पूर्वांचल से दिल्ली तक बनेगा नया हाई-स्पीड कॉरिडोर, यूपी में 50 किलोमीटर लंबे 6 लेन लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे की तैयारी शुरू, 2864 करोड़ की लागत से 36 महीने में होगा तैयार

यूपी में 50 किमी लंबा 6-लेन लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। 2864 करोड़ की लागत, 36 महीने में तैयार, लखनऊ ट्रैफिक जाम से राहत

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UP News: उत्तर प्रदेश के करोड़ों यात्रियों के लिए एक बेहद खुशखबरी आई है। प्रदेश की सड़क कनेक्टिविटी को एक नए और ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। जल्द ही पूर्वांचल से दिल्ली तक का सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान, तेज और सुविधाजनक हो जाएगा। इसके लिए लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे बनाने की योजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है जो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से सीधे जोड़ेगा। यह एक ग्रीनफील्ड परियोजना है यानी इसे पूरी तरह नई जमीन पर आधुनिक तकनीक के साथ बनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यूपीडा ने इस परियोजना के लिए टेंडर भी जारी कर दिया है। इस एक बड़े कदम से लखनऊ के भीतर का ट्रैफिक जाम भी काफी कम होगा और पूर्वांचल के लाखों लोगों का दिल्ली-एनसीआर से जुड़ाव और मजबूत होगा। आइए विस्तार से जानते हैं इस महत्वाकांक्षी परियोजना के बारे में।

क्या है लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे?

लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की एक नई और महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना है जिसका मकसद प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को एक हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क के जरिए जोड़ना है। यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ने का काम करेगा। अभी तक इन दोनों एक्सप्रेसवे के बीच कोई सीधा हाई-स्पीड लिंक नहीं था जिसकी वजह से पूर्वांचल से दिल्ली-एनसीआर जाने वाले वाहनों को लखनऊ शहर के भीतर से गुजरना पड़ता था। इससे शहर में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण दोनों बढ़ते थे। नया लिंक एक्सप्रेसवे इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा।

UP News: 50 किलोमीटर लंबा होगा यह एक्सप्रेसवे

प्रस्तावित लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 50.94 किलोमीटर होगी। यह 6 लेन का चौड़ा एक्सप्रेसवे होगा जिस पर वाहन उच्च गति से सफर कर सकेंगे। ग्रीनफील्ड परियोजना होने के कारण इसे शुरू से ही आधुनिक डिजाइन और नवीनतम तकनीक के साथ बनाया जाएगा। पुरानी सड़कों को चौड़ा करने में जो समस्याएं आती हैं जैसे जमीन अधिग्रहण की जटिलताएं और पुराने ढांचे को हटाने की परेशानी उनसे यह परियोजना काफी हद तक मुक्त होगी। इस परियोजना के निर्माण पर लगभग 2,864.82 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और सरकार का लक्ष्य है कि इसे 36 महीनों यानी तीन वर्षों के भीतर पूरा कर लिया जाए।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से क्या है कनेक्शन

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की एक बड़ी उपलब्धि है जो 2021 में शुरू हुई थी। यह 341 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे गाजीपुर को लखनऊ के पास चांद सराय गांव से जोड़ता है। इसके जरिए गाजीपुर से लखनऊ का सफर महज साढ़े तीन घंटे में पूरा किया जा सकता है। इस एक्सप्रेसवे ने लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, अयोध्या, सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर जैसे प्रमुख जिलों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी दी है। पूर्वांचल के लाखों लोगों के लिए यह एक्सप्रेसवे एक वरदान साबित हुआ है। लेकिन इसकी एक बड़ी कमी यह थी कि यह दिल्ली-एनसीआर से सीधे नहीं जुड़ा था। नया लिंक एक्सप्रेसवे इस कमी को पूरा करेगा।

UP News: आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से बनेगा हाई-स्पीड नेटवर्क

302 किलोमीटर लंबा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पहले से ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और लखनऊ के बीच यातायात को तेज और आसान बना चुका है। यह एक्सप्रेसवे यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ता है जो दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचता है। अब जब लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे बन जाएगा तो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के बीच एक सीधा और बाधारहित संपर्क स्थापित हो जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि गाजीपुर, वाराणसी, आजमगढ़ या अयोध्या से दिल्ली जाने वाला कोई भी यात्री लखनऊ शहर के ट्रैफिक में फंसे बिना सीधे हाई-स्पीड कॉरिडोर से दिल्ली पहुंच सकेगा। यह समय और ईंधन दोनों की बड़ी बचत होगी।

लखनऊ के ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत

लखनऊ शहर के निवासियों के लिए भी यह परियोजना एक बड़ी राहत लेकर आएगी। अभी पूर्वांचल से पश्चिमी यूपी और दिल्ली की तरफ जाने वाले हजारों वाहन रोजाना लखनऊ शहर के भीतर से गुजरते हैं। इससे शहर की सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम लगता है। भारी ट्रकों और लंबी दूरी के वाहनों के शहर में आने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ता है और प्रदूषण भी फैलता है। नए लिंक एक्सप्रेसवे के बन जाने पर लंबी दूरी के वाहन शहर में प्रवेश किए बिना सीधे बाहर से निकल जाएंगे जिससे शहर के ट्रैफिक में उल्लेखनीय सुधार होगा।

UP News: पूर्वांचल के विकास को मिलेगी नई रफ्तार

यह एक्सप्रेसवे केवल यातायात की सुविधा तक सीमित नहीं है। इससे पूर्वांचल के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से उद्योग, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। किसानों की उपज दिल्ली और अन्य बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंच सकेगी। पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि अयोध्या, वाराणसी और विंध्याचल जैसे धार्मिक स्थल दिल्ली से और आसानी से जुड़ जाएंगे।

यह परियोजना उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर का एक और सबूत है। अगले तीन वर्षों में जब यह एक्सप्रेसवे बनकर तैयार होगा तब पूर्वांचल और दिल्ली-एनसीआर के बीच की दूरी सिर्फ किलोमीटर में नहीं बल्कि समय और सुविधा में भी बहुत कम हो जाएगी।

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