अमेरिकी सेना का बड़ा ऑपरेशन, लैटिन अमेरिका में ड्रग्स तस्करी की तीन नावों को किया तबाह, 11 लोगों की मौत, ट्रंप ने बताया जरूरी कदम

पूर्वी प्रशांत महासागर और कैरेबियन सागर में हुई कार्रवाई, सितंबर से अब तक 145 लोगों की जा चुकी है जान, 42 हमलों में तबाह हुईं नावें, सेना ने नहीं दिया ड्रग्स होने का सबूत

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United States: अमेरिकी सेना ने मंगलवार को लैटिन अमेरिकी जलक्षेत्र में ड्रग्स की तस्करी के आरोपित तीन नौकाओं पर बड़ी कार्रवाई की, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई। यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा पिछले कई महीनों से चलाए जा रहे ड्रग तस्करी विरोधी अभियान के सबसे घातक दिनों में से एक था।

अमेरिकी दक्षिणी कमान (US Southern Command) के अनुसार, इस बड़े ऑपरेशन में पूर्वी प्रशांत महासागर में दो नौकाओं और कैरेबियन सागर में एक नौका को निशाना बनाया गया। सेना का दावा है कि ये नौकाएं ड्रग्स की तस्करी कर रही थीं, हालांकि अभी तक इसका कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया है।

सितंबर की शुरुआत से अब तक इस तरह के हमलों में कुल 145 लोगों की जान जा चुकी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इन हमलों को लैटिन अमेरिका में ड्रग कार्टेल के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का हिस्सा बताते हुए इसे ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए आवश्यक कदम करार दिया है। आइए जानते हैं इस पूरे ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी।

क्या है पूरा मामला?

मंगलवार को अमेरिकी सेना ने लैटिन अमेरिकी जलक्षेत्र में तीन अलग-अलग नौकाओं पर एक साथ हमले किए। ये हमले ट्रंप प्रशासन के ड्रग तस्करी विरोधी अभियान का हिस्सा हैं।

अमेरिकी दक्षिणी कमान ने बयान जारी कर इस ऑपरेशन की जानकारी दी। इस कमान का काम लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का संचालन करना है।

  • पूर्वी प्रशांत महासागर में दो हमले: पहली दो नौकाओं पर पूर्वी प्रशांत महासागर में हमला किया गया। दोनों नौकाओं में चार-चार लोग सवार थे। यानी कुल आठ लोग इन दोनों नौकाओं में मौजूद थे।
  • कैरेबियन सागर में एक हमला: तीसरी नौका कैरेबियन सागर में मिली जिस पर तीन लोग सवार थे। अमेरिकी सेना ने इस नौका को भी अपना निशाना बनाया।
  • कुल 11 लोगों की मौत: तीनों हमलों में कुल मिलाकर 11 लोगों की मौत हो गई। यह मौतें कैसे हुईं – क्या सीधे गोलीबारी में या नौकाओं के नष्ट होने से – इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
  • वीडियो जारी किए गए: अमेरिकी सेना ने इन हमलों के वीडियो जारी किए हैं जिनमें नौकाओं को नष्ट होते हुए देखा जा सकता है। ये वीडियो हवाई हमलों या नौसैनिक कार्रवाई के प्रतीत होते हैं।

United States: सितंबर से अब तक 145 मौतें, 42 हमले

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी सेना ने इस तरह की कार्रवाई की है। पिछले कई महीनों से यह अभियान चल रहा है और इसमें बड़ी संख्या में लोग मारे जा चुके हैं।

  • सितंबर से शुरू हुआ अभियान: अमेरिकी सेना ने सितंबर की शुरुआत से छोटी नौकाओं में ‘नारकोटेररिस्ट’ (narco-terrorists) कहे जाने वाले लोगों को निशाना बनाना शुरू किया था। यह शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो ड्रग तस्करी और आतंकवाद दोनों में शामिल होते हैं।
  • 145 लोगों की जान गई: अमेरिकी दक्षिणी कमान के अनुसार, इस अभियान में अब तक कुल 145 लोगों की मौत हो चुकी है। यह एक बहुत बड़ी संख्या है जो इस ऑपरेशन की तीव्रता को दर्शाती है।
  • 42 हमले किए जा चुके हैं: सितंबर से अब तक तस्करी मार्गों पर कुल 42 हमले किए गए हैं। यानी औसतन हर कुछ दिनों में एक हमला हो रहा है। मंगलवार का ऑपरेशन इस श्रृंखला में सबसे घातक रहा।
  • निशाने पर कौन: अमेरिकी सेना का कहना है कि ये हमले उन छोटी नौकाओं पर किए जा रहे हैं जो ड्रग्स तस्करी में शामिल हैं। ये नौकाएं आमतौर पर तेज चलने वाली और छोटी होती हैं जिन्हें ‘गो-फास्ट बोट’ कहा जाता है।
  • तस्करी के मार्ग: ये हमले मुख्य रूप से पूर्वी प्रशांत महासागर और कैरेबियन सागर में किए जा रहे हैं। ये वो क्षेत्र हैं जहां से कोकीन और अन्य ड्रग्स दक्षिण अमेरिका से अमेरिका तक पहुंचाए जाते हैं।

सेना ने नहीं दिया ड्रग्स होने का सबूत

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी सेना ने अभी तक यह सबूत नहीं दिया है कि जिन नौकाओं पर हमला किया गया, वे वास्तव में ड्रग्स ले जा रही थीं।

  • कोई भौतिक सबूत नहीं: अमेरिकी दक्षिणी कमान ने नष्ट हुई नौकाओं से ड्रग्स बरामद होने का कोई सबूत या तस्वीर जारी नहीं की है। आमतौर पर ड्रग्स की बड़ी मात्रा बरामद होने पर उसकी तस्वीरें दिखाई जाती हैं।
  • केवल वीडियो: सेना ने सिर्फ वो वीडियो जारी किए हैं जिनमें नौकाओं को नष्ट होते दिखाया गया है। लेकिन इन वीडियो में ड्रग्स दिखाई नहीं देते।
  • खुफिया जानकारी के आधार पर: संभवतः ये हमले खुफिया जानकारी के आधार पर किए जा रहे हैं। लेकिन यह जानकारी कितनी सटीक है और क्या हर बार सही है, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
  • मानवाधिकार की चिंता: कई मानवाधिकार संगठन इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि बिना पुख्ता सबूत के लोगों को मारना न्यायोचित नहीं है। हो सकता है कि कुछ निर्दोष मछुआरे भी इन हमलों में मारे गए हों।
  • पारदर्शिता की कमी: अमेरिकी सरकार को इन ऑपरेशनों में अधिक पारदर्शिता बरतनी चाहिए और सबूत सार्वजनिक करने चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मारे गए लोग वास्तव में ड्रग तस्कर थे।

United States: ट्रंप प्रशासन का रुख – ‘सशस्त्र संघर्ष’

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन हमलों को उचित ठहराते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उनका मानना है कि ड्रग कार्टेल के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जरूरी है।

  • सशस्त्र संघर्ष की बात: ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका लैटिन अमेरिका में ड्रग कार्टेल के साथ सशस्त्र संघर्ष में है। यह एक बहुत मजबूत बयान है जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।
  • आवश्यक कदम: ट्रंप ने इन हमलों को ड्रग्स तस्करी को रोकने के लिए एक आवश्यक कदम बताया है। उनका कहना है कि ड्रग्स अमेरिका में हर साल हजारों लोगों की जान ले रहे हैं, इसलिए इसे रोकने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे।
  • कठोर रुख की नीति: ट्रंप प्रशासन ने शुरू से ही ड्रग्स और अवैध आप्रवासन के खिलाफ कठोर रुख अपनाया है। यह उनकी चुनावी प्रतिज्ञाओं में से एक था।
  • सैन्य बल का उपयोग: पिछले प्रशासनों की तुलना में ट्रंप ड्रग तस्करी के खिलाफ अधिक सैन्य बल का उपयोग कर रहे हैं। पहले मुख्य रूप से नौकाओं को रोककर गिरफ्तार किया जाता था, अब उन्हें नष्ट किया जा रहा है।
  • विवादास्पद दृष्टिकोण: यह दृष्टिकोण विवादास्पद है। आलोचकों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है और निर्दोष लोग भी मारे जा सकते हैं।

लैटिन अमेरिका में ड्रग तस्करी की समस्या

लैटिन अमेरिका से अमेरिका तक ड्रग्स की तस्करी एक लंबे समय से चली आ रही समस्या है। इसे समझना इस पूरे मुद्दे को समझने के लिए जरूरी है।

  • कोकीन का मुख्य स्रोत: कोलंबिया, पेरू और बोलीविया दुनिया में कोकीन के सबसे बड़े उत्पादक हैं। यहां से कोकीन समुद्री और जमीनी रास्तों से अमेरिका पहुंचाई जाती है।
  • शक्तिशाली कार्टेल: लैटिन अमेरिका में कई शक्तिशाली ड्रग कार्टेल हैं जो अरबों डॉलर का व्यापार करते हैं। सिनालोआ कार्टेल, जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल जैसे संगठन बेहद खतरनाक और हिंसक हैं।
  • समुद्री मार्ग: कोकीन अक्सर छोटी, तेज नौकाओं में समुद्र के रास्ते तस्करी की जाती है। ये नौकाएं पकड़े जाने से बचने के लिए तेजी से चलती हैं और अक्सर रात में यात्रा करती हैं।
  • मध्य अमेरिका होते हुए: कई बार ड्रग्स पहले मध्य अमेरिकी देशों में ले जाए जाते हैं और फिर वहां से मेक्सिको होते हुए अमेरिका पहुंचते हैं।
  • अमेरिका में मांग: अमेरिका में ड्रग्स की भारी मांग है जो इस तस्करी को बढ़ावा देती है। हर साल लाखों अमेरिकी नागरिक कोकीन, हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं।

United States: अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चिंताएं

अमेरिकी सेना द्वारा किए जा रहे इन हमलों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रिया आई है। कुछ देश समर्थन कर रहे हैं तो कुछ चिंता जता रहे हैं।

  • लैटिन अमेरिकी देशों की प्रतिक्रिया: कुछ लैटिन अमेरिकी देश इन हमलों से नाखुश हैं। वे इसे अपने जलक्षेत्र में अमेरिकी दखल मानते हैं। हालांकि कुछ देश जो ड्रग तस्करी से परेशान हैं, वे इसका समर्थन कर रहे हैं।
  • मानवाधिकार संगठनों की चिंता: अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इन हमलों में बिना मुकदमे के लोगों को मारे जाने पर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि यह न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
  • कानूनी सवाल: अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या ये हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुसार हैं। आमतौर पर संदिग्ध जहाजों को रोककर उनकी तलाशी ली जाती है, सीधे नष्ट नहीं किया जाता।
  • प्रभावशीलता पर बहस: कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ये हमले ड्रग तस्करी को रोकने में प्रभावी नहीं होंगे। जब तक अमेरिका में मांग है, तस्कर नए रास्ते खोज लेंगे।
  • निर्दोष लोगों की चिंता: सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन हमलों में कुछ निर्दोष मछुआरे या अन्य लोग भी मारे जा सकते हैं। बिना पुख्ता सबूत के हमला करना खतरनाक है।

क्या यह रणनीति काम करेगी?

यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या अमेरिकी सेना की यह आक्रामक रणनीति वास्तव में ड्रग तस्करी को रोक पाएगी।

  • अल्पकालिक प्रभाव: निश्चित रूप से इन हमलों से कुछ ड्रग शिपमेंट रुकेंगे और तस्करों को नुकसान होगा। अल्पकालिक रूप से कुछ प्रभाव दिख सकता है।
  • दीर्घकालिक चुनौतियां: लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक रूप से यह समस्या का समाधान नहीं है। ड्रग कार्टेल बहुत लचीले होते हैं और नए रास्ते खोज लेते हैं।
  • मांग पक्ष को संबोधित करना: असली समाधान अमेरिका में ड्रग्स की मांग को कम करना है। बेहतर नशा मुक्ति कार्यक्रम, शिक्षा और रोकथाम पर ध्यान देना जरूरी है।
  • उत्पादन देशों में सहयोग: लैटिन अमेरिकी देशों के साथ मिलकर वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देना और किसानों को अन्य रोजगार के अवसर देना भी जरूरी है।
  • संपूर्ण दृष्टिकोण: केवल सैन्य कार्रवाई से यह समस्या हल नहीं होगी। एक संपूर्ण दृष्टिकोण की जरूरत है जिसमें कानून प्रवर्तन, सामाजिक कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल हो।

United States: निष्कर्ष

अमेरिकी सेना द्वारा लैटिन अमेरिकी जलक्षेत्र में ड्रग तस्करी के संदिग्ध नौकाओं पर किए जा रहे हमले एक विवादास्पद और जटिल मुद्दा है। मंगलवार को तीन नौकाओं पर हमले में 11 लोगों की मौत हो गई, जो सितंबर से चल रहे इस अभियान में सबसे घातक दिनों में से एक था। अब तक कुल 145 लोग इस ऑपरेशन में मारे जा चुके हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप इसे ड्रग कार्टेल के खिलाफ जरूरी सशस्त्र संघर्ष बता रहे हैं, लेकिन अमेरिकी सेना ने यह सबूत नहीं दिया है कि नष्ट की गई नौकाओं में वास्तव में ड्रग्स थे। यह मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून के दृष्टिकोण से चिंताजनक है।

ड्रग तस्करी निश्चित रूप से एक गंभीर समस्या है जिसे हल करना जरूरी है, लेकिन क्या यह आक्रामक सैन्य दृष्टिकोण सही तरीका है, यह बहस का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से यह समस्या हल नहीं होगी, बल्कि एक व्यापक रणनीति की जरूरत है जो मांग को कम करने, वैकल्पिक रोजगार देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर केंद्रित हो।

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