Bihar Politics: अनंत सिंह की रिहाई में कहां अटका पेंच? बिना शपथ लिए बीत सकते हैं पांच साल
मोकामा विधायक अनंत सिंह जेल में, एक मामले में राहत मिली पर अन्य मामलों में कार्रवाई जारी
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में छोटे सरकार के नाम से मशहूर बाहुबली नेता अनंत सिंह की जेल से रिहाई एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। मोकामा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने के बावजूद अनंत सिंह जेल की सलाखों के पीछे हैं। हाल ही में एक मामले में मिली राहत के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर तो है, लेकिन कानूनी पेचीदगियां अभी भी बरकरार हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वह वाकई जल्द जेल से बाहर आ पाएंगे और क्या बिना शपथ लिए पूरे पांच साल विधायक रह सकते हैं।
कानूनी उलझन में फंसे अनंत सिंह

अनंत सिंह के खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं। हालांकि एक मामले में उन्हें हाल ही में राहत मिली है, लेकिन अन्य मामलों में अभी भी कानूनी कार्रवाई जारी है। इसी वजह से उनकी रिहाई में देरी हो रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सभी मामलों में राहत नहीं मिलती या जमानत नहीं मिलती, तब तक उनकी रिहाई मुश्किल है।
बिहार पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां अनंत सिंह के खिलाफ दर्ज मामलों की गंभीरता से जांच कर रही हैं। हत्या, हथियारों के अवैध रखरखाव और अन्य आपराधिक मामलों में उनका नाम शामिल है। हर मामले में अलग-अलग अदालतों में सुनवाई चल रही है। एक मामले में राहत मिलने से भले ही उम्मीद की किरण दिखी हो, लेकिन अन्य मामलों में स्थिति अभी भी जटिल बनी हुई है।
Bihar Politics: क्या कहता है कानून
भारतीय कानून के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति विधायक या सांसद चुना जाता है तो उसे निर्धारित समय सीमा के भीतर शपथ लेनी होती है। अगर कोई सदस्य बिना किसी उचित कारण के लगातार साठ दिनों तक सदन की बैठकों में अनुपस्थित रहता है तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है।
हालांकि अगर कोई व्यक्ति जेल में है और इस कारण शपथ नहीं ले पा रहा है तो यह एक वैध कारण माना जा सकता है। लेकिन यह स्थिति पांच साल तक नहीं चल सकती। अगर पूरे कार्यकाल में विधायक शपथ ही नहीं लेता तो उसकी सदस्यता पर सवाल उठ सकते हैं। विधानसभा अध्यक्ष को इस मामले में निर्णय लेने का अधिकार है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि अनंत सिंह की स्थिति अनोखी है। वे चुने तो गए हैं लेकिन शपथ नहीं ले पाए हैं। अगर वे पूरे पांच साल तक जेल में ही रहे तो उनकी विधायकी का क्या होगा, यह एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न है।
समर्थकों में उम्मीद की लहर
हाल ही में एक मामले में मिली राहत के बाद अनंत सिंह के समर्थकों में खुशी की लहर है। उनके वफादार कार्यकर्ता मानते हैं कि जल्द ही उनके नेता जेल से बाहर आएंगे और मोकामा की जनता की सेवा करेंगे। मोकामा में अनंत सिंह का प्रभाव अभी भी मजबूत है।
उनके समर्थकों का कहना है कि अनंत सिंह पर लगाए गए आरोप राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम हैं। वे मानते हैं कि उनके नेता निर्दोष हैं और जल्द ही सभी मामलों से बरी हो जाएंगे। समर्थकों ने कई बार विरोध प्रदर्शन भी किया है और उनकी रिहाई की मांग की है।
लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनंत सिंह की स्थिति आसान नहीं है। उन पर गंभीर आरोप हैं और कानूनी प्रक्रिया में समय लगना स्वाभाविक है। जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं हो सकता।
विधायकी पर संकट के बादल
अनंत सिंह की विधायकी पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अगर वे लंबे समय तक शपथ नहीं ले पाते तो उनकी सदस्यता खतरे में पड़ सकती है। मोकामा की जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना है लेकिन वे विधानसभा में जाकर अपने क्षेत्र की आवाज नहीं उठा पा रहे हैं।
विपक्षी दल इस मुद्दे को उठा सकते हैं। वे यह सवाल कर सकते हैं कि अगर कोई विधायक शपथ ही नहीं ले सकता तो उसकी सदस्यता का क्या औचित्य है। हालांकि जेल में होना एक वैध कारण है, लेकिन यह स्थिति अनिश्चितकाल तक नहीं चल सकती।
विधानसभा अध्यक्ष को इस मामले में कोई निर्णय लेना पड़ सकता है। अगर अनंत सिंह की रिहाई में और देरी होती है तो उनकी सदस्यता पर फैसला लेना जरूरी हो जाएगा। यह बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ साबित हो सकता है।
Bihar Politics: आगे क्या होगा?
अब देखना यह है कि अनंत सिंह के खिलाफ चल रहे अन्य मामलों में क्या होता है। अगर उन्हें और मामलों में भी राहत मिलती है या जमानत मिल जाती है तो वे जेल से बाहर आ सकते हैं। लेकिन अगर मामले लंबे समय तक चलते रहे तो उनकी स्थिति मुश्किल बनी रहेगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालतें अपनी गति से काम करेंगी। किसी भी दबाव में आकर फैसला नहीं होगा। न्याय प्रक्रिया को पूरा होने दिया जाना चाहिए। तभी सच्चाई सामने आएगी।
बिहार की राजनीति में अनंत सिंह का नाम लंबे समय से चर्चा में रहा है। उनकी रिहाई और विधायकी का मामला आने वाले दिनों में और भी रोचक होने वाला है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कानून क्या फैसला देता है और अनंत सिंह का राजनीतिक भविष्य क्या होता है।
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