UP Madarsa Survey Update: यूपी के 4 हजार से अधिक मदरसों पर होगी कार्रवाई

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है जिसके तले अब मदरसो पर नकेल कसने का काम शुरु हो गया है…. खबरो के अनुसार  मदरसो में चल रही अवैध रुप से फंडिग पर रोक लगाने के लिए यह काम किया जा रहा है ….. जिसके चलते एक बड़ा खुलासा भी हुआ कि लगातार जो सर्वे किए जा रहे थे..जिसमें उत्तर प्रदेश के  4 हजार मदरसों को विदेशी फंडिंग मिल रही है..जिसको लेकर एक बार फिर से कई सवालो को हवा दे रही कि.. क्या वाकाई सर्वे के अनुसार आने वाले समय में मदरसो में अवैध रुप से  चल रही फंडिग पर ताला लगेगा … या  फिर क्या चुनावी एंगल की तर्ज पर हो रही कार्रवाई अब इसके पीछे का क्या कुछ है सच उसके लिए हमारी इस रिपोर्ट को  पूरा देखे….

उत्तर प्रदेश  के 4 हजार मदरसों को विदेशी फंडिंग मिल रही है। नवंबर 2022 में हुए सर्वे में 8441  मदरसा बिना मान्यता चलते हुए मिले थे…लेकिन  अब अल्पसंख्यक विभाग परीक्षाएं खत्म होने के बाद एक बार फिर कार्रवाई की तैयारी चल रही है….दरअसल, जो पहले  12 बिंदुओं पर सर्वे हुए थे उनमें में ज्यादातर मदरसा संचालकों ने चंदा  को आय का सोर्स बताया था। शुरुआती जांच में नेपाल, बांग्लादेश और खाड़ी देशों से फंडिंग के संकेत मिले हैं…..और अगर बात की जाए तो इन आकंड़ो के अनुसार सबसे ज्यादा मुरादबाद में मदरसे मिले है जहां एक बड़े पैमाने पर फंडिग हो रही थी….दरअसल इसके पीछे की असल वजह यह भी है कि 10 सितंबर से 15 नवंबर 2022 तक यूपी सरकार ने मदरसों का सर्वे कराया था… इस टाइम लिमिट को बाद में 30 नवंबर तक बढ़ाया गया। सर्वे के बाद स्टेट में 8441 मदरसा गैर मान्यता संचालित मिले…लेकिन जब स र्वे के दौरान यह बात लोगो से पूछी गई तो उन्होने कहा उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड ने 2017 से मान्यता देना बंद कर दिया है। मदरसा प्रबंधकों का कहना है कि सभी दस्तावेज देने के बाद भी मान्यता नहीं मिली है। ऐसे में वह दीनी तालीम देने के लिए मदरसा संचालित कर रहे हैं। सरकार के मुताबिक, प्रदेश में फिलहाल 15 हजार 613 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं.

फिलहाल ऐसा माना जा रहा है कि यूपी सरकार को इस बात का संकेत भी मिला है कि दुबई, नेपाल, बांग्लादेश से ये फंडिंग आ रही है..और अगर इन विषयो पर ध्यान दे तो इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसके पैमाने कितने बड़े होगे…लेकिन आप को यह भी बता चले की नवंबर 2022 में पूरे हो चुके सर्वे के बाद अबतक कोई कार्रवाई नही हुई और अंदेशा लगाया जा रहा है कि जल्द ही इस पर एक नए सिरे से कार्रवाई होगी….बताते चले की इस पूरे मामले में इस अल्पसंख्यक मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा, “परीक्षाएं खत्म होने के बाद पुलिस विभाग के साथ मिलकर कार्रवाई की जाएगी..हम गरीब मुस्लिमों को मुख्य धारा से जोड़ना चाहते हैं। मौलवी बनने से उनका भला नहीं होगा। एनसीआरटी का सिलेबस भी पढ़ाना होगा  मुस्लिम का बेटा भी IAS और PCS अधिकारी बने।”मगर इन सबके बीच अगर भावी चुनाव के तर्ज पर देखे तो देश में जब जब चुनाव हुए तब हिन्दू मुसलिम की राजनिति भी पीछे नहीं रही क्योकिं जहां एक तरफ मदरसो को लेकर कहा जा रहा कि मुस्लिम का बेटा भी आईएस पीसीएस का बनने का अधिकार रखता है है तो दूसरी तरफ यह बात भी लगातार कही जाती है कि जब मदरसो में तालीम दी जा सकती है तो वर्षो पहले बंद हुए गुरुकुल को पुन:  से शुरु क्यो नहीं किया जाता है…..अब सर्वे के अनुसार जो आकड़े अवैध फंड़िग के मामले सामने आ रहे है जिसके तर्ज पर लोग यह बात कह रहे कि वर्ष 2017 में ही मान्यता देना बंद कर दिया गया था अब एक बड़े पैमाने पर योगी सरकार इन अवैध फंड़िग के पीछे की सच्चाई निकालकर सामने ले आती तो यकीकन इसका असर भावी चुनावो पर दिखेगा क्योकिं देश में अब इस पूरे  मसले को किस नजरिये से दिखाने का प्रयास किया जाएगा वह देखने वाला बेरहाल यह तामाम बाते एक कयास परअधारित क्योकि जब तक दूसरी सर्वे की रिपोर्ट सबके सामने आ नहीं जाती और सच लोगो के सामने आ नहीं जाता तो तब तक इन तथ्यो को केवल कयास के नजरिये देखा जा सकता है क्योकिं अगर अवैध रुप से संचालित मदरसो पर फंड़िग की बाते सामने आ रही है तो एक आखिर इसके पीछे की कहानी का पर्दा फाश होना बेहद जरुरी है.

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