गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक, मां गंगा के शीतकालीन निवास मुखबा में भी लागू होगा आदेश
गंगोत्री धाम और मुखबा में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक, श्री गंगोत्री मंदिर समिति का सर्वसम्मति फैसला; बद्री-केदार में भी प्रस्ताव संभावित
Uttrakhand News: उत्तराखंड के चार धामों में से एक गंगोत्री धाम में अब गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह फैसला रविवार को श्री गंगोत्री मंदिर समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। समिति के चेयरमैन सुरेश सेमवाल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह रोक सिर्फ गंगोत्री धाम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मां गंगा के शीतकालीन निवास मुखबा गांव में भी लागू होगी।
Uttrakhand News: मंदिर समिति की बैठक में सर्वसम्मति से फैसला
श्री गंगोत्री मंदिर समिति की बैठक रविवार को उत्तरकाशी में हुई। बैठक में समिति के सभी सदस्यों ने गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। चेयरमैन सुरेश सेमवाल ने कहा, “गंगोत्री धाम मां गंगा का मूल उद्गम स्थल है। यह स्थान हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहां गैर-हिंदुओं का प्रवेश धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है। इसलिए समिति ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है।”
उन्होंने आगे बताया कि यह प्रतिबंध गंगोत्री धाम के साथ-साथ मां गंगा के शीतकालीन निवास मुखबा गांव में भी लागू रहेगा। सर्दियों में जब गंगोत्री धाम के कपाट बंद हो जाते हैं, तब मां गंगा की मूर्ति को मुखबा गांव में लाया जाता है। अब मुखबा में भी गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
गंगोत्री धाम के कपाट फिलहाल बंद

गंगोत्री धाम के कपाट अक्टूबर-नवंबर में बर्फबारी और भीषण ठंड के कारण बंद कर दिए जाते हैं। कपाट अगले साल अप्रैल-मई में फिर खोले जाते हैं। सर्दियों के छह महीने में श्रद्धालु मां गंगा की पूजा मुखबा गांव में करते हैं। इस दौरान मुखबा गांव में विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान होते हैं। समिति का कहना है कि यह फैसला धार्मिक परंपराओं और भावनाओं की रक्षा के लिए लिया गया है।
बद्रीनाथ-केदारनाथ में भी आ सकता है ऐसा फैसला
इस फैसले के बाद अब श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ और केदारनाथ धामों सहित समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव आने वाली बोर्ड बैठक में पेश किया जाएगा। हेमंत द्विवेदी ने कहा, “चारों धाम हिंदू धर्म के सबसे पवित्र स्थल हैं। गंगोत्री मंदिर समिति का फैसला सही दिशा में है। हम भी इसी तरह का प्रस्ताव लाएंगे।”
Uttrakhand News: चार धाम यात्रा का महत्व
उत्तराखंड के चार धाम – यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ – हिंदू धर्म में मोक्ष प्राप्ति के प्रमुख तीर्थ स्थल माने जाते हैं। गंगोत्री धाम को मां गंगा का उद्गम स्थल माना जाता है। यहां गंगोत्री ग्लेशियर से गंगा नदी निकलती है। श्रद्धालु यहां स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं।
फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
इस फैसले पर धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने स्वागत किया है। कई लोगों का कहना है कि पवित्र धामों में धार्मिक भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। दूसरी ओर, कुछ पर्यटन विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे भेदभावपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि चार धाम यात्रा पर्यटन का भी बड़ा हिस्सा है। गैर-हिंदुओं पर रोक से पर्यटन प्रभावित हो सकता है।
मुखबा गांव में क्या व्यवस्था?
मुखबा गांव उत्तरकाशी जिले में स्थित है। सर्दियों में मां गंगा की मूर्ति यहां लाई जाती है। गांव में विशेष पूजा होती है। अब यहां भी गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। समिति ने कहा कि यह फैसला धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए है।
Uttrakhand News: उत्तराखंड सरकार की भूमिका
उत्तराखंड सरकार ने अभी तक इस फैसले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन पर्यटन विभाग और चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड इस पर नजर बनाए हुए हैं। यदि बद्रीनाथ-केदारनाथ में भी ऐसा फैसला आया तो चारों धामों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लग सकती है। यह फैसला उत्तराखंड की धार्मिक और पर्यटन नीति पर असर डाल सकता है।
गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का फैसला धार्मिक भावनाओं और परंपराओं को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। लेकिन यह बहस का विषय भी बना हुआ है।
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