US-ईरान युद्ध ने तेल बाजार में लगाई आग, ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर के पार, होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरे से दुनिया में मची हलचल
ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध से ब्रेंट क्रूड 83.99 डॉलर पहुंचा, होर्मुज पर खतरा, वैश्विक आपूर्ति संकट गहराया
Crude Oil Price: मध्य-पूर्व में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा भीषण युद्ध अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अपना असर दिखाने लगा है। तेल बाजार में इस युद्ध का सबसे तेज और सीधा असर देखने को मिल रहा है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 2.65 डॉलर यानी 3.26 प्रतिशत की जोरदार बढ़त के साथ 83.99 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंचा। यह लगातार पांचवां कारोबारी सत्र है जब ब्रेंट में तेजी दर्ज हुई है।
Crude Oil Price: क्यों बढ़ीं अचानक तेल की कीमतें?
तेल की कीमतों में इस तेजी के पीछे एक के बाद एक सामने आ रहे चौंकाने वाले घटनाक्रम हैं। गुरुवार तड़के ईरान ने इजरायल पर एक बार फिर मिसाइल हमले किए जिसके बाद लाखों लोगों को सुरक्षा के लिए बंकरों में शरण लेनी पड़ी। यह हमला ऐसे समय हुआ जब वॉशिंगटन में अमेरिकी हवाई हमलों को रोकने की कूटनीतिक कोशिशें विफल हो गईं। बुधवार को श्रीलंका के तट के पास अमेरिका की एक पनडुब्बी ने ईरान के एक युद्धपोत को निशाना बनाकर डुबो दिया जिसमें कम से कम 80 लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही नाटो की वायु रक्षा प्रणाली ने तुर्की की ओर दागी गई एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया।
Crude Oil Price: होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों टिकी है दुनिया की नजर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ईरान ने पहले ही यह चेतावनी दे दी है कि युद्ध के दौरान अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अगर यह धमकी अमल में आई तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर इसका विनाशकारी असर पड़ सकता है। खासकर चीन की चिंता इस मामले में सबसे ज्यादा है क्योंकि उसके आयातित कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।
Crude Oil Price: वैश्विक आपूर्ति पर एक साथ कई दबाव
केवल होर्मुज का खतरा ही नहीं बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति पर एक साथ कई मोर्चों से दबाव बढ़ता जा रहा है। ओपेक के दूसरे सबसे बड़े तेल उत्पादक देश इराक ने अपना उत्पादन लगभग 15 लाख बैरल प्रतिदिन घटा दिया है। सीमित भंडारण क्षमता और निर्यात मार्गों में बाधा इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। इसके अलावा चीन सरकार ने अपने बड़े रिफाइनरों को डीजल और पेट्रोल के निर्यात को अस्थायी रूप से रोकने का निर्देश दिया है ताकि घरेलू मांग को प्राथमिकता मिल सके। ईरानी बलों द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तेल टैंकरों को निशाना बनाने की खबरें भी सामने आई हैं।
Crude Oil Price: रिफाइनरों की चेतावनी और रणनीतिक भंडार
एक बड़े भारतीय रिफाइनर ने भी अपने ग्राहकों को संकेत दिया है कि वह फिलहाल पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात रोक सकता है। जापान के रिफाइनरों ने अपनी सरकार से रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से तेल जारी करने का अनुरोध किया है। ये सभी संकेत बता रहे हैं कि दुनियाभर में तेल की आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंता व्याप्त है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन ने कुवैत के तट के पास एक टैंकर के नजदीक विस्फोट की घटना की भी पुष्टि की है।
Crude Oil Price: ईरान झुकने के मूड में नहीं
लगातार बढ़ते तनाव के बीच ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता के बेटे का नाम नए संभावित उत्तराधिकारी के रूप में सामने आया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि तेहरान फिलहाल अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि युद्ध और लंबा खिंच सकता है। डब्लूटीआई (WTI) क्रूड भी 2.76 डॉलर यानी 3.70 प्रतिशत की उछाल के साथ 77.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
Crude Oil Price: आगे क्या होगा तेल की कीमतों का?
विशेषज्ञों और ब्रोकरेज फर्मों की राय इस मामले में बंटी हुई है। ब्रोकरेज फर्म श्रीराम वेल्थ का मानना है कि कच्चे तेल में मौजूदा तेज उछाल लंबे समय तक जारी रहना मुश्किल है। फर्म के अनुसार अगर मध्य-पूर्व में तनाव धीरे-धीरे कम होता है तो तेल की कीमतें फिर से लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर लौट सकती हैं। हालांकि कुछ अन्य ब्रोकरेज हाउस का अनुमान इससे बिल्कुल अलग है। उनका मानना है कि अगर संघर्ष और गहराता है तो कच्चे तेल की कीमतें 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती हैं।
Crude Oil Price: भारत के लिए बढ़ती चिंताएं
भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। तेल की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल-डीजल के दाम, महंगाई और व्यापार घाटे पर सीधा असर पड़ सकता है। वैश्विक बाजार में मची यह हलचल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आने वाले समय में बड़ी चुनौती पेश कर सकती है।
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