क्यों शापित है चंबल की नदी जिसकी आज तक किसी ने पूजा नहीं की

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भारत नदियों का देश है…यहां एक से बढ़ कर एक नदियां हैं, जिनकी पूजा तक होती है….लेकिन क्या आप जानते हैं इन्हीं में से एक नदी ऐसी भी है जिसे शापित माना जाता है..जिसकी आज तक पूजा नहीं की गई…जी हां जिस नदी की हम बात कर रहे हैं…वो उत्तर प्रदेश के चंबल में बहने वाली चंबल नदी है..जिसको लेकर हालांकि अलग अलग तर्क जरूर हैं लेकिन ये भी सच है कि आज तक इस नदी को शापित माना जाता है…. कहा तो यहां तक जाता है कि इसकी उत्पत्ति जानवरों के खून से हुई थी..कुछ कहानियों में ये कहा जाता है कि एक बार इस नदी को राजा रंतिदेव ने बलि देकर जानवरों के खून से भर दिया था. जबकि कुछ पौराणिक कथाओं में कहा जाता है कि इस नदी को महाभारत की द्रौपदी द्वारा श्राप मिला है, जिसकी वजह से आज भी कुछ लोग इस नदी को शापित मानते हैं…तो सबसे पहले जानवारों की खून वाला किस्सा समझते हैं…

दरअसल भारत की यह नदी आज की नहीं बल्की सदियों पुरानी है. महाभारत में इसे चर्मण्यवती के रूप में दर्ज किया गया है. कहा जाता है कि एक बार यहां के राजा रंतिदेव ने बड़ी संख्या में जानवरों की बलि दी और उनका सारा खून इसी नदी में बहा दिया. इसकी वजह से इस नदी का पूरा पानी लाल हो गया और यह दूषित हो गई. तब से ही लोग इसका उपयोग करने से बचते हैं. हालांकि, आज इस नदी से पूरा इलाका अपना जीवन यापन कर रहा है…तो वहीं दूसरी तरफ ये भी लोगों की मान्यता है कि इसके पीछे द्रोपदी के श्राप की कहानी छुपी हुई है…

 

दरअसल एक पौराणिक कथा के अनुसार, कहा गया है कि महाभारत के पांच पांडवों की पत्नि द्रौपदी ने एक बार इस नदी को किसी कारणवश श्राप दे दिया था, जिसके बाद यह नदी भारत की पवित्र नदियों की लिस्ट से बाहर हो गई. आज इस नदी के पानी का लोग भले ही उपयोग करते हैं, लेकिन कोई इसे पूजता नहीं है….तो वहीं इस नदी को बागियों की नदी भी कहा जाता है. दरअसल, कहा जाता है कि इस नदी का पानी जिसने पी लिया वो बागी हो जाता है. आपको मालूम ही होगा कि चंबल वो इलाका है जो कभी बागियों से भरा रहता था. हालांकि, आज यहां की कानून व्यवस्था दुरुस्त है, लेकिन इसके बावजूद भी कई बार इस इलाके से कई ऐसी घटनाएं निकलकर सामने आती हैं, जो दिल दहला देती हैं।

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