मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आई-पैक दफ्तर से निकाली रहस्यमयी फाइल, 2026 चुनाव से पहले छिड़ा बड़ा विवाद

ED की आई-पैक छापेमारी में ममता बनर्जी ने खुद हस्तक्षेप कर रहस्यमयी हरी फाइल ली

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West Bengal News: पश्चिम बंगाल में ‘ग्रीन फाइल’ को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बीच छिड़ी इस जंग ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव से महज तीन-चार महीने पहले यह विवाद तूल पकड़ रहा है।

आई-पैक दफ्तर पर ED की छापेमारी

ED ने तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के दफ्तर पर छापेमारी की। कोलकाता के लाउड स्ट्रीट स्थित आई-पैक के सह संस्थापक प्रतीक जैन के आवास और साल्टलेक स्थित 11वीं मंजिल के दफ्तर पर जांच एजेंसी की टीम ने छापा मारा। इस दौरान एक अभूतपूर्व घटना घटी जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ मौके पर पहुंच गईं।

West Bengal News: ममता बनर्जी का हस्तक्षेप और रहस्यमयी फाइल

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छह घंटे तक चले इस ड्रामे में ममता बनर्जी ने ED की जांच में हस्तक्षेप किया। उन्होंने वहां से एक लैपटॉप और एक हरे रंग की फाइल अपने साथ ली। इस ‘ग्रीन फाइल’ को लेकर अब पूरे देश में चर्चा हो रही है। विपक्ष का आरोप है कि इस फाइल में अहम दस्तावेज थे जिन्हें मुख्यमंत्री ने छुपाने की कोशिश की।

भारतीय राजनीति के इतिहास में यह शायद पहली बार हुआ है जब किसी राज्य की मुख्यमंत्री ने ED की छापेमारी के दौरान खुद मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया हो। यह घटना किसी थ्रिलर फिल्म के दृश्य जैसी थी।

कोयला तस्करी का पैसा आई-पैक तक पहुंचा

ED का आरोप है कि कोयला तस्करी में कमाए गए 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए आई-पैक तक पहुंचाए गए। यह पैसा 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव में खर्च किया गया था। जांच एजेंसी ने कहा कि राज्य मशीनरी ने उन्हें जांच करने से रोका और सबूतों को नष्ट किया गया।

ED ने कलकत्ता हाई कोर्ट की सुनवाई का इंतजार किए बिना संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। जांच एजेंसी ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्हें अपना काम करने से रोका गया।

West Bengal News: ममता बनर्जी ने लगाया चुनावी रणनीति चुराने का आरोप

ममता बनर्जी ने ED की कार्रवाई को भाजपा की साजिश बताया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार ED के कंधे पर बंदूक रखकर तृणमूल की 2026 की चुनावी योजना चुराना चाहती है। उन्होंने इसे अपनी पार्टी की गोपनीयता पर हमला करार दिया है।

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कोलकाता की सड़कों पर पैदल मार्च निकाला। साथ ही, दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने गृह मंत्रालय के सामने प्रदर्शन किया। ममता बनर्जी ने खुद को केंद्र के अत्याचार के खिलाफ लड़ने वाली योद्धा के रूप में पेश किया है।

भाजपा का जवाबी हमला, कानून तोड़ने का आरोप

भाजपा ने ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि ममता बनर्जी ने एक निजी कंसल्टेंसी फर्म के लिए कानून को हाथ में लिया और सबूतों को नष्ट किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने बंगाल को भारत के कानूनों से बाहर कर दिया है।

भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह 2026 के चुनाव में भ्रष्टाचार और अराजकता को अपना मुख्य मुद्दा बनाएगी। पार्टी ने ममता बनर्जी के बजाय उनकी सरकार के भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक विफलता को निशाना बनाने की रणनीति बनाई है।

West Bengal News: पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया

बंगाल सरकार ने पलटवार करते हुए कोलकाता और विधाननगर पुलिस को ED अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया। ममता बनर्जी की शिकायत पर पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ ‘डाटा चोरी’ की FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर अपना पक्ष सुने जाने की मांग की है। यह पूरा मामला अब एक संवैधानिक गतिरोध में बदल गया है, जहां एक तरफ केंद्रीय जांच एजेंसी है और दूसरी तरफ राज्य की पूरी पुलिस व्यवस्था।

माकपा भी ममता के खिलाफ, भाजपा से मिला सुर

दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में माकपा और भाजपा एक सुर में बोल रहे हैं। माकपा प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने सवाल उठाया कि एक निजी कंपनी के लिए मुख्यमंत्री को सड़क पर उतरने की क्या जरूरत थी।

माकपा ने भी ममता बनर्जी के कदम को संदिग्ध बताया है। धुर विरोधी दल एक साथ आकर मुख्यमंत्री पर सवाल उठा रहे हैं, जो राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ है।

West Bengal News: बंगाल का राजनीतिक इतिहास

बंगाल में चुनाव से ठीक पहले हमेशा कोई न कोई बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ है। साल 2016 में नारद स्टिंग ऑपरेशन था। 2021 के चुनाव से पहले कोयला और मवेशी तस्करी के मामले चर्चा में थे। अब 2026 के चुनाव से पहले आई-पैक प्रकरण सामने आया है।

लेकिन इस बार का मामला पहले के सभी विवादों से अधिक गंभीर और अभूतपूर्व है। मुख्यमंत्री का खुद ED की छापेमारी में हस्तक्षेप करना अपने आप में एक बड़ी घटना है।

2026 चुनाव पर क्या होगा असर?

सियासी जानकारों का मानना है कि इस विवाद का 2026 के विधानसभा चुनाव पर गहरा असर होगा। अगर ममता बनर्जी यह साबित करने में सफल रहीं कि यह छापेमारी तृणमूल को हराने की साजिश थी, तो उन्हें चुनाव में फायदा हो सकता है।

दूसरी तरफ, अगर भाजपा और वामपंथी दल यह साबित करने में सफल रहे कि ‘ग्रीन फाइल’ में भ्रष्टाचार के राज छुपे थे, तो ममता के लिए 2026 की राह कठिन हो सकती है।

West Bengal News: कोर्ट का फैसला तय करेगा दिशा

फिलहाल, यह पूरा मामला अदालत में है। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस विवाद की दिशा तय करेगा। आई-पैक की डिजिटल फाइलों से निकलने वाले तथ्य भी इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभाएंगे।

कोलकाता से लेकर दिल्ली तक ‘दीदी बनाम ED’ की जंग छिड़ी हुई है। यह टकराव केवल बंगाल की राजनीति को ही नहीं बल्कि केंद्र-राज्य संबंधों को भी प्रभावित कर रहा है। बंगाल की सड़कों से लेकर अदालत की दहलीज तक पहुंचा यह विवाद अभी थमने वाला नहीं है। ‘ग्रीन फाइल’ का रहस्य अभी बरकरार है और इसका खुलासा बंगाल की राजनीति की दिशा बदल सकता है।

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