अमित शाह का असम में बड़ा एलान: यूसीसी लागू होगा, हर घुसपैठिए को वापस भेजा जाएगा
Amit Shah on Assam UCC: उत्तराखंड के बाद अब असम में लागू होगा एक समान कानून।
Amit Shah on Assam UCC: जब देश में चुनावी माहौल गरमाया हुआ हो और असम की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी हो, तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का असम दौरा कई मायनों में अहम बन गया। ढेकियाजुली विधानसभा क्षेत्र की रैली में शाह ने घुसपैठ, आतंकवाद और यूसीसी जैसे बड़े मुद्दों पर खुलकर बात की और कांग्रेस को सीधे निशाने पर लिया।
असम में यूसीसी लागू करने का ऐलान क्यों अहम है?
अमित शाह ने रैली में स्पष्ट किया कि यदि असम में भाजपा की सरकार बनती है तो समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को राज्य में लागू किया जाएगा। यूसीसी का अर्थ है कि विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे मामलों में सभी धर्मों के लोगों के लिए एक समान कानून लागू होगा।
संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, यूसीसी संविधान के अनुच्छेद 44 में उल्लिखित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों का हिस्सा है और इसे लागू करना एक दीर्घकालिक नीतिगत लक्ष्य रहा है। उत्तराखंड के बाद असम इस दिशा में कदम उठाने वाला दूसरा बड़ा राज्य बन सकता है।
घुसपैठ पर शाह का कड़ा रुख और दस साल का हिसाब
शाह ने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले दस वर्षों में असम में अवैध घुसपैठ को काफी हद तक रोका है, लेकिन यह काम तब तक पूरा नहीं माना जाएगा जब तक एक भी अवैध अप्रवासी भारतीय भूमि पर मौजूद है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि प्रत्येक घुसपैठिए को उसके देश वापस भेजा जाएगा।
गृह मंत्री ने असम को घुसपैठिया मुक्त बनाने के लिए हिमंत बिस्वा सरमा को एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाए जाने की अपील करते हुए कहा कि यही एकमात्र रास्ता है जिससे राज्य में स्थायी शांति और विकास सुनिश्चित हो सकता है।
बोडोलैंड शांति समझौते का जिक्र और कांग्रेस पर सवाल
शाह ने रैली में बोडोलैंड के युवाओं और आदिवासियों का उल्लेख करते हुए कहा, “अगर भाजपा बोडोलैंड के युवाओं, आदिवासियों से बात कर सकती है, तो कांग्रेस क्यों नहीं कर पाई?” यह सवाल उन्होंने सीधे जनता के सामने रखा।
उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में कई दौर की बातचीत के बाद करीब दस हजार युवाओं ने हथियार डाल दिए और राज्य में शांति बहाल हुई। यह आंकड़ा असम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जाता है।
कांग्रेस पर आतंकवाद को प्रोत्साहन देने का आरोप क्यों लगाया?
अमित शाह ने कांग्रेस के शासनकाल को याद दिलाते हुए कहा कि उस दौर में असम में गोलीबारी और बम विस्फोट आम बात थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने पाकिस्तान से आए आतंकवादियों को देश में घुसने और हिंसा फैलाने का मौका दिया।
शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई और आज भाजपा के कारण ही असम आतंकवाद मुक्त है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान असम की जनता को कांग्रेस काल की याद दिलाकर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
एसआईआर विरोध पर कांग्रेस क्यों घिरी?
शाह ने राहुल गांधी और असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई पर सीधा हमला करते हुए कहा कि वे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का विरोध करके घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने गोगोई से सार्वजनिक रूप से यह बताने की मांग की कि वे घुसपैठियों को वापस भेजने के पक्ष में हैं या विरोध में। चुनावी मामलों के जानकारों का कहना है कि एसआईआर का विरोध संवेदनशील राज्यों में राजनीतिक रूप से एक कमजोर पक्ष साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
अमित शाह की ढेकियाजुली रैली असम की राजनीति में कई संदेश एक साथ लेकर आई। यूसीसी का ऐलान, घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंस की नीति और कांग्रेस पर सीधा हमला, यह तीनों मिलकर भाजपा की चुनावी रणनीति की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं।
अब देखना यह होगा कि असम की जनता इन मुद्दों पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है और कांग्रेस इन आरोपों का किस तरह जवाब देती है। असम का यह चुनावी संग्राम न केवल राज्य की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित होगा।
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