World TB Day 2026,- भारत में टीबी के मामले वैश्विक दर से दोगुनी रफ्तार से घटे, जानें लक्षण, कारण और पूरा इलाज

वैश्विक औसत से दोगुनी रफ्तार से टीबी मामले घटे, भारत सरकार के निक्षय पोषण और टीबी मुक्त अभियान की बड़ी सफलता

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World TB Day: विश्व टीबी दिवस 2026 पर भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। देश में ट्यूबरक्लोसिस के मामलों में 21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो वैश्विक औसत से दोगुनी है। यह उपलब्धि भारत सरकार के ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान की सफलता का प्रमाण है। जानें टीबी के लक्षण, कारण और इलाज की पूरी जानकारी।

एक समय था जब थिएटर में फिल्म शुरू होने से पहले का वह विज्ञापन हर भारतीय को डरा देता था, जिसमें खांसते हुए व्यक्ति के रुमाल पर खून के धब्बे दिखते थे।

World TB Day: भारत में टीबी के मामले इतनी तेजी से क्यों घटे?

विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक टीबी रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में टीबी के मामलों में औसतन करीब 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके मुकाबले भारत में यह गिरावट 21 प्रतिशत रही, जो वैश्विक दर से दोगुनी है।

इस उपलब्धि के पीछे भारत सरकार का ‘राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम’ और ‘निक्षय पोषण योजना’ जैसी पहलें हैं। इन योजनाओं के तहत टीबी के मरीजों को मुफ्त दवाएं, पोषण सहायता और नियमित निगरानी प्रदान की जाती है।

World TB Day: ट्यूबरक्लोसिस यानी टीबी असल में होती क्या है?

टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक जीवाणु से होती है। यह जीवाणु मुख्य रूप से फेफड़ों पर हमला करता है, हालांकि यह शरीर के अन्य अंगों जैसे हड्डियों, किडनी, मस्तिष्क और लिम्फ नोड्स को भी प्रभावित कर सकता है।

यह बीमारी हवा के जरिए फैलती है। जब कोई टीबी का मरीज खांसता, छींकता या बात करता है तो उसके मुंह से निकले सूक्ष्म कण हवा में फैल जाते हैं और आस-पास के स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़ों में पहुंचकर संक्रमण पैदा कर सकते हैं।

World TB Day: टीबी के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

टीबी के सबसे सामान्य लक्षण में दो हफ्ते से अधिक समय तक बनी रहने वाली खांसी प्रमुख है। इसके साथ खांसते समय बलगम में खून आना, लगातार हल्का बुखार रहना और रात को पसीना आना भी इस बीमारी के संकेत हैं।

इसके अलावा बिना किसी कारण के अचानक वजन घटना, भूख न लगना, थकान और कमजोरी महसूस होना भी टीबी के लक्षण हो सकते हैं। चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के अनुसार, “यदि दो हफ्ते से अधिक समय तक खांसी बनी रहे, तो उसे सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज करना गलत है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।”

World TB Day: टीबी का किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा होता है?

कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को टीबी होने का सबसे अधिक खतरा होता है। इनमें एचआईवी से पीड़ित लोग, मधुमेह के मरीज, कुपोषण से ग्रस्त व्यक्ति और धूम्रपान करने वाले शामिल हैं।

भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहने वाले लोग, झुग्गी बस्तियों के निवासी और वे लोग जो पहले से किसी टीबी के मरीज के संपर्क में रहे हों, उनमें भी संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पांच साल से कम उम्र के बच्चे और 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने के कारण वे भी इस बीमारी के आसान शिकार बन सकते हैं।

World TB Day: टीबी का पता कैसे लगाया जाता है और इलाज क्या है?

टीबी की जांच के लिए बलगम परीक्षण सबसे सामान्य तरीका है। इसके अलावा छाती का एक्सरे, ट्यूबरक्यूलिन स्किन टेस्ट और आधुनिक सीबीनेट परीक्षण भी उपलब्ध हैं जो कम समय में सटीक परिणाम देते हैं।

सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में टीबी का पूरा इलाज निःशुल्क उपलब्ध है। सामान्य टीबी का इलाज छह महीने तक चलता है जिसमें चार दवाओं का एक कोर्स दिया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार इलाज के बीच में दवाएं बंद करना बेहद खतरनाक है क्योंकि इससे दवा प्रतिरोधी टीबी यानी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी विकसित हो जाती है।

World TB Day: भारत का 2025 तक टीबी मुक्त होने का लक्ष्य कहां तक पहुंचा?

भारत सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा था, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2030 के लक्ष्य से पांच साल आगे था। हालांकि यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हुआ, लेकिन 21 प्रतिशत की गिरावट यह साबित करती है कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अब 2030 तक टीबी उन्मूलन के नए लक्ष्य के साथ अपनी रणनीति को और मजबूत किया है। निक्षय पोर्टल के माध्यम से लाखों मरीजों की निगरानी की जा रही है और उन्हें सीधे उनके बैंक खाते में पोषण राशि भेजी जा रही है।

निष्कर्ष

टीबी एक ऐसी बीमारी है जो लाइलाज नहीं है, बस इसके लिए जागरूकता, समय पर पहचान और नियमित इलाज की जरूरत है। भारत ने जो 21 प्रतिशत की गिरावट हासिल की है, वह लाखों स्वास्थ्यकर्मियों, नीतिनिर्माताओं और जागरूक नागरिकों की सामूहिक मेहनत का नतीजा है।

विश्व टीबी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई। हर खांसी को नजरअंदाज मत करिए, जांच करवाइए और यदि टीबी की पुष्टि हो तो इलाज पूरा कीजिए। एक जागरूक नागरिक ही भारत को सच में टीबी मुक्त बना सकता है।

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