Vaishakh Masik Shivratri Vrat: भोलेनाथ को प्रसन्न करने का महापर्व, जानें 15 या 16 अप्रैल किस दिन रखा जाएगा व्रत, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
वैशाख मासिक शिवरात्रि 15 अप्रैल को, जानें सही तिथि, निशिता मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत का धार्मिक महत्व
Vaishakh Masik Shivratri Vrat: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है और इससे भक्तों के सभी दुख दूर होते हैं। वैशाख माह में यह व्रत विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस महीने में की गई पूजा से शिवजी की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
मासिक शिवरात्रि व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महिलाएं सौभाग्य की कामना करती हैं जबकि पुरुष जीवन के कष्टों से मुक्ति पाने के लिए इस व्रत को रखते हैं।
तिथि और समय: वैशाख चतुर्दशी का आरंभ और समापन कब?
पंचांग के अनुसार वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 अप्रैल 2026 को रात 10 बजकर 31 मिनट पर होगा। यह तिथि 16 अप्रैल 2026 को रात 8 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी।
इसलिए वैशाख मासिक शिवरात्रि का व्रत 15 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा। व्रत का पारण 16 अप्रैल को चतुर्दशी तिथि समाप्त होने के बाद किया जाएगा।
निशिता काल में पूजा करने का विशेष महत्व है क्योंकि इस समय शिवजी की पूजा से अधिक फल प्राप्त होता है।
शुभ मुहूर्त की जानकारी: निशिता काल और ब्रह्म मुहूर्त का समय
मासिक शिवरात्रि के दिन पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 50 मिनट से सुबह 5 बजकर 36 मिनट तक रहेगा।
गोधूलि मुहूर्त सुबह 6 बजकर 55 मिनट से 7 बजकर 18 मिनट तक होगा। अमृत काल सुबह 7 बजकर 37 मिनट से रात 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगा।
निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 15 मिनट से देर रात 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। निशिता काल को मासिक शिवरात्रि पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
व्रत महिमा: शिव-शक्ति की कृपा से मिलता है अखंड सौभाग्य
मासिक शिवरात्रि व्रत शिव और पार्वती दोनों को प्रसन्न करने का उत्तम माध्यम है। इस व्रत से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है। कुंवारी कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी मिलने के योग बनते हैं और शीघ्र विवाह की संभावना बढ़ती है।
इस व्रत से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों को स्वास्थ्य धन और सुख की प्राप्ति होती है।
पूजा पद्धति: शिवलिंग का अभिषेक और मंत्र जाप की सही विधि
व्रत रखने वाले व्यक्ति को पूरे दिन उपवास रखना चाहिए। शाम को सूर्यास्त के बाद शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए।
पूजा में बेलपत्र दूध घी शहद और गंगाजल चढ़ाया जाता है। शिव चालीसा और शिव मंत्रों का जाप करना चाहिए।
रात में निशिता काल में विशेष पूजा करनी चाहिए। अगले दिन सुबह पारण करते समय व्रत खोला जाता है।
विद्वानों का मत: वैशाख माह में शिव भक्ति का फल
धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार मासिक शिवरात्रि व्रत से मन शांत होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
पंडितों का कहना है कि वैशाख माह में यह व्रत करने से फल कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि यह महीना शिव भक्ति के लिए विशेष माना जाता है।
इस व्रत को नियमित रूप से रखने से जीवन में स्थिरता और सुख आता है।
तैयारी और सावधानी: व्रत से जुड़ी कुछ जरूरी बातें
व्रत रखने से पहले अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। यदि कोई बीमारी हो तो डॉक्टर से सलाह लें। पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें ताकि समय पर पूजा की जा सके।
परिवार के साथ मिलकर पूजा करें ताकि वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।
Vaishakh Masik Shivratri Vrat: निष्कर्ष
वैशाख माह की मासिक शिवरात्रि 15 अप्रैल 2026 को रखी जाएगी। इस व्रत और पूजा से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। निशिता काल में पूजा करने से अधिक फल मिलता है। भक्तों को चाहिए कि वे विधिपूर्वक व्रत रखें और शिव भक्ति करें। यह व्रत जीवन में सुख शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
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