AAP Political Crisis: AAP में घमासान, केजरीवाल ने राघव चड्ढा-संदीप पाठक पर साधा निशाना

राज्यसभा सांसदों के दलबदल पर केजरीवाल नाराज, बोले- अब उम्मीदवारों को ठोक-बजाकर चुनेंगे

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AAP Political Crisis: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर संगठनात्मक स्तर पर मची उथल-पुथल के बीच पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने पूर्व सहयोगियों राघव चड्ढा और डॉ. संदीप पाठक पर सीधा हमला बोला है। गोवा दौरे पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने राज्यसभा सांसदों के दलबदल पर गहरा अफसोस जताया और दो टूक कहा कि भविष्य में पार्टी किसी भी नेता को उच्च सदन में भेजने से पूर्व सौ बार ठोक-बजाकर देखेगी कि वह भरोसेमंद है या नहीं।

केजरीवाल ने कहा कि जिन नेताओं को पार्टी ने मान-सम्मान देकर संसद के उच्च सदन तक पहुंचाया, उन्होंने जनता और पार्टी के मूल सिद्धांतों के साथ विश्वासघात किया है। गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में राघव चड्ढा और संदीप पाठक समेत AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने दो-तिहाई बहुमत के आधार पर पार्टी से नाता तोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया था। इसके बाद राज्यसभा सचिवालय ने भी इन सभी सांसदों के भाजपा में विलय को औपचारिक मान्यता प्रदान कर दी थी।

AAP Political Crisis: ‘अब 100 बार ठोक-बजाकर ही किसी को राज्यसभा भेजेंगे’

गोवा में आम आदमी पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के नए राजनीतिक मोर्चे ‘Goa First’ की घोषणा के दौरान अरविंद केजरीवाल ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के लिए एक कड़वी राजनीतिक सीख रहा है।

केजरीवाल ने कहा कि इन नेताओं को आम जनता ने सीधे चुनकर नहीं भेजा था, बल्कि पार्टी ने अपनी मेहनत और जनता के भरोसे के आधार पर उन्हें राज्यसभा की सदस्यता दिलाई थी। उन्होंने संगठन के कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि भविष्य में राज्यसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के चयन में अतिरिक्त सावधानी बरती जाएगी और केवल उन कार्यकर्ताओं को ही आगे बढ़ाया जाएगा जिनकी निष्ठा पद और सत्ता से ऊपर संगठन के प्रति अटल हो।

राघव चड्ढा और संदीप पाठक का AAP में क्या रहा है योगदान?

राघव चड्ढा और संदीप पाठक कभी अरविंद केजरीवाल की ‘कोर टीम’ के सबसे ताकतवर और प्रभावशाली स्तंभ माने जाते थे:

  • राघव चड्ढा: पार्टी के शुरुआती आंदोलन के दिनों से जुड़े चड्ढा ने लंबे समय तक राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली में पार्टी के प्रमुख युवा चेहरे के रूप में काम किया। बाद में पंजाब में पार्टी के सह-प्रभारी के रूप में उन्होंने 2022 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव में प्रचार और प्रबंधन को संभाला। उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें पंजाब से राज्यसभा भेजा गया, जहां वे मुखर वक्ता रहे।

  • डॉ. संदीप पाठक: राजनीति में आने से पूर्व आईआईटी दिल्ली में असिस्टेंट प्रोफेसर रहे डॉ. पाठक को पर्दे के पीछे का चाणक्य माना जाता था। पंजाब और गुजरात विधानसभा चुनावों में उन्होंने डेटा-आधारित माइक्रो-मैनेजमेंट और संगठनात्मक ढांचे का निर्माण किया। 2022 में पंजाब जीत के बाद उन्हें न केवल राज्यसभा भेजा गया, बल्कि राष्ट्रीय संगठन महामंत्री का दायित्व भी सौंपा गया था।

दलबदल पर वार-पलटवार: ‘टॉक्सिक वर्कप्लेस’ बनाम ‘विश्वासघात’

अप्रैल 2026 में जब 7 राज्यसभा सांसदों ने सामूहिक रूप से भाजपा की सदस्यता ली थी, तब राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों, ईमानदारी और आंतरिक लोकतंत्र से भटक चुकी है और वहां काम करने का माहौल बेहद असहज हो चुका है।

हाल ही में पंजाब में भाजपा की नशा-विरोधी यात्रा के दौरान भी राघव चड्ढा ने चुटकी लेते हुए कहा था कि पार्टी उन्हें किसी ‘एक्स-गर्लफ्रेंड’ की तरह भूल नहीं पा रही है। अब अरविंद केजरीवाल द्वारा सार्वजनिक मंच से उन पर धोखेबाजी का आरोप लगाए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तीखी हो गई है।

राज्यसभा में AAP के समीकरण और भविष्य की चुनौतियां

सांसदों के इस बड़े दलबदल का सबसे गहरा आघात संसद के ऊपरी सदन में पार्टी की शक्ति पर पड़ा है। 10 राज्यसभा सांसदों वाली आम आदमी पार्टी अब सदन में केवल 3 सांसदों (संजय सिंह, एनडी गुप्ता आदि) तक सिमट कर रह गई है। पंजाब से आने वाले सांसदों के टूटने के कारण संसद में क्षेत्रीय मुद्दों पर पार्टी की पकड़ कमजोर हुई है।

इस संकट से उबरने के लिए अरविंद केजरीवाल को हाल ही में दोबारा पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक चुना गया है और एक नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया है। पार्टी अब गोवा, गुजरात और पंजाब में अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह देकर संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की रणनीति पर काम कर रही है। केजरीवाल का यह ताजा बयान कार्यकर्ताओं में यह भरोसा पैदा करने का प्रयास है कि भविष्य में बाहरी या तकनीकी विशेषज्ञों के बजाय आंदोलन से उपजे वफादार साथियों को ही संवैधानिक जिम्मेदारियां दी जाएंगी।

AAP Political Crisis: निष्कर्ष

अरविंद केजरीवाल का राघव चड्ढा और संदीप पाठक पर किया गया यह सीधा हमला इस बात का संकेत है कि आम आदमी पार्टी अभी भी राज्यसभा के उस ऐतिहासिक विभाजन के राजनीतिक झटके से उबरने की प्रक्रिया में है। आगामी विधानसभा चुनावों और संगठनात्मक पुनर्गठन के बीच, पार्टी नेतृत्व का यह संकल्प कि उम्मीदवारों को ‘ठोक-बजाकर’ परखा जाएगा, बताता है कि आने वाले समय में पार्टी में आंतरिक वफादारी ही पदोन्नति का सबसे बड़ा पैमाना होगी।

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