Children Money Management: बच्चों को पैसे की समझ कब और कैसे दें? पैरेंट्स के लिए जरूरी गाइड, डॉ. चांदनी तुगनैत की सलाह
डॉ. चांदनी तुगनैत की सलाह- बचपन से सिखाएं बचत, बजट और पैसों की सही अहमियत
Children Money Management: आज के डिजिटल युग में बच्चों को पैसों की सही समझ देना बेहद जरूरी हो गया है। माता-पिता अक्सर सोचते हैं कि बच्चे अभी छोटे हैं, उन्हें पैसे के बारे में क्या बताना। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सही उम्र में पैसे की समझ देना उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने में मदद करता है। लाइफ अल्केमिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत के अनुसार, बच्चों को पैसे की अहमियत सिखाना फिजूलखर्ची रोकने और बचत की आदत डालने का सबसे अच्छा तरीका है। आइए जानते हैं कि बच्चों को पैसे की समझ कब और कैसे दी जाए ताकि वे भविष्य में आर्थिक रूप से सक्षम बन सकें।
बच्चे को पैसे के बारे में किस उम्र से समझाएं और रोजमर्रा की छोटी बातें
जैसे ही बच्चा गिनती सीखने लगे या बाजार में लेन-देन देखने लगे, उसी समय से पैसे की समझ देनी शुरू कर देनी चाहिए। डॉ. चांदनी तुगनैत कहती हैं कि यह कोई मुश्किल काम नहीं है और इसे रोजमर्रा की छोटी बातों से खेल-खेल में आसानी से सिखाया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले बच्चों को विभिन्न सिक्कों और नोटों की पहचान कराएं। बच्चे को स्पष्ट रूप से बताएं कि पैसा कहां से आता है और इसका व्यावहारिक इस्तेमाल किस तरह से करना चाहिए।
पारदर्शी (ट्रांसपेरेंट) गुल्लक से शुरुआत और जरूरत बनाम चाहत का अंतर
शुरुआती दौर में बच्चे को एक ट्रांसपेरेंट गुल्लक दें क्योंकि इससे वे अपनी बचत को भौतिक रूप से बढ़ता हुआ देख सकेंगे। उन्हें अच्छी तरह समझाएं कि गुल्लक में पैसे जमा करके ही वे भविष्य में अपनी पसंद का कोई बड़ा खिलौना खरीद पाएंगे। इसके साथ ही बच्चों को जरूरत और चाहत के बीच का बुनियादी अंतर बताएं। बाजार जाते समय उनसे स्पष्ट कहें कि आज हम सिर्फ अपनी जरूरत का सामान खरीदेंगे और अनावश्यक चीजों पर पैसे नहीं लगाएंगे।
नियमित पॉकेट मनी देना, जिम्मेदारी सिखाना और बजट प्रबंधन का पहला सबक
जब बच्चा 8 से 10 साल की उम्र में पहुंच जाए, तो उसे हफ्ते या महीने की एक छोटी और निश्चित पॉकेट मनी देना शुरू करें। उन्हें खुद यह तय करने दें कि वह पैसा कब और कहां खर्च करना चाहते हैं। अगर वे अपने सारे पैसे एक ही दिन में खर्च कर देते हैं, तो उन्हें दोबारा पैसे बिल्कुल न दें क्योंकि इससे उन्हें अपनी गलती का अहसास होगा और वे भविष्य में सोच-समझकर खर्च करना सीखेंगे।
पारिवारिक खरीदारी में बच्चों को शामिल करना और कीमतों की तुलना का महत्व
राशन या घर का कोई अन्य जरूरी सामान खरीदने जाते समय बच्चे को हमेशा अपने साथ ले जाएं। बड़े बच्चे को 500 रुपये देकर हफ्ते की सब्जियां लाने की जिम्मेदारी सौंपें। उन्हें बाजार में अलग-अलग दुकानों पर कीमतों की तुलना करना सिखाएं क्योंकि इससे उन्हें घरेलू बजट का वास्तविक गणित समझ आएगा और वे पैसों के मूल्य को बेहतर ढंग से जान पाएंगे।
डिजिटल दौर में पैसे की मेहनत समझाना, फोन पे का जादू और ‘ना’ कहने की सीख
बच्चों को व्यावहारिक रूप से बताएं कि एटीएम या फोन पे से निकलने वाला पैसा किसी जादू से नहीं आता है बल्कि यह माता-पिता की कड़ी मेहनत से कमाया जाता है। घर के छोटे-मोटे अतिरिक्त कामों के बदले उन्हें छोटा इनाम दें ताकि उन्हें मेहनत की अहमियत समझ आए। इसके अलावा बच्चे की हर जिद को कभी पूरा न करें। अगर कोई चीज आपके बजट से बाहर है, तो उन्हें प्यार से मना करें और उसका वास्तविक कारण बताएं क्योंकि यह सीख उन्हें आगे चलकर जिम्मेदार बनाएगी।
Children Money Management: स्कूल और कॉलेज लेवल पर फाइनेंशियल लिटरेसी तथा डिजिटल वॉलेट पर नियंत्रण
वर्तमान समय में स्कूल के पाठ्यक्रम में फाइनेंशियल लिटरेसी को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए ताकि बच्चों को बैंकिंग, बचत और निवेश की बेसिक समझ मिल सके। इसी तरह कॉलेज लेवल पर बजट प्लानिंग और टैक्स की बुनियादी जानकारी दी जानी जरूरी है। आज के समय में ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल वॉलेट के बढ़ते चलन से बचत करना मुश्किल हो गया है, इसलिए पैरेंट्स को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर पैनी निगरानी रखनी चाहिए और खुद पैसे का सही इस्तेमाल करके उनके सामने एक अच्छा उदाहरण पेश करना चाहिए।
निष्कर्ष: बच्चों को पैसे की सही समझ देना आज (Children Money Management) के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। डॉ. चांदनी तुगनैत की सलाह के अनुसार, इसकी शुरुआत जितनी छोटी उम्र से की जाएगी, यह बच्चों को जीवनभर के लिए उतना ही सशक्त और आत्मनिर्भर बनाएगा। सही उम्र में मिली यह वित्तीय सीख उन्हें भविष्य की आर्थिक चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार करेगी।
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