UP Politics: बरेली में धरने पर बैठे अलंकार अग्निहोत्री, निलंबन को बताया सुनियोजित साजिश
बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री निलंबित, यूजीसी-शंकराचार्य विवाद पर इस्तीफा नामंजूर; जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरना
UP Politics: यूजीसी विवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मंगलवार को वह बरेली जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और आरोप लगाया कि उन्हें सुनियोजित साजिश के तहत निलंबित किया गया है। अलंकार ने जिलाधिकारी को चुनौती देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं। इस घटनक्रम ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।
जिलाधिकारी को दी चुनौती
धरने पर बैठे अलंकार अग्निहोत्री ने मांग की है कि जिलाधिकारी स्वयं आकर बताएं कि सोमवार शाम को किसका फोन आया था जो पंडितों के लिए अपशब्द बोल रहा था। उन्होंने कहा कि अगर जिलाधिकारी नहीं आते हैं तो प्रधानमंत्री या गृह मंत्री को आना चाहिए। अलंकार का यह बयान उनकी आक्रामक मुद्रा को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने निलंबन को अन्यायपूर्ण मानते हैं।
UP Politics: यूजीसी विवाद में दिया था इस्तीफा

अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के समता युग के विरोध में और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में इस्तीफा दिया था। बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात अलंकार ने सार्वजनिक रूप से यह कदम उठाया था। उनके इस कदम ने प्रशासन में खलबली मचा दी थी। इस्तीफे के बाद उन्होंने यूजीसी बिल और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले पर खुलकर अपनी बात रखी थी।
शासन ने किया निलंबित
उत्तर प्रदेश सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया है। विशेष सचिव अन्नपूर्णा गर्ग की ओर से जारी आदेश में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को उत्तर प्रदेश सरकारी सेवा अनुशासन एवं अपील नियमावली 1999 के नियम चार के तहत प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए तत्काल निलंबित किया गया है। यह निर्णय रविवार को लिया गया था।
मंडलायुक्त करेंगे जांच
अलंकार अग्निहोत्री के विरुद्ध विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही शुरू करते हुए आरोपों की जांच के लिए मंडलायुक्त बरेली भूपेंद्र एस चौधरी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। मंडलायुक्त को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे पूरे मामले की गहन जांच करें। जांच में सभी पहलुओं को देखा जाएगा और उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
UP Politics: शामली में रहेंगे संबद्ध
निलंबन के आदेश में यह भी कहा गया है कि निलंबन की अवधि में अलंकार अग्निहोत्री शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध रहेंगे। इसका मतलब है कि उन्हें शामली में रहना होगा और वहां के जिलाधिकारी कार्यालय में उपस्थित होना होगा। हालांकि उन्हें कोई प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। यह एक प्रकार की प्रशासनिक सजा है।
बंधक बनाने का आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी आरोप लगाया था कि जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने उन्हें अपने कैंप कार्यालय में 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा। यह गंभीर आरोप था जिसने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी। अलंकार ने कहा कि उन्हें जबरन रोका गया और उन पर दबाव बनाया गया।
प्रशासन ने किया खंडन
हालांकि एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह ने अलंकार के बंधक बनाए जाने के आरोप का पूरी तरह से खंडन किया है। उन्होंने कहा कि वहां बंधक बनाने जैसी कोई स्थिति नहीं थी। अलंकार अग्निहोत्री खुद ही सभी से मिलने गए थे। वहां एडीएम सिटी और एडीएम प्रशासन भी मौजूद थे। सभी के साथ सामान्य बातचीत हुई।
सामान्य बातचीत हुई थी
एडीएम देश दीपक सिंह ने बताया कि वहां केवल बातचीत हुई थी। उनसे कहा गया कि अगर उन्हें कोई दिक्कत है तो वे छुट्टी ले सकते हैं। लेकिन अलंकार ने छुट्टी लेने से इनकार कर दिया। बातचीत के बाद वह अपने आप चले गए। एडीएम ने कहा कि अलंकार द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। वास्तविकता कुछ और ही थी।
UP Politics: यूजीसी बिल पर विवाद
यूजीसी का समता युग बिल विवादों में रहा है। कई लोगों ने इसका विरोध किया है। अलंकार अग्निहोत्री ने भी इस बिल के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने कहा था कि यह बिल सवर्णों के हितों के खिलाफ है। इसी मुद्दे पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। यूजीसी बिल को लेकर समाज के कई वर्गों में असंतोष है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मामला
अलंकार ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में भी अपनी बात रखी थी। स्वामी जी भी यूजीसी बिल के मुखर विरोधी रहे हैं। अलंकार ने कहा था कि स्वामी जी जो कह रहे हैं वह सही है। उन्होंने स्वामी जी के विचारों से अपनी सहमति जताई थी। इससे पूरे मामले ने धार्मिक और राजनीतिक रंग ले लिया।
बीएचयू का जिक्र
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि बीएचयू जैसी संस्था पर भी यूजीसी के नियमों का असर होगा। यह चिंता का विषय है। उनका मानना था कि यूजीसी बिल से शैक्षणिक संस्थाओं की स्वायत्तता प्रभावित होगी।
UP Politics: राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी आई है। कुछ दलों ने अलंकार के कदम को सराहा है तो कुछ ने इसकी आलोचना की है। विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक अधिकारी को अपनी बात रखने का अधिकार है। उसे इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए।
प्रशासनिक नजरिया
प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो एक सरकारी अधिकारी का सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देना और विवादास्पद बयान देना सेवा नियमों का उल्लंघन माना जाता है। सरकारी कर्मचारियों को अपनी राय सही माध्यम से रखनी चाहिए। सार्वजनिक रूप से सरकार की नीतियों की आलोचना करना अनुशासनहीनता मानी जाती है।
धरना क्यों दिया?
अलंकार अग्निहोत्री ने मंगलवार को जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरना इसलिए दिया क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके साथ अन्याय हुआ है। उनका कहना है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। उन्होंने केवल अपनी बात रखी। लेकिन इसके लिए उन्हें निलंबित कर दिया गया। यह सुनियोजित साजिश है।
UP Politics: आगे क्या होगा?
अब मंडलायुक्त की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आगे क्या कार्रवाई होगी। अगर जांच में अलंकार दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ और सख्त कार्रवाई हो सकती है। अगर वे निर्दोष साबित होते हैं तो उन्हें बहाल किया जा सकता है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
निष्कर्ष:
अलंकार अग्निहोत्री का मामला अब एक बड़े विवाद में बदल गया है। एक तरफ प्रशासन है जो अनुशासन की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ अलंकार हैं जो अपने को निर्दोष बता रहे हैं। उनका धरना देना और जिलाधिकारी को चुनौती देना इस विवाद को और गहरा कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले का क्या रुख होता है यह देखना होगा।
Read More Here
EU Trade Deal: भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुआ मदर ऑफ ऑल डील्स, जानें कौन सी चीजें होंगी सस्ती
India-EU Deal: भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुआ ऐतिहासिक व्यापार समझौता, पीएम मोदी ने की घोषणा
Patna NEET Case: शम्भु छात्रावास कांड मामले में छह संदिग्धों के लिए गए डीएनए सैंपल, जांच में तेजी