BRICS Summit 2026: पुतिन का बड़ा प्रस्ताव, ग्रेन एक्सचेंज और इंश्योरेंस सिस्टम से जुड़ेंगे देश

रूस का प्रस्ताव, साझा अनाज बाजार और री-इंश्योरेंस सिस्टम से BRICS व्यापार को मिलेगी मजबूती

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BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक भू-आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा देने वाला एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संगठन के आर्थिक और व्यापारिक ढांचे को स्वायत्त बनाने के लिए एक साझा ‘ब्रिक्स अनाज एक्सचेंज’ (BRICS Grain Exchange) और स्वतंत्र री-इंश्योरेंस मैकेनिज्म स्थापित करने का औपचारिक प्रस्ताव रखा है। इस ऐतिहासिक पहल का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच कृषि व्यापार को बिचौलियों से मुक्त करना, खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना और पश्चिमी वित्तीय प्रतिबंधों तथा बाहरी आर्थिक दबावों के विरुद्ध एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करना है।

शिखर सम्मेलन के समापन पर जारी आधिकारिक ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ (New Delhi Declaration 2026) में भी सदस्य देशों ने ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज की स्थापना और साझा बीमा क्षमताओं के विस्तार पर अपनी सहमति जताई है। यह कदम वैश्विक कमोडिटी व्यापार में पारंपरिक डॉलर-आधारित व्यवस्था और पश्चिमी वर्चस्व वाली लॉजिस्टिक्स-इंश्योरेंस प्रणाली को एक व्यावहारिक बहुपक्षीय विकल्प प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

BRICS Summit 2026: सीधे उत्पादक और खरीदार को जोड़ने की रूपरेखा

वैश्विक कृषि बाजार में रूस, ब्राजील, भारत और चीन प्रमुख उत्पादक और उपभोक्ता देशों के रूप में जाने जाते हैं। राष्ट्रपति पुतिन द्वारा प्रस्तावित ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा, जहां सदस्य देशों के कृषि उत्पादक, निर्यातक और आयातक बिना किसी तीसरे देश के बिचौलियों के सीधे व्यापारिक अनुबंध कर सकेंगे।

वर्तमान अंतरराष्ट्रीय अनाज व्यापार में अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग हाउसों और बहुराष्ट्रीय मध्यस्थों की लंबी श्रृंखला के कारण खेत से उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते अनाज की कीमतें काफी बढ़ जाती हैं, जबकि वास्तविक किसान को उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इस साझा एक्सचेंज के माध्यम से गेहूं, चावल, मक्का, दालों और तिलहन की मांग व आपूर्ति का वास्तविक समय में मिलान संभव होगा, जिससे शिकागो और लंदन जैसे पश्चिमी कमोडिटी एक्सचेंजों पर मूल्य निर्धारण की निर्भरता समाप्त होगी तथा खाद्य वस्तुओं की कीमतों में होने वाले अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

स्वतंत्र इंश्योरेंस सिस्टम: पश्चिमी प्रतिबंधों की काट

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में समुद्री माल ढुलाई, जहाजों के बीमा और री-इंश्योरेंस (पुनर्बीमा) की व्यवस्था का रणनीतिक महत्व होता है। वर्तमान में वैश्विक समुद्री बीमा बाजार का अधिकांश हिस्सा पश्चिमी देशों और यूरोपीय संघ के सिंडिकेट्स द्वारा नियंत्रित है, जो भू-राजनीतिक तनाव या प्रतिबंधों के दौरान जहाजों का बीमा रद्द कर व्यापार को अवरुद्ध कर देते हैं।

इस जोखिम से निपटने के लिए नई दिल्ली घोषणापत्र में ‘ब्रिक्स इंश्योरेंस रेजिलिएंस सेंटर’ (BIRC) की स्थापना को गति देने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही भारत ने गुजरात स्थित ‘गिफ्ट सिटी’ (GIFT City IFSC) में एक विशेष ‘ब्रिक्स रिस्क लैब’ (BRICS Risk Lab) की मेजबानी का प्रस्ताव दिया है। यह केंद्र सदस्य देशों के मध्य व्यापारिक जहाजों, ऊर्जा आपूर्ति और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए साझा जोखिम विश्लेषण, अंडरराइटिंग और वित्तीय पुनर्बीमा गारंटी उपलब्ध कराएगा, जिससे किसी भी एकतरफा प्रतिबंध का ब्रिक्स व्यापार पर असर नहीं पड़ेगा।

भारतीय कृषि और गिफ्ट सिटी के लिए अभूतपूर्व अवसर

भारत के दृष्टिकोण से यह प्रस्ताव रणनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है। दुनिया के शीर्ष चावल, गेहूं और चीनी उत्पादक देशों में शामिल होने के कारण भारतीय किसानों और कृषि निर्यातकों को ब्रिक्स के 10 से अधिक सदस्य देशों के विशाल बाजार तक बिना किसी व्यापारिक बाधा के सीधी पहुंच मिलेगी।

दूसरी ओर, गिफ्ट सिटी में ब्रिक्स रिस्क लैब की स्थापना से भारत एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और बीमा हब के रूप में उभरेगा। इससे देश में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ेगा, स्थानीय वित्तीय तंत्र मजबूत होगा और सीमा पार व्यापार में स्थानीय मुद्राओं (जैसे रुपया और रूबल) में भुगतान तथा बीमा निपटान को संस्थागत समर्थन मिलेगा।

खाद्य सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाओं का सशक्तिकरण

जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून, युद्ध और भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण दुनिया भर में खाद्य और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखलाएं गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। नई दिल्ली घोषणापत्र में ब्रिक्स नेताओं ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि वैश्विक खाद्य कीमतों में अचानक होने वाले उछाल से विकासशील और अविकसित देशों की अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह चरमरा जाती हैं।

साझा अनाज बाजार और मजबूत बीमा तंत्र के माध्यम से सदस्य देश संकट के समय एक-दूसरे के राष्ट्रीय खाद्य भंडारों, उर्वरक आपूर्ति और जलवायु-अनुकूल उन्नत बीजों का आदान-प्रदान सुगम बना सकेंगे। यह व्यवस्था केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ (वैश्विक दक्षिण) के करोड़ों नागरिकों के लिए दीर्घकालिक खाद्य और पोषण सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित करने का साधन बनेगी।

BRICS Summit 2026: निष्कर्ष

नई दिल्ली शिखर सम्मेलन 2026 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा प्रस्तुत यह आर्थिक मॉडल ब्रिक्स को महज एक राजनीतिक मंच से आगे ले जाकर एक आत्मनिर्भर आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक कदम है। यद्यपि विभिन्न सदस्य देशों के अलग-अलग कानूनी, वित्तीय और तकनीकी नियमों को एक सूत्र में पिरोना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी, किंतु नई दिल्ली घोषणापत्र में बनी आम सहमति स्पष्ट करती है कि ब्रिक्स अब पश्चिमी आर्थिक एकाधिकार को संतुलित करते हुए एक अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यापार प्रणाली के निर्माण के लिए पूरी तरह तैयार है।

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