Aaj Ka Mausam 25 June 2026: दिल्ली-एनसीआर में उमस भरी गर्मी के बीच मानसून की दस्तक, यूपी-बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
दिल्ली-एनसीआर में उमस भरी गर्मी के बीच मानसून की दस्तक, यूपी-बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
Aaj Ka Mausam 25 June 2026: उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप झेल रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, देश के मौसम तंत्र में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है। वहीं दूसरी तरफ, दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ते हुए मध्य और पूर्वी भारत को अपनी आगोश में ले रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जून के इस अंतिम सप्ताह में उत्तर भारत के राज्यों को चिलचिलाती धूप से राहत मिल जाएगी, हालांकि वायुमंडल में नमी बढ़ने के कारण लोगों को उमस का सामना करना पड़ सकता है।
देश की राजधानी दिल्ली और उसके आस-पास के सैटेलाइट शहरों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में पिछले कुछ दिनों से तापमान में उतार-चढ़ाव जारी है। बुधवार को भी दिल्ली के कई इलाकों में तेज धूप के साथ उमस का स्तर काफी ऊंचा दर्ज किया गया, जिससे राहगीरों और कामकाजी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग ने आने वाले चौबीस घंटों के लिए दिल्ली-एनसीआर में ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को अचानक बदलने वाले मौसम और तेज धूल भरी हवाओं के प्रति सचेत करना है।
दिल्ली-एनसीआर का मौसम: बादलों की आवाजाही और उमस भरी गर्मी का डबल अटैक
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के निवासियों के लिए आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं। मौसम विभाग के क्षेत्रीय केंद्र के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में आसमान में आंशिक रूप से घने बादल छाए रहेंगे, जो सूर्य की सीधी किरणों को धरती तक पहुंचने से रोकेंगे। इसके परिणामस्वरूप अधिकतम तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की जा सकती है और यह 41 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच सिमट सकता है। हालांकि, तापमान में इस कमी के बावजूद लोगों को गर्मी से पूरी राहत नहीं मिलेगी क्योंकि इस दौरान हवा में आर्द्रता यानी नमी का स्तर 50 से 70 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। जब हवा में नमी अधिक होती है, तो शरीर का पसीना आसानी से नहीं सूखता, जिससे आम जनमानस को अत्यधिक असहजता और चिपचिपी गर्मी का अहसास होता है।
राजधानी के विभिन्न हिस्सों में शाम के समय हल्की हवाएं चलने और कुछ पॉकेट्स में तेज गरज के साथ बौछारें पड़ने की प्रबल संभावना जताई गई है। नोएडा और गाजियाबाद के शहरी इलाकों में स्थानीय स्तर पर बादलों के विकसित होने से धूल भरी आंधी भी चल सकती है, जिसकी गति 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में भी कंक्रीट के अत्यधिक निर्माण के कारण ‘हीट आइलैंड इफेक्ट’ देखा जा रहा है, जिससे रात का न्यूनतम तापमान भी 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति मानसून के आगमन से ठीक पहले की पारंपरिक मौसमी गतिविधि है, जिसे ‘प्री-मानसून शावर्स’ कहा जाता है।
मौसम में हो रहे इस बदलाव के बीच दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता (AQI) में थोड़ा सुधार देखा गया है। तेज हवाओं के चलने से हवा में मौजूद धूल के कण बिखर गए हैं, जिससे दृश्यता में सुधार हुआ है। हालांकि, धूल भरी आंधी के समय अस्थमा और सांस के रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
उत्तर प्रदेश का मौसम पूर्वानुमान: पश्चिमी जिलों में बूंदाबांदी और पूर्वी अंचल में मानसून की सक्रियता
भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में इस समय मौसम के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों जैसे मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में दिल्ली के मौसमी प्रभाव के कारण बादलों की आवाजाही शुरू हो चुकी है और स्थानीय स्तर पर गरज-चमक की परिस्थितियां बन रही हैं। इसके विपरीत, पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में मानसून की बयार ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों में सुबह से ही आसमान का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है। इन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 38 से 41 डिग्री सेल्सियस के दायरे में रहने की संभावना है, जो कि सामान्य से थोड़ा ही अधिक है।
मौसम विभाग के लखनऊ केंद्र के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से उठाने वाली नम हवाएं उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों में प्रवेश कर चुकी हैं। इसके कारण वाराणसी और गोरखपुर मंडल में कई स्थानों पर मध्यम दर्जे की वर्षा दर्ज की गई है। राजधानी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर में भी उमस का स्तर बढ़ने से दिन के समय लोग घरों में ही रहने को मजबूर हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून की इस सक्रियता से आने वाले दो से तीन दिनों में पूरे राज्य में वर्षा का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने तराई के इलाकों में बिजली गिरने (वज्रपात) की आशंका व्यक्त करते हुए ग्रामीणों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे शरण न लें।
राजस्थान और हरियाणा में मौसम का मिजाज: धूल भरी आंधी का संकट और तापमान का गणित
मरुस्थलीय राज्य राजस्थान में सूर्य देव का तेवर अभी भी काफी तल्ख बना हुआ है। जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर और उदयपुर जैसे पश्चिमी व मध्य जिलों में अधिकतम तापमान अभी भी 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच झूल रहा है। राजस्थान के थार मरुस्थल क्षेत्र से उठने वाली गर्म हवाएं (लू) राज्य के बाकी हिस्सों को झुलसा रही हैं। हालांकि, मौसम केंद्र जयपुर के मुताबिक, आगामी चौबीस घंटों में राज्य के पूर्वी हिस्सों जैसे अलवर, भरतपुर और धौलपुर में मौसम करवट ले सकता है। इन जिलों में तेज रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने की आशंका है, जिसकी गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। आंधी के बाद कुछ स्थानों पर हल्की फुहारें पड़ने से तापमान में अचानक तीन से चार डिग्री की गिरावट आ सकती है, जिससे निवासियों को क्षणिक राहत मिलेगी।
दूसरी ओर, पंजाब से सटे हरियाणा राज्य के मौसम में भी व्यापक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। चंडीगढ़, अंबाला, कुरुक्षेत्र, हिसार और रोहतक में सुबह से ही बादलों के टुकड़े आसमान में तैरते दिखाई दे रहे हैं। हरियाणा के कृषि प्रधान क्षेत्रों में इस समय धान की रोपाई की तैयारियां चल रही हैं, ऐसे में बादलों के छाने और हल्की बारिश की संभावना ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि हरियाणा के उत्तरी जिलों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ेंगी, जिससे दिन के तापमान में कमी आएगी।
मध्य और पूर्वी भारत में मानसून का तांडव: मध्य प्रदेश से लेकर बिहार तक भारी बारिश का अलर्ट
जहां उत्तर भारत मानसून की प्रतीक्षा कर रहा है, वहीं मध्य भारत और पूर्वी राज्यों में मानसून पूरी तरह से मेहरबान हो चुका है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता चरम पर पहुंच गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने इन राज्यों के लिए अगले अड़तालीस घंटों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। बिहार के पटना, गया, पूर्णिया और भागलपुर जैसे जिलों में मूसलाधार बारिश के कारण स्थानीय नदियां उफान पर हैं। मौसम विभाग का कहना है कि नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार वर्षा और बिहार के मैदानी इलाकों में सक्रिय मानसूनी ट्रफ के कारण उत्तर बिहार के जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर संभागों में भी झमाझम बारिश का दौर शुरू हो चुका है। छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा क्षेत्रों में भारी वर्षा के चलते कई नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालयों से टूट गया है। झारखंड के रांची, जमशेदपुर और धनबाद में भी बादलों ने डेरा डाल रखा है और रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश से जलभराव की स्थिति बन गई है। ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में भी समुद्र में ऊंची लहरें उठने और तटीय जिलों में तेज आंधी के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
बदलते मौसम का स्वास्थ्य पर प्रभाव: हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए डॉक्टरों की विशेष गाइडलाइन
गर्मी और अत्यधिक आर्द्रता (उमस) का यह खतरनाक मिश्रण मानव शरीर के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। देश के प्रमुख अस्पतालों के डॉक्टरों का कहना है कि जब तापमान 40 डिग्री से ऊपर हो और आर्द्रता 60 प्रतिशत को पार कर जाए, तो शरीर की प्राकृतिक शीतलन प्रणाली यानी पसीना सूखने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है। इससे शरीर का आंतरिक तापमान तेजी से बढ़ता है, जिसे चिकित्सा विज्ञान में ‘हीट स्ट्रोक’ या सनस्ट्रोक कहा जाता है। इन दिनों ओपीडी में डिहाइड्रेशन, उल्टी, दस्त, पेट में ऐंठन और त्वचा पर चकत्ते (घमौरियां) होने वाले मरीजों की संख्या में अचानक तीस प्रतिशत का इजाफा देखा गया है।
वरिष्ठ चिकित्सकों ने आम जनता को सलाह दी है कि वे दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब सूरज की किरणें सबसे तीखी होती हैं, अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। यदि बाहर जाना बहुत जरूरी हो, तो सिर को सूती कपड़े या छतरी से ढककर रखें। शरीर में पानी की कमी न होने देने के लिए दिनभर में कम से कम 4 से 5 लीटर पानी का सेवन करें। सादे पानी के अलावा नींबू पानी, ओआरएस (ORS) का घोल, नारियल पानी और ताजे फलों के रस का सेवन इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में बेहद मददगार साबित होता है। छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और साठ वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को इस उमस भरे मौसम में विशेष रूप से वातानुकूलित या ठंडी जगहों पर रहने की सलाह दी गई है।
इस मौसम में बैक्टीरिया और वायरस बहुत तेजी से पनपते हैं, जिससे भोजन जल्दी दूषित हो जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, बासी भोजन खाने से बचें और बाहर के खुले में बिकने वाले चाट-पकौड़े या कटे हुए फलों का सेवन बिल्कुल न करें, क्योंकि इससे फूड पॉइजनिंग और टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
कृषि और पर्यावरण पर मौसमी बदलाव का असर: खरीफ फसलों के लिए वरदान या अभिशाप?
भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाली कृषि पूरी तरह से मानसून की बारिश पर निर्भर करती है। देश के कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जून के अंत में होने वाली यह मानसूनी बारिश खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन, कपास और अरहर की बुआई के लिए एक आदर्श समय लेकर आई है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसानों ने सोयाबीन और कपास की बुआई का काम तेजी से शुरू कर दिया है, क्योंकि मिट्टी में पर्याप्त नमी आ चुकी है। वहीं, उत्तर प्रदेश और पंजाब-हरियाणा के किसान धान की पनीरी (नर्सरी) तैयार करने के बाद अब मुख्य खेतों में रोपाई की योजना बना रहे हैं।
हालांकि, मौसम विशेषज्ञों ने कृषि क्षेत्र के लिए एक चेतावनी भी जारी की है। जिन इलाकों में अचानक भारी बारिश हो रही है, वहां खेतों में जलभराव का खतरा पैदा हो गया है। अत्यधिक पानी जमा होने से धान के छोटे पौधे गल सकते हैं और मिट्टी के पोषक तत्व बह सकते हैं। इसके अलावा, हवा में नमी का स्तर बढ़ने से फसलों में कीटों और फंगस जनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें और मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर ही कीटनाशकों या उर्वरकों का छिड़काव करें।
निष्कर्ष: प्रकृति के इस संक्रमण काल में सतर्कता और सजगता ही सबसे बड़ा बचाव है
जून 2026 (Aaj Ka Mausam 25 June 2026) का यह समय भारतीय उपमहाद्वीप के लिए एक बड़े मौसमी बदलाव यानी संक्रमण काल का गवाह बन रहा है। एक तरफ जहां सदियों पुरानी गर्मी की तपिश अपने चरम पर पहुंचकर विदा होने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जीवनदायिनी मानसूनी बूंदें धरती की प्यास बुझाने के लिए बेताब हैं। इस बदलते परिवेश में प्रकृति हमें राहत तो दे रही है, लेकिन साथ ही अपने रौद्र रूप के प्रति सचेत रहने की चेतावनी भी दे रही है। चाहे वह उमस से पैदा होने वाली बीमारियां हों, आकाशीय बिजली का खतरा हो, या फिर पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन का जोखिम—हर कदम पर सावधानी जरूरी है।
सभी नागरिकों से विशेष अपील है कि वे राष्ट्रीय और स्थानीय मौसम विज्ञान केंद्रों द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली आधिकारिक चेतावनियों और बुलेटिनों को नजरअंदाज न करें। दैनिक दिनचर्या की योजना बनाने से पहले मौसम के मिजाज को समझें, जल संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और पेड़ लगाकर इस धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान दें। प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर ही हम इस मानसून सीजन का सुरक्षित और आनंदमय लाभ उठा सकते हैं।
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