंग व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं।

School counsellors: स्कूलों में काउंसलर की भूमिका क्यों है इतनी जरूरी

आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में स्कूली बच्चों पर शैक्षणिक दबाव, पारिवारिक अपेक्षाएं और सामाजिक तनाव एक साथ पड़ता है। इसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है जिसे नजरअंदाज करना दीर्घकाल में बेहद नुकसानदेह हो सकता है।

मनोवैज्ञानिक और शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी छात्र की भावनात्मक समस्या को समय पर पहचाना और संबोधित किया जाए तो उसके शैक्षणिक प्रदर्शन और व्यक्तित्व विकास दोनों पर सकारात्मक असर पड़ता है। इसीलिए योग्य और प्रशिक्षित काउंसलर की मौजूदगी हर स्कूल में अनिवार्य होनी चाहिए।

School counsellors: AI आधारित परीक्षा परंपरागत मूल्यांकन से कैसे अलग है

पारंपरिक परीक्षाओं में रटने और सैद्धांतिक ज्ञान को अधिक महत्व दिया जाता है। लेकिन AI आधारित मूल्यांकन प्रणाली यह देखती है कि काउंसलर वास्तविक परिस्थितियों में कैसा निर्णय लेता है। इसमें परिदृश्य आधारित प्रश्न होते हैं जो काउंसलर की सोचने और समझने की क्षमता को परखते हैं।

इसके अलावा AI प्रणाली मूल्यांकन को व्यक्तिगत स्तर पर भी अनुकूलित कर सकती है। यानी हर काउंसलर के जवाबों के आधार पर उसकी मजबूतियां और कमजोरियां अलग-अलग चिन्हित की जा सकती हैं जो पारंपरिक परीक्षा में संभव नहीं था।

School counsellors: इस पहल का छात्रों पर क्या असर पड़ेगा

जब काउंसलर बेहतर प्रशिक्षित होंगे और उनकी दक्षता मापी जाएगी तो स्वाभाविक रूप से स्कूलों में बच्चों को मिलने वाली काउंसलिंग सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा। बच्चों की परेशानियों को जल्दी पहचाना जाएगा और समय पर सही मदद मिलेगी।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। जब काउंसलर खुद को अधिक सक्षम महसूस करेंगे तो वे छात्रों के साथ अधिक प्रभावी संवाद स्थापित कर पाएंगे।

School counsellors: यह पहल भारतीय शिक्षा प्रणाली के लिए क्यों है एक बड़ा कदम

भारत में स्कूली छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर पिछले कुछ वर्षों में ध्यान बढ़ा है। परीक्षा के दौरान तनाव, बुलीइंग और सहपाठियों के दबाव से जुड़ी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं।

CBSE की यह पहल इसी दिशा में एक व्यवस्थागत और तकनीकी रूप से उन्नत समाधान लेकर आई है। 10000 काउंसलरों की क्षमता बढ़ाने से देशभर के लाखों छात्रों को बेहतर सहायता मिल सकेगी जो एक बड़ा सामाजिक बदलाव साबित हो सकता है।

निष्कर्ष

CBSE की यह AI आधारित काउंसलर मूल्यांकन पहल भारतीय स्कूल शिक्षा में एक दूरदर्शी और समयोचित कदम है। जब देश के स्कूलों में हजारों प्रशिक्षित और दक्ष काउंसलर होंगे तब लाखों छात्रों को उनकी जरूरत के समय सही मार्गदर्शन मिलेगा।

यह पहल न केवल काउंसलरों की पेशेवर क्षमता को मापने का एक वैज्ञानिक तरीका है बल्कि यह यह भी संदेश देती है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था अब छात्रों के समग्र विकास को उतना ही गंभीरता से ले रही है जितना उनके परीक्षा परिणामों को।

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