Apple India Revenue: एप्पल की कमाई ₹1 लाख करोड़ के पार, मुनाफे में 66% का उछाल
FY26 में एप्पल इंडिया का राजस्व 31% बढ़ा, जबकि शुद्ध मुनाफे में 66% से ज्यादा की वृद्धि हुई
Apple India Revenue: भारत के उपभोक्ता बाजार में प्रीमियम स्मार्टफोन और गैजेट्स के प्रति बढ़ते आकर्षण ने वैश्विक तकनीकी दिग्गज एप्पल (Apple) के लिए ऐतिहासिक वित्तीय आंकड़े दर्ज कराए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के दौरान एप्पल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने भारतीय कॉरपोरेट इतिहास में एक नया मील का पत्थर स्थापित करते हुए पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये के वार्षिक परिचालन राजस्व के आंकड़े को पार कर लिया है। कंपनी द्वारा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) में जमा कराए गए आधिकारिक वित्तीय विवरणों के अनुसार, इसका कुल परिचालन राजस्व सालाना आधार पर लगभग 31.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,03,853 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। इसके साथ ही, परिचालन दक्षता और प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग के चलते कंपनी के शुद्ध मुनाफे में 66 प्रतिशत से अधिक का भारी उछाल दर्ज किया गया है।
Apple India Revenue: राजस्व में 31.4% की छलांग
एप्पल इंडिया द्वारा नियामक फाइलिंग में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में कंपनी का परिचालन राजस्व 1,03,853 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो इससे पूर्व वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में 79,060 करोड़ रुपये था। इस प्रकार कंपनी की आय में साल-दर-साल 31.36 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
यह विस्तार इस मायने में भी उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी की राजस्व वृद्धि दर लगभग 18 प्रतिशत रही थी। वित्त वर्ष 2025-26 में विकास की इस रफ्तार ने न केवल पिछले प्रदर्शन को पीछे छोड़ दिया, बल्कि यह भी स्थापित किया कि भारतीय बाजार में एप्पल की वाणिज्यिक स्वीकार्यता अब महानगरों से निकलकर टियर-2 और टियर-3 शहरों तक तेजी से विस्तृत हो चुकी है।
शुद्ध मुनाफे में 66.2% की वृद्धि: लाभप्रदता ने राजस्व वृद्धि को पछाड़ा
वित्तीय आंकड़ों का सबसे प्रभावशाली पहलू कंपनी की लाभप्रदता में दर्ज की गई तीव्र वृद्धि है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान एप्पल इंडिया का कर पश्चात शुद्ध मुनाफा बढ़कर 5,311 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 3,196 करोड़ रुपये था। इस तरह कंपनी के मुनाफे में 66.17 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।
मुनाफे की वृद्धि दर का राजस्व वृद्धि दर (31.4%) की तुलना में दोगुने से भी अधिक रहना यह दर्शाता है कि कंपनी के परिचालन मार्जिन और ऑपरेटिंग लीवरेज में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हालांकि कंपनी ने अपनी फाइलिंग में इस वृद्धि के सटीक उत्पाद-वार विवरण का अलग से उल्लेख नहीं किया है, लेकिन वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि उच्च मार्जिन वाले ‘प्रो’ और ‘प्रो मैक्स’ मॉडल्स की बढ़ती हिस्सेदारी तथा भारत में स्थापित आधिकारिक रिटेल स्टोर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के सीधे वितरण तंत्र ने मुनाफे को पंख लगाए हैं।
प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग और आईफोन बिक्री में 24% की उछाल
बाजार अनुसंधान फर्म काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, भारत का समग्र स्मार्टफोन बाजार वित्त वर्ष 2025-26 में मूल्य के आधार पर लगभग 9 प्रतिशत और बिक्री मात्रा (वॉल्यूम) के आधार पर मात्र 2 प्रतिशत की दर से बढ़ा। पूरे स्मार्टफोन उद्योग की इस सुस्त रफ्तार के विपरीत 30 हजार रुपये से अधिक मूल्य वाले प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में वॉल्यूम के आधार पर 12 प्रतिशत की तेज वृद्धि देखी गई।
इस प्रीमियम मांग का सबसे बड़ा लाभ एप्पल को मिला, जहां वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत में आईफोन की कुल बिक्री मात्रा में 24 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले वित्त वर्ष में आईफोन वॉल्यूम ग्रोथ 11 प्रतिशत थी, जो चालू वर्ष में दोगुनी से भी अधिक हो गई। आसान मासिक किस्तों (नो-कॉस्ट ईएमआई), आकर्षक एक्सचेंज बोनस और बैंक कैशबैक ऑफर्स ने मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं के लिए आईफोन खरीदना अत्यधिक सुगम बना दिया है, जिसने बिक्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
सैमसंग बनाम एप्पल: भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में बदलता समीकरण
एप्पल इंडिया के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद उद्योग जगत में उसकी तुलना उसके निकटतम प्रतिद्वंद्वी सैमसंग इंडिया से की जा रही है। वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया का कुल वार्षिक राजस्व वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 1.12 लाख करोड़ रुपये रहा। हालांकि दोनों कंपनियों के राजस्व की संरचना में एक बड़ा मौलिक अंतर मौजूद है।
सैमसंग का यह राजस्व स्मार्टफोन के साथ-साथ टेलीविजन, रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन, एयर कंडीशनर और घरेलू उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के विशाल पोर्टफोलियो पर आधारित है। इसके विपरीत, यदि केवल मोबाइल फोन कारोबार की बात करें, तो सैमसंग इंडिया का मोबाइल राजस्व वित्त वर्ष 2025-26 में 1.4 प्रतिशत घटकर 81,472 करोड़ रुपये रह गया, जो पूर्व वित्त वर्ष में 82,595 करोड़ रुपये था। इसके विपरीत एप्पल ने अकेले अपने हार्डवेयर और डिवाइस इकोसिस्टम के दम पर 1.03 लाख करोड़ रुपये जुटाकर मोबाइल हैंडसेट सेगमेंट में एक निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है।
विनिर्माण और निर्यात की अलग व्यवस्था: स्थानीय इकोसिस्टम का विस्तार
यहां यह समझना भी आवश्यक है कि एप्पल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के इन वित्तीय नतीजों में केवल भारत के भीतर की गई घरेलू खुदरा और थोक बिक्री शामिल है। कंपनी के अनुबंध विनिर्माताओं—जैसे फॉक्सकॉन, पेगाट्रॉन और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स—द्वारा भारत से किए जाने वाले अरबों डॉलर के आईफोन निर्यात को एप्पल इंडिया के बहीखातों में दर्ज नहीं किया जाता। वह निर्यात सीधे एप्पल ग्रुप की वैश्विक विदेशी इकाइयों के माध्यम से रूट होता है।
यदि घरेलू राजस्व और स्थानीय विनिर्माण के संयुक्त प्रभाव को देखा जाए, तो भारत अब एप्पल के वैश्विक आपूर्ति तंत्र और उपभोक्ता बाजार दोनों में एक केंद्रीय स्तंभ के रूप में स्थापित हो चुका है। देश में नए फ्लैगशिप रिटेल स्टोर्स का खुलना और स्थानीय स्तर पर असेंबल किए गए नवीनतम मॉडल्स की समय पर उपलब्धता भारतीय उपभोक्ताओं में ब्रांड के प्रति विश्वास को और अधिक सुदृढ़ कर रही है।
Apple India Revenue: भारतीय बाजार में एप्पल के भविष्य का रोडमैप
वित्तीय वर्ष 2025-26 के यह परिणाम इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि भारतीय उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं में ‘वैल्यू फॉर मनी’ से आगे बढ़कर ‘प्रीमियमीकरण’ की प्रवृत्ति हावी हो रही है। युवाओं और कामकाजी पेशेवरों के बीच आईफोन के साथ-साथ एप्पल वॉच, आईपैड, मैकबुक और क्लाउड सेवाओं का इकोसिस्टम तेजी से फैल रहा है।
आने वाले वर्षों में कंपनी के विकास की गति इस बात पर निर्भर करेगी कि वह स्थानीय उत्पादन के जरिए आयात शुल्कों का लाभ उपभोक्ताओं तक किस हद तक पहुंचाती है और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपने पहुंच तंत्र को कितना प्रभावी बनाए रखती है। फिलहाल एक लाख करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े को पार कर एप्पल ने भारतीय उपभोक्ता बाजार के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
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