WhatsApp trading scam: व्हाट्सऐप फर्जी ट्रेडिंग ऐप और IPO स्कीम से 15.71 करोड़ की ठगी का खुलासा, दिल्ली पुलिस ने 4 राज्यों से 9 आरोपियों को पकड़ा, दुबई-कतर कनेक्शन की जांच

IPO स्कीम के नाम पर करोड़ों की ठगी, 4 राज्यों से 9 आरोपी गिरफ्तार

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WhatsApp trading scam: शेयर बाजार में निवेश के नाम पर घर बैठे मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर देश भर के निर्दोष नागरिकों को अपना शिकार बनाने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी सिंडिकेट का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। दिल्ली पुलिस की साइबर थाना साउथ-वेस्ट टीम ने त्वरित और रणनीतिक कार्रवाई करते हुए फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स और आरंभिक सार्वजनिक निर्गम अलॉटमेंट स्कीमों के जरिए 15.71 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के नौ मुख्य सदस्यों को दबोच लिया है।

यह गिरफ्तारी महाराष्ट्र, गुजरात, केरल और पंजाब में चलाए गए एक विशेष छापेमारी अभियान के तहत की गई है। डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों से पूछताछ की पड़ताल के दौरान इस साइबर नेटवर्क के तार संयुक्त अरब अमीरात (दुबई) और कतर से जुड़े होने की पुष्टि हुई है।

WhatsApp trading scam: पालम कॉलोनी निवासी पीड़ित की शिकायत से खुला फर्जीवाड़े का राज

इस विशाल साइबर अपराध का पर्दाफाश तब हुआ जब दिल्ली के पालम कॉलोनी निवासी एक पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित को शातिरों द्वारा एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया था, जहां खुद को शेयर बाजार का प्रख्यात विश्लेषक और निवेश विशेषज्ञ बताने वाले लोग फर्जी ज्ञान और टिप्स साझा करते थे।

ग्रुप में फर्जी ट्रेडिंग ऐप के लिंक दिए जाते थे, जहां भारी मुनाफे के नकली स्क्रीनशॉट और फर्जी निवेशकों की सफलता की कहानियां दिखाकर लोगों का विश्वास जीता जाता था। पीड़ित ने शुरुआती चरण में भरोसा करते हुए बताए गए विभिन्न बैंक खातों में 4.82 लाख रुपये जमा करा दिए। शातिरों ने जाल में फंसाने के लिए पीड़ित को शुरुआती दौर में मामूली मुनाफा निकालने की अनुमति दी, जिससे उसका विश्वास पूरी तरह पक्का हो गया। इसके बाद, नामी कंपनियों के आईपीओ अलॉटमेंट का फर्जी दावा करके पीड़ित से 7.81 लाख रुपये और जमा करा लिए गए। जब पीड़ित ने अपने कुल पैसे वापस निकालने की कोशिश की, तो उससे टैक्स और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर अतिरिक्त पैसों की मांग की जाने लगी, जिसके बाद पीड़ित को धोखाधड़ी का एहसास हुआ और पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।

महाराष्ट्र, गुजरात, केरल और पंजाब से दबोचे गए गिरोह के 9 मोहरे

साइबर पुलिस ने जब ठगी के पैसों का डिजिटल ट्रेल और बैंक खातों की गहन जांच शुरू की, तो जांच टीम सीधे अलग-अलग राज्यों में सक्रिय एजेंटों तक पहुंची। सबसे पहले महाराष्ट्र के नंदुरबार से शोएब दिलावर सैयद को गिरफ्तार किया गया। उसके मोबाइल से ‘ब्रदरहुड’ नाम के एक गुप्त व्हाट्सऐप ग्रुप का पता चला, जिसका उपयोग अवैध बैंक खातों और ओटीपी साझा करने के लिए किया जाता था।

इसके बाद पुलिस ने गुजरात के सूरत क्षेत्र से चार आरोपियों—शेख रियाजुद्दीन इम्तियाज, कमालशा कादरशाह, सिद्दीकी महमदसिद्दीक मुफीदभाई और हमजा हुमायू—को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये लोग पैसों के लालच में फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर गिरोह को उपलब्ध कराते थे। केरल से मुजम्मिल थैब और जमालुद्दीन फैसल को गिरफ्तार किया गया, जो खाताधारकों के ठहरने की व्यवस्था करने, फर्जी फर्में पंजीकृत कराने और ओटीपी प्रबंधित करने का जिम्मा संभालते थे। वहीं, पैसों के अंतिम लेन-देन और रकम की हेराफेरी में शामिल होने के आरोप में पंजाब से सरबजीत सिंह और सोनिया शर्मा को दबोचा गया।

दुबई और कतर से संचालित हो रहा था नेटवर्क, हवाला के जरिए पैसे भेजने का शक

पकड़े गए आरोपियों के डिजिटल उपकरणों की पड़ताल के दौरान पुलिस को विदेशी कनेक्शन के पुख्ता सबूत मिले हैं। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड ‘सम’ उर्फ समीर नाम का व्यक्ति है, जो दुबई में बैठकर पूरे साइबर नेटवर्क और पैसों के लेन-देन को नियंत्रित कर रहा था।

इसके अलावा, केरल से गिरफ्तार जमालुद्दीन फैसल के कतर में प्रवास के दौरान विदेशी साइबर अपराधियों के संपर्क में आने के प्रमाण भी मिले हैं। पुलिस को आशंका है कि भारत में आम लोगों से ठगी गई करोड़ों रुपये की राशि को विभिन्न शेल कंपनियों के करंट खातों के माध्यम से घुमाकर क्रिप्टोकरेंसी या हवाला नेटवर्क के जरिए देश से बाहर भेजा जा रहा था। पुलिस अब इस सिंडिकेट में शामिल अन्य विदेशी हैंडलोर्स और बैंक अधिकारियों की साठगांठ की भी जांच कर रही है।

व्हाट्सऐप ग्रुप्स से लेकर फर्जी ऐप तक: समझें साइबर ठगों का मॉडस ऑपरेंडी

जांच अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर ‘इन्वेस्टमेंट गुरु’ नाम से विज्ञापन चलाकर लोगों को अपने ग्रुप्स में जोड़ता था। इसके बाद पीड़ित को एक विशेष ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराया जाता था, जो पूरी तरह से फर्जी और डेवलपर्स द्वारा नियंत्रित होता था। पीड़ित को शुरुआत में छोटा निवेश कराकर ऐप के वॉलेट में नकली बड़ा मुनाफा दिखाया जाता था और थोड़ी रकम विड्रॉ करने दी जाती थी।

भरोसा बनने के बाद पीड़ित को किसी बड़ी कंपनी के आईपीओ में शत-प्रतिशत अलॉटमेंट की गारंटी देकर लाखों रुपये ऐंठे जाते थे। जब पीड़ित अपनी मूल राशि या मुनाफा निकालने का प्रयास करता, तो ऐप में तकनीकी खामी बताकर या मार्जिन मनी, ब्रोकरेज और फर्जी सेबी टैक्स के नाम पर और पैसे मांगे जाते थे। ठगी की रकम को कई करंट अकाउंट और फर्जी कंपनियों के खातों में घुमाकर आगे भेजा जाता था ताकि रकम के असली स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाए।

डिजिटल साक्ष्य बरामद, देश भर की 34 शिकायतों से जुड़े हैं तार

पुलिस टीम ने आरोपियों के पास से 8 हाई-एंड स्मार्टफोन, कई केवाईसी दस्तावेज, फर्जी कंपनियों के लेटरहेड, बैंक किट, डिजिटल सिग्नेचर और चेकबुक बरामद की हैं। शुरुआती फॉरेंसिक जांच में इस गिरोह के तार देश भर में दर्ज 34 विभिन्न साइबर अपराध शिकायतों से सीधे तौर पर जुड़े पाए गए हैं, जिनमें अकेले दिल्ली के 7 मामलों में लगभग 2.70 करोड़ रुपये का फ्रॉड शामिल है।

पुलिस अब मामले में शामिल कुछ संदिग्ध बैंक कर्मचारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और अन्य सहयोगियों की भूमिका की गहनता से पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि गिरफ्तारियों के इस दौर के बाद देश भर में दर्ज कई अन्य अनसुलझे साइबर अपराधों का भी राजफाश हो सकेगा।

WhatsApp trading scam: निवेश ठगी से बचने के लिए पुलिस की सलाह और बचाव के उपाय

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने नागरिकों को सतर्क करते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे व्हाट्सऐप या टेलीग्राम पर मिलने वाले किसी भी अनचाहे ‘स्टॉक मार्केट टिप्स’ या निवेश ग्रुप से तुरंत बाहर निकलें और किसी अनजान व्यक्ति की सलाह पर पैसे न लगाएं।

शेयर बाजार या आईपीओ में निवेश हमेशा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से पंजीकृत ब्रोकरेज फर्मों के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। सेबी पंजीकृत कोई भी संस्था किसी व्यक्ति के निजी बैंक खाते या किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के चालू खाते में पैसे जमा करने को नहीं कहती। यदि किसी नागरिक के साथ किसी भी प्रकार की वित्तीय ठगी होती है, तो उसे बिना समय गंवाए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या आधिकारिक पोर्टल पर तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

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