Varuthini Ekadashi 2026: 13 अप्रैल को है वरुथिनी एकादशी, व्रत के दौरान भूलकर भी न करें इन 5 चीजों का सेवन; जानें शुभ मुहूर्त और पारण का समय

13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी व्रत, जानें वर्जित चीजें, पूजा मुहूर्त, फलाहार और भगवान विष्णु की कृपा पाने के उपाय

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Varuthini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है। इस साल वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। इस व्रत को रखने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। वरुथिनी एकादशी का व्रत बहुत फलदायी माना जाता है। इस दिन कुछ खास चीजों का सेवन वर्जित होता है। अगर गलती से भी इनका सेवन कर लिया तो व्रत खंडित हो सकता है।

तिथि और व्रत पारण का शुभ समय

एकादशी तिथि 13 अप्रैल 2026 की रात 1:16 बजे शुरू होगी और 14 अप्रैल 2026 की रात 1:08 बजे समाप्त होगी। व्रत पारण का समय 14 अप्रैल सुबह 6:54 बजे से 8:53 बजे तक रहेगा। पूजा के लिए शाम का गोधूलि मुहूर्त और अमृत काल सबसे उत्तम माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और पूजा शुरू करना अत्यंत शुभ होता है।

सावधान! व्रत में वर्जित हैं ये 5 चीजें

वरुथिनी एकादशी के दिन व्रत की पवित्रता बनाए रखने के लिए कुछ चीजों का सेवन पूरी तरह वर्जित है। इनका सेवन करने से व्रत खंडित हो सकता है:

  1. चावल: एकादशी के दिन चावल को अशुद्ध माना जाता है, इसलिए इससे बनी कोई भी चीज़ न खाएं।

  2. मसूर की दाल: यह तामसिक गुणों को बढ़ाती है, अतः इसका सेवन वर्जित है।

  3. नमक: एकादशी पर सामान्य नमक का सेवन व्रत तोड़ सकता है। संभव हो तो बिना नमक का व्रत रखें।

  4. लहसुन और प्याज: ये तामसिक भोजन की श्रेणी में आते हैं और पूजा के दिन इनसे दूर रहना चाहिए।

  5. विशिष्ट सब्जियां: पत्तेदार साग, गोभी, गाजर, मूली और बैंगन का सेवन इस दिन वर्जित होता है।

फलाहार: व्रत के दौरान क्या खाएं?

वरुथिनी एकादशी पर फलाहार रखना चाहिए। आप दूध और दूध से बनी चीजें जैसे दही, छाछ और मक्खन ले सकते हैं। विभिन्न प्रकार के फल जैसे केला, सेब, अंगूर, आम और खरबूजा खा सकते हैं। साबूदाना, मखाना, मूंगफली और सूखे मेवे भी फलाहार में शामिल किए जा सकते हैं। साबूदाना की खीर या उपमा और बिना नमक के आलू की सब्जी ली जा सकती है। इन चीजों से व्रत की पवित्रता बनी रहती है और शरीर को ऊर्जा भी मिलती है।

भगवान विष्णु की पूजन विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा घर में भगवान विष्णु या श्री हरि की प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल से शुद्धिकरण करें। फल, दूध, मखाना और पीली मिठाई का भोग लगाएं। मुख्य मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें। विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। शाम को आरती करें और व्रत का संकल्प लें। अगले दिन पारण के समय दान दें और ब्राह्मण को भोजन कराएं।

वरुथिनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। संतान सुख और स्वास्थ्य लाभ होता है। धन-धान्य और समृद्धि आती है। विष्णु भक्ति बढ़ती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनकी कुंडली में विष्णु संबंधी दोष या राहु-केतु की समस्या है। एकादशी व्रत पाचन तंत्र को आराम देता है और शरीर को डिटॉक्स करता है।

विद्वानों और ज्योतिषियों का मत

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वरुथिनी एकादशी का व्रत बहुत पुण्यकारी है। ज्योतिषी कहते हैं कि इस एकादशी पर विष्णु पूजा करने से पिछले जन्मों के पापों का नाश होता है। चावल, नमक और तामसिक चीजों से परहेज रखना व्रत की शुद्धता के लिए अनिवार्य है। आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि एकादशी का उपवास शरीर को अंदर से साफ करने और मानसिक शांति प्राप्त करने का बेहतरीन जरिया है।

Varuthini Ekadashi 2026: भक्ति और शुद्धि का पावन पर्व

वरुथिनी एकादशी 2026 भगवान विष्णु की आराधना और आत्म-शुद्धि का श्रेष्ठ अवसर है। इस दिन खान-पान के नियमों का पालन करते हुए सच्ची श्रद्धा से व्रत रखें। फलाहार, दान और मंत्र जाप से न केवल पुण्य मिलता है, बल्कि सुख-शांति की भी प्राप्ति होती है। आप सभी को वरुथिनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं।

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