Aaj Ka Mausam 20 September 2026: दिल्ली-UP में कैसा रहेगा मौसम, इन राज्यों में बारिश और आंधी का अलर्ट

दिल्ली में 35°C तक तापमान, राजस्थान में आंधी-बारिश और तटीय इलाकों में बदल सकता है मौसम

0
Aaj Ka Mausam 20 September 2026: सितंबर के तीसरे पखवाड़े में देश के विभिन्न भूभागों में वायुमंडलीय दशाओं और मानसूनी गतिविधियों का दोहरा मिजाज देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां उत्तर-पश्चिम भारत के सीमांत क्षेत्रों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की क्रमिक विदाई की प्रक्रिया गति पकड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ अंडमान सागर में सक्रिय हो रही नई मौसमी प्रणाली के चलते पूर्वी तटीय क्षेत्रों में वर्षा का एक नया दौर प्रारंभ होने की ओर अग्रसर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा 19 सितंबर को जारी किए गए अद्यतन मौसम पूर्वानुमान के अनुसार रविवार, 20 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और समूचे उत्तर प्रदेश में किसी प्रकार की मौसम चेतावनी (चेतावनी रहित ग्रीन जोन) जारी नहीं की गई है।

Aaj Ka Mausam 20 September 2026: दिल्ली-NCR का मौसम

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के उपनगरीय क्षेत्रों—नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद—में रविवार को मौसम मुख्य रूप से सामान्य और शुष्क रहने का अनुमान है। मौसम विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय और सफदरजंग वेधशाला के लिए जारी स्थानीय पूर्वानुमान के अनुसार 20 सितंबर को न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तथा अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है।
दिन के दौरान आसमान में आंशिक रूप से हल्के बादल छाए रह सकते हैं, किंतु किसी व्यापक वर्षा या आंधी की संभावना से विभाग ने इनकार किया है। यद्यपि वातावरण में आर्द्रता अधिक रहने के कारण दोपहर के समय चिलचिलाती धूप में हल्की उमस महसूस हो सकती है, तथापि सुबह और देर शाम के समय चलने वाली मंद हवाओं से मौसम खुशनुमा और आरामदायक बना रहेगा। स्थानीय स्तर पर बादलों के संकेंद्रण से किसी पृथक इलाके में क्षणिक बूंदाबांदी की संभावना को पूर्णतः नकारा नहीं जा सकता, किंतु समग्र रूप से दिल्ली-एनसीआर के निवासियों के लिए रविवार का दिन बाहरी गतिविधियों और सप्ताहांत यात्राओं के लिए पूरी तरह अनुकूल रहेगा।

पूर्वी और पश्चिमी संभाग में चेतावनी शून्य

उत्तर प्रदेश के विशाल भूभाग में खेती-किसानी और दैनिक आवागमन से जुड़े नागरिकों के लिए 20 सितंबर का दिन मौसम के दृष्टिकोण से अत्यंत शांत और स्थिर रहने वाला है। मौसम विभाग के उपखंडवार बुलेटिन के अनुसार 20 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश—जिसमें मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़ और आगरा संभाग शामिल हैं—और पूर्वी उत्तर प्रदेश—जिसमें लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और अयोध्या मंडल आते हैं—दोनों के लिए कोई आधिकारिक मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह चेतावनी-रहित शुष्क स्थिति आगामी 21 सितंबर से 25 सितंबर तक भी व्यापक रूप से बनी रहने की संभावना है। मानसूनी ट्रफ रेखा के दक्षिण की ओर खिसकने और हिमालय की तलहटी से दूर होने के कारण प्रदेश में भारी वर्षा का कोई तंत्र फिलहाल सक्रिय नहीं है। हालांकि तराई और पूर्वी सीमावर्ती जनपदों में छिटपुट बादलों की आवाजाही देखी जा सकती है, किंतु अधिकांश जिलों में तीखी धूप खिलने से तापमान में मामूली वृद्धि दर्ज की जाएगी। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों और खुले खलिहानों में कृषि कार्य करने वाले किसानों के लिए यह मौसम राहत भरा सिद्ध होगा।

पूर्वी राजस्थान में आंधी और बिजली चमकने का अलर्ट, पश्चिमी भाग से मानसून की वापसी

राजस्थान के मौसम में भौगोलिक आधार पर दो स्पष्ट विभाजन दिखाई दे रहे हैं। मौसम विभाग ने 20 सितंबर को पूर्वी राजस्थान—जिसके अंतर्गत जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, कोटा और उदयपुर संभाग के जिले आते हैं—के लिए गरज-चमक के साथ आंधी और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली तेज झोंके वाली हवाओं का येलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में स्थानीय संवहनीय मेघों के विकास के कारण दोपहर बाद अथवा सायं काल में गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।
इसके उलट, थार मरुस्थल से आच्छादित पश्चिमी राजस्थान—जिसमें बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर और श्रीगंगानगर जिले सम्मिलित हैं—के लिए 20 सितंबर को मौसम पूरी तरह शुष्क और साफ रहने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने आधिकारिक पुष्टि की है कि पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 की क्रमिक वापसी (Withdrawal of Monsoon) के लिए मौसमी परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो चुकी हैं। वातावरण में शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाओं का प्रवेश प्रारंभ हो चुका है, जिससे आर्द्रता में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।

ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में बढ़ेगा दबाव

उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून कमजोर पड़ने के समानांतर, देश के समुद्री क्षेत्रों में एक नया शक्तिशाली मौसमी तंत्र सक्रिय हो रहा है। आईएमडी के समुद्री मौसम विज्ञान प्रभाग के अनुसार उत्तरी थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी वायुमंडलीय चक्रवाती परिसंचरण पश्चिम दिशा में अग्रसर होकर उत्तर अंडमान सागर और उससे सटे पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर केंद्रित हो गया है। इस परिसंचरण के प्रभाव से उत्तर अंडमान सागर के ऊपर एक नया निम्न दबाव क्षेत्र (Low-Pressure Area) आकार ले रहा है।
संख्यात्मक मौसम मॉडल के संकेतों के अनुसार यह निम्न दबाव क्षेत्र अगले 48 से 72 घंटों के दौरान और अधिक सुगठित व प्रभावी होकर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में गति करेगा। इसके 23 से 24 सितंबर के मध्य दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटीय सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचने की प्रबल संभावना है। इस मौसमी हलचल के प्रभाव से 20 सितंबर के उपरांत पूर्वी भारत के तटीय क्षेत्रों, विशेषकर ओडिशा के तटीय जिलों, विशाखापत्तनम, विजयनगरम और श्रीकाकुलम में गरज-चमक के साथ भारी वर्षा का नया सिलसिला प्रारंभ हो सकता है।

सितंबर के अंतिम पखवाड़े का मौसमी रुझान

सितंबर के अंतिम सप्ताह में देश का मौसम संक्रमण कालीन अवस्था (Transitional Phase) में प्रवेश कर जाता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी एक क्रमिक और लंबी चलने वाली वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके तहत सबसे पहले उत्तर-पश्चिम भारत से मानसूनी हवाएं पीछे हटती हैं। इसका तात्पर्य यह कदापि नहीं होता कि समूचे देश से वर्षा समाप्त हो जाती है।
जहां एक ओर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधियों में स्पष्ट विराम देखने को मिलता है, वहीं दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी से उठने वाले अवदाब और चक्रवाती तंत्र मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, विदर्भ और तेलंगाना के क्षेत्रों में सितंबर के अंत तक रुक-रुक कर वर्षा कराते रहते हैं। इसके अतिरिक्त प्रायद्वीपीय भारत में तमिलनाडु और केरल के ऊपर स्थानीय पवन अभिसरण (Wind Convergence) के कारण शाम के समय तेज गरज के साथ बौछारें गिरना इस ऋतु का सामान्य लक्षण है।

Aaj Ka Mausam 20 September 2026: मौसम विभाग के सुरक्षा परामर्श

जिन क्षेत्रों में विशेष रूप से पूर्वी राजस्थान और पूर्वी तटीय संभागों में गरज-चमक व बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है, वहां के नागरिकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। आकाशीय बिजली की चमक दिखाई देने पर खेतों में काम कर रहे किसानों को तुरंत खुले स्थानों, धातु के खंभों, मोबाइल टावरों और ऊंचे पेड़ों की शरण लेने से पूर्णतः बचना चाहिए। किसी पक्के भवन अथवा सुरक्षित ढांचे के भीतर आश्रय लेना जीवन रक्षा के लिए सर्वोपरि है।
सड़कों पर दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों को तेज झोंके वाली हवाओं के दौरान वाहन की गति नियंत्रित रखनी चाहिए और राजमार्गों पर लगे बड़े होर्डिंग्स या कमजोर वृक्षों के नीचे वाहन खड़ा करने से बचना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के उपकरणों के प्लग सॉकेट से निकाल देना उचित रहता है। स्थानीय मौसम में त्वरित बदलाव की स्थिति में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और मौसम विभाग के ‘दामिनी’ व ‘मौसम’ ऐप पर प्रसारित होने वाले तात्कालिक चेतावनी (Nowcast) संदेशों का अनुसरण करना श्रेयस्कर रहेगा।

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.