UGC के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, CJI सूर्यकांत ने कहा – “क्या हम प्रतिगामी समाज बन रहे हैं?”, 19 मार्च को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने UGC समता समिति नियमों पर रोक लगाई; CJI सूर्यकांत बोले - "क्या हम प्रतिगामी समाज बन रहे हैं?"; 19 मार्च को अगली सुनवाई
UGC New Rule 2026: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विवादास्पद नए नियमों को लेकर गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बड़ा निर्णय लिया है और UGC के नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है। न्यायालय ने इस मामले में अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 के लिए निर्धारित की है।
UGC New Rule 2026: विवाद की पृष्ठभूमि

23 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई दिशानिर्देश अधिसूचित की थीं। हालांकि इन नियमों को लेकर देशभर में तीव्र विरोध प्रदर्शन हुए और विभिन्न याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिकाएं दायर कीं।
याचिकाकर्ताओं के मुख्य आरोप
याचिकाकर्ताओं ने UGC के नए नियमों को निम्नलिखित आधारों पर चुनौती दी:
मनमाना और भेदभावपूर्ण: नियमों को संविधान और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 का उल्लंघन बताया गया।
एकतरफा परिभाषा: विरोधियों का तर्क है कि इस अधिनियम में भेदभाव की जो परिभाषा प्रस्तुत की गई है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि जातिगत भेदभाव केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के साथ ही होता है।
सामान्य वर्ग की उपेक्षा: सामान्य वर्ग के छात्रों को न तो कोई संस्थागत संरक्षण प्रदान किया गया है और न ही उनके लिए कोई शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal System) की व्यवस्था की गई है।
विरोधाभासी उद्देश्य: याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यद्यपि इस अधिनियम को समानता बढ़ाने के लिए लाया गया है, परंतु यह स्वयं भेदभाव को बढ़ावा देता है।
‘नेचुरल ऑफेंडर’ की अवधारणा: इस नियम में सामान्य जाति (सवर्णों) को ‘नेचुरल ऑफेंडर’ (स्वाभाविक अपराधी) माना गया है, जो अत्यंत आपत्तिजनक है।
UGC New Rule 2026: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का विवरण
सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई अत्यंत महत्वपूर्ण रही। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाती हैं।
वकील विष्णु शंकर जैन का तर्क
वकील विष्णु शंकर जैन ने न्यायालय के समक्ष कहा: “मैं जाति आधारित भेदभाव की इस परिभाषा पर रोक लगाने की मांग कर रहा हूं। कानून यह नहीं मान सकता कि भेदभाव केवल एक विशेष वर्ग के विरुद्ध होगा। यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि भेदभाव केवल एक वर्ग के विरुद्ध है।”
उन्होंने आगे कहा कि नई परिभाषा में ‘रैगिंग’ शब्द का उल्लेख नहीं है, जो एक गंभीर चूक है।
UGC New Rule 2026: CJI सूर्यकांत की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कई विचारोत्तेजक और महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं:
क्षेत्रीय भेदभाव पर प्रश्न: “मान लीजिए कि दक्षिण भारत का एक छात्र उत्तर भारत में प्रवेश लेता है या उत्तर का छात्र दक्षिण भारत में प्रवेश लेता है। यदि किसी प्रकार की व्यंग्यात्मक टिप्पणी की जाती है जो उनके विरुद्ध अपमानजनक हो तथा दोनों पक्षों को एक-दूसरे की जाति ज्ञात न हो, तो कौन सा प्रावधान इसे कवर करता है?”
इस पर वकील जैन ने उत्तर दिया कि धारा 3(ई) में यह सब सम्मिलित है।
प्रतिगामी समाज की चिंता: मुख्य न्यायाधीश ने अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया: “75 वर्षों के पश्चात एक वर्गहीन समाज बनने के लिए हमने जो कुछ भी अर्जित किया है, क्या हम एक प्रतिगामी (Regressive) समाज बन रहे हैं?”
रैगिंग और सांस्कृतिक भेदभाव: CJI ने कहा: “रैगिंग में सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि दक्षिण या उत्तर पूर्व से आने वाले छात्र अपनी संस्कृति लेकर आते हैं और जो इससे अनभिज्ञ होता है वह उन पर टिप्पणी आरंभ कर देता है।”
पृथक छात्रावास की आलोचना: “आपने पृथक छात्रावास की बात कही है। भगवान के लिए, अंतरजातीय विवाह भी होते हैं और हम छात्रावास में भी रहे हैं जहां सभी एक साथ निवास करते थे।”
कैंपस में एकता: CJI ने स्पष्ट रूप से कहा: “हमने कहा है कि कैंपस में अलगाव नहीं होना चाहिए।”
समग्र सामाजिक विकास: “हमारे संपूर्ण समाज का विकास होना चाहिए।”
समिति गठन का सुझाव
मुख्य न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कुछ प्रतिष्ठित व्यक्तियों की एक समिति के गठन पर विचार करने को कहा ताकि समाज बिना किसी भेदभाव के सामूहिक रूप से आगे बढ़ सके।
UGC New Rule 2026: वकील इंदिरा जयसिंह का हस्तक्षेप
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने न्यायालय को सूचित किया कि 2019 से एक याचिका लंबित है जिसमें 2012 के नियमों को चुनौती दी गई थी, जिनका स्थान अब 2026 के नियम ले रहे हैं।
इस पर CJI ने कहा: “2012 के नियमों की जांच करते समय हम और पीछे नहीं जा सकते।”
न्यायालय का अंतिम निर्णय
सुनवाई के समापन पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा: “आज हम कोई आदेश पारित नहीं करना चाहते, लेकिन न्यायालय को विश्वास में लिया जाना चाहिए।” अंततः न्यायालय ने UGC के नए नियमों पर अस्थायी रोक लगा दी और मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 के लिए निर्धारित की।
UGC New Rule 2026: व्यापक सामाजिक प्रभाव
यह निर्णय भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली और सामाजिक समरसता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियां यह दर्शाती हैं कि न्यायपालिका समाज में विभाजन के बजाय एकता को प्राथमिकता देती है।
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख स्पष्ट संकेत देता है कि किसी भी नियम या कानून को लागू करते समय संपूर्ण समाज के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए, न कि केवल एक वर्ग विशेष का।
निष्कर्ष
UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। 19 मार्च की अगली सुनवाई में यह देखना रोचक होगा कि सरकार और UGC इन आपत्तियों का कैसे उत्तर देते हैं और क्या वे नियमों में आवश्यक संशोधन करने को तैयार हैं।
मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियां स्पष्ट रूप से इंगित करती हैं कि न्यायालय एक समावेशी और एकीकृत समाज के निर्माण को प्राथमिकता देता है जहां भेदभाव के लिए कोई स्थान न हो।
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