UP News: प्रयाग छोड़ काशी रवाना हुए अविमुक्तेश्वरानंद, योगी पर फिर साधा निशाना, बोले “असली-नकली हिंदू का फर्क समझें”
मौनी अमावस्या पर स्नान न कर पाने के बाद छोड़ा प्रयागराज, सीएम योगी की आलोचना करते हुए कहा- सनातनियों पर हो रहा हमला
UP News: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार की सुबह प्रयागराज से काशी के लिए रवाना हो गए। माघ मेला में मौनी अमावस्या पर संगम स्नान को जाते समय प्रशासन द्वारा रोके जाने से उत्पन्न विवाद के बाद उन्होंने बिना स्नान किए ही प्रयागराज छोड़ने का फैसला किया।
प्रयागराज छोड़ने से पहले शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मामले में सीएम ने कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया। उन्होंने हिंदू समाज से असली और नकली हिंदू के बीच फर्क समझने की अपील की।
UP News: क्या है पूरा मामला
माघ मेला में मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संगम में स्नान करने जा रहे थे। इस दौरान प्रशासन ने उन्हें रोक दिया और कुछ संतों व बटुकों के साथ कथित रूप से अभद्रता भी की गई। इस घटना से नाराज होकर शंकराचार्य ने संगम स्नान नहीं किया। उन्होंने इसे अपना अपमान बताया और प्रशासन की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की।
मौनी अमावस्या हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र दिन माना जाता है। माघ मास में इस दिन संगम में स्नान का विशेष महत्व है। शंकराचार्य जैसे धर्मगुरु के लिए यह स्नान न कर पाना एक बड़ी बात है।
शंकराचार्य ने क्या कहा?

माघ मेला क्षेत्र छोड़ने से पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पत्रकारों से बातचीत में कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “इस समय सनातनी लोगों पर हमला हो रहा है। उनके अधिकार और संस्कार खत्म करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। प्राचीन मंदिरें तोड़ी जा रही हैं।”
शंकराचार्य ने आगे कहा, “मौनी अमावस्या पर मैं स्नान नहीं कर पाया। संतों और बटुकों को पीटने के साथ मेरा अपमान किया गया। जितना दुख मुझे अबकी बार हुआ है उतना कभी नहीं हुआ।” उन्होंने अपने सम्मान की लड़ाई लड़ने का संकल्प लेते हुए कहा कि वह इस मामले को यूं ही नहीं छोड़ेंगे। सनातन धर्म की रक्षा के लिए वह हर संभव प्रयास करेंगे।
योगी आदित्यनाथ पर साधा निशाना
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, “कष्टकारी यह है कि इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया।”
यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि योगी आदित्यनाथ खुद एक धार्मिक व्यक्तित्व हैं और गोरखनाथ मंदिर के महंत हैं। शंकराचार्य का आरोप है कि उन्होंने एक धर्मगुरु के अपमान पर कोई कार्रवाई नहीं की। हालांकि योगी सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए थे।
UP News: असली और नकली हिंदू की बात
शंकराचार्य ने हिंदू समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा, “सनातन धर्म के लोग एकजुट हो जाएं। असली और नकली हिंदू के फर्क को समझें।” यह बयान काफी चर्चा में है। शंकराचार्य का इशारा उन लोगों की ओर है जो हिंदू होने का दावा तो करते हैं लेकिन सनातन धर्म की रक्षा नहीं करते।
उन्होंने कहा कि जो लोग सनातन धर्म के अधिकारों और परंपराओं की रक्षा नहीं करते, वे असली हिंदू नहीं हैं। हिंदू समाज को ऐसे लोगों को पहचानना चाहिए।
संतों का समर्थन
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को कई अन्य संतों और अखाड़ों का समर्थन मिल रहा है। दिगंबर अनी अखाड़ा के संतों ने उनके समर्थन में धूना तपस्या की है। कुछ संतों ने सिर पर जलती आग रखकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि शंकराचार्य जैसे धर्मगुरु का अपमान सहन नहीं किया जा सकता।
हालांकि कुछ अन्य धार्मिक नेताओं ने इस मामले पर संयम बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि विवाद को बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए।
ममता कुलकर्णी विवाद
इस बीच एक अन्य विवाद भी सामने आया है। पूर्व अभिनेत्री ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़ा से निष्कासित कर दिया गया है। कहा जा रहा है कि उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर कोई टिप्पणी की थी।
हालांकि इस बारे में पूरी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है। यह मामला भी चर्चा में बना हुआ है।
UP News: ब्यूरोक्रेट्स की एंट्री
दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद में कुछ नौकरशाहों ने भी एंट्री कर ली है। अयोध्या के GST उपायुक्त ने योगी आदित्यनाथ के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह घटना दिखाती है कि यह मामला केवल धार्मिक नहीं रह गया है बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है। विभिन्न पक्षों के लोग अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि माघ मेला में भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। हर किसी को निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करना था। अधिकारियों के अनुसार किसी का अपमान करने का इरादा नहीं था। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
हालांकि शंकराचार्य और उनके समर्थकों को यह तर्क मान्य नहीं है। उनका कहना है कि धर्मगुरुओं के साथ विशेष व्यवहार होना चाहिए।
काशी में क्या करेंगे शंकराचार्य
प्रयागराज से काशी पहुंचने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद क्या कदम उठाते हैं, यह देखना होगा। उन्होंने संकेत दिया है कि वह इस मामले को आगे ले जाएंगे। काशी में उनके कई समर्थक हैं। वहां वह अपने विचार और आगे की रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं। कुछ धार्मिक नेताओं की बैठक भी हो सकती है।
यह भी संभव है कि वह इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएं और अन्य धार्मिक नेताओं का समर्थन हासिल करें।
UP News: निष्कर्ष
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का प्रयागराज छोड़ना एक बड़ी घटना है। मौनी अमावस्या पर संगम स्नान न कर पाना उनके लिए दुखद रहा। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। असली और नकली हिंदू की बात करते हुए उन्होंने हिंदू समाज को एकजुट होने का आह्वान किया है। यह मामला धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा में है। आने वाले दिनों में इसके और विकास देखने को मिल सकते हैं।
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