Vastu Tips For Mandir at Home,- घर के मंदिर में की ये गलतियां तो भुगतना होगा वास्तु दोष! जानें सही दिशा, दीपक नियम और पूजा के जरूरी वास्तु टिप्स

मंदिर उत्तर-पूर्व में, पूर्व मुख पूजा, दीपक अग्नि कोण में, पितरों की फोटो न रखें, साफ-सफाई जरूरी

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Vastu Tips: सनातन धर्म में घर के मंदिर का विशेष स्थान और महत्व होता है। घर का मंदिर केवल एक कोना नहीं बल्कि वह स्थान है जहां से पूरे परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर घर के मंदिर की स्थापना और उसकी व्यवस्था सही दिशा और नियमों के अनुसार न हो तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता और घर में वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है।

Vastu Tips: मंदिर के लिए सबसे शुभ दिशा कौन सी है

वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बेहद महत्वपूर्ण स्थान है और घर के मंदिर की दिशा इसमें सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। वास्तु के अनुसार घर का मंदिर उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करना सबसे शुभ माना जाता है। इस दिशा को ईशान कोण भी कहते हैं और यह दिशा देवी-देवताओं के वास के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। ईशान कोण में स्थापित मंदिर से घर में दैवीय ऊर्जा का निरंतर प्रवाह होता है। इसके विपरीत दक्षिण दिशा में मंदिर रखना अशुभ माना जाता है। दक्षिण दिशा यम यानी मृत्यु के देवता की दिशा है इसलिए इस दिशा में मंदिर स्थापित करने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो सकता है।

Vastu Tips: पूजा करते समय किस दिशा में रखें मुख

वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए। पूर्व दिशा सूर्योदय की दिशा है और इसे ऊर्जा, जीवन शक्ति और देवत्व का प्रतीक माना जाता है। पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पूजा करने से व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती है और देवी-देवताओं से सीधा संबंध स्थापित होता है। पूजा करते समय उत्तर दिशा की ओर मुख रखना भी वास्तु में स्वीकार्य माना जाता है क्योंकि उत्तर दिशा को कुबेर और लक्ष्मी की दिशा माना जाता है। लेकिन दक्षिण और पश्चिम दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से बचना चाहिए।

Vastu Tips: मंदिर में साफ-सफाई है सबसे जरूरी

धार्मिक मान्यता और वास्तु शास्त्र दोनों इस बात पर एकमत हैं कि मां लक्ष्मी का वास हमेशा साफ-सुथरी और स्वच्छ जगह पर होता है। इसलिए घर के मंदिर में नियमित साफ-सफाई अत्यंत आवश्यक है। मंदिर में बासी फूल, सूखी मालाएं और पुराने प्रसाद को तुरंत हटा देना चाहिए। इन्हें घर के कूड़े में न फेंककर किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें। प्रतिदिन मंदिर को साफ करें और देवी-देवताओं की मूर्तियों को भी नियमित रूप से पोंछकर साफ रखें। गंदे या अस्त-व्यस्त मंदिर से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और लक्ष्मी का वास समाप्त हो जाता है।

Vastu Tips: दीपक रखने का सही नियम और स्थान

दीपक जलाना पूजा का एक अभिन्न अंग है लेकिन दीपक को सही जगह पर रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वास्तु शास्त्र के अनुसार मंदिर में दीपक को सदैव भगवान की प्रतिमा के सामने रखना चाहिए। दीपक रखने के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा यानी अग्नि कोण को सबसे शुभ माना जाता है। दीपक की लौ हमेशा ऊपर की तरफ जलनी चाहिए और यह बुझनी नहीं चाहिए। घी का दीपक सबसे शुभ माना जाता है। सरसों के तेल का दीपक भी शुभ फल देता है। पूजा के समय दीपक की लौ यदि स्वतः बुझ जाए तो इसे अशुभ संकेत माना जाता है। इसके अलावा मंदिर में कलश को भगवान के दाहिने हाथ की तरफ रखना चाहिए।

Vastu Tips: मंदिर में पितरों की तस्वीर रखना है वास्तु दोष

यह एक बेहद सामान्य गलती है जो अधिकांश घरों में देखने को मिलती है। बहुत से लोग अपने दिवंगत परिजनों यानी पितरों की तस्वीर को मंदिर में रख देते हैं। यह वास्तु शास्त्र की दृष्टि से एक बड़ी भूल है। मंदिर देवी-देवताओं का स्थान है जबकि पितरों की तस्वीर दक्षिण दिशा में लगाई जानी चाहिए। दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है। मंदिर में पितरों की तस्वीर रखने से देवी-देवताओं और पितरों की ऊर्जाएं एक स्थान पर मिल जाती हैं जो वास्तु दोष उत्पन्न करती है और इससे पूजा का पूर्ण फल भी नहीं मिलता।

Vastu Tips: इस तरह की तस्वीरें मंदिर में कभी न रखें

घर के मंदिर में देवी-देवताओं के उग्र रूप की तस्वीरें या प्रतिमाएं नहीं रखनी चाहिए। जैसे भगवान शिव को तांडव करते हुए दिखाने वाली तस्वीर या हनुमान जी को युद्ध करते हुए दिखाने वाली प्रतिमा घर के मंदिर के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती। घर के मंदिर में सौम्य और शांत रूपों की प्रतिमाएं और तस्वीरें रखें। जैसे बाल गोपाल, माता लक्ष्मी, गणेश जी, राधा-कृष्ण और शांत रूप में भगवान शिव की तस्वीरें घर के मंदिर के लिए शुभ मानी जाती हैं। खंडित मूर्तियां भी मंदिर में नहीं रखनी चाहिए।

Vastu Tips: मंदिर का आकार और ऊंचाई भी है महत्वपूर्ण

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मंदिर की ऊंचाई इस प्रकार होनी चाहिए कि पूजा करते समय भगवान की मूर्ति की आंखें आपकी आंखों के सामने या थोड़ी ऊपर हों। बहुत ऊंचे मंदिर में पूजा करते समय गर्दन ऊपर करनी पड़ती है जो ध्यान भटकाती है। मंदिर में एक साथ बहुत अधिक मूर्तियां रखने से भी बचना चाहिए। मंदिर में केवल उन्हीं देवी-देवताओं की प्रतिमाएं रखें जिनकी आप नियमित पूजा करते हों।

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