ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, टैरिफ नीति को बताया गैरकानूनी, नाराज ट्रंप ने सभी देशों पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाने का किया ऐलान, भारत सहित विश्व पर क्या होगा असर
ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, टैरिफ नीति गैरकानूनी; नाराज राष्ट्रपति ने फैसला शर्मनाक कहा, सभी देशों पर 10% टैरिफ ऐलान, भारत-दुनिया पर प्रभाव
Trump Tariffs: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनकी विवादास्पद टैरिफ नीति पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कई देशों पर लगाए गए भारी आयात शुल्क यानी टैरिफ को रद्द कर दिया है। शुक्रवार 20 फरवरी 2026 को सुनाए गए इस ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने कहा कि ट्रंप ने जिन आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करके ये टैरिफ लगाए थे वे संवैधानिक रूप से सही नहीं थे। माना जा रहा है कि इस फैसले से ट्रंप की आर्थिक योजनाओं को बड़ा धक्का लगा है। कोर्ट का फैसला सामने आने के तुरंत बाद ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमारी बात नहीं सुनी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कोर्ट के फैसले को निराशाजनक और शर्मनाक करार दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज ट्रंप ने तुरंत पलटवार किया और सभी देशों पर 10 फीसदी अतिरिक्त ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि टैरिफ पर उनके पास और भी विकल्प हैं और वे अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा के लिए अधिक शुल्क लगा सकते हैं। यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब ट्रंप डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के करीब 24 गवर्नरों से व्यक्तिगत बैठक कर रहे थे। इस फैसले का असर न केवल अमेरिका बल्कि भारत सहित पूरी दुनिया पर पड़ेगा क्योंकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था इससे सीधे तौर पर प्रभावित होगी।
Trump Tariffs: सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, टैरिफ को क्यों बताया गैरकानूनी
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिकी संविधान कांग्रेस को टैक्स लगाने की पूरी शक्ति देता है जिसमें टैरिफ या आयात शुल्क भी शामिल है। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने फैसले में लिखा कि संविधान बनाने वालों ने टैक्स लगाने की कोई भी शक्ति राष्ट्रपति या कार्यपालिका को नहीं दी थी। यह अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था का मूलभूत सिद्धांत है। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति कानून यानी IEEPA का इस्तेमाल करके ये टैरिफ लगाए थे। लेकिन यह कानून राष्ट्रपति को इतनी व्यापक शक्ति नहीं देता कि वे बिना कांग्रेस की मंजूरी के इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगा सकें।
चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स ने आगे कहा कि अब तक किसी भी राष्ट्रपति को IEEPA के तहत ऐसे व्यापक शुल्क लगाने की ताकत नहीं मिली थी। इसलिए ऐसी शक्ति कभी थी ही नहीं। यह फैसला 6-3 के बहुमत से आया। तीन जजों सैमुअल अलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कावानॉ ने इस फैसले से असहमति जताई। जस्टिस कावानॉ ने अपनी असहमति में कहा कि ये शुल्क नीति के हिसाब से अच्छे हों या बुरे लेकिन कानून, इतिहास और पुराने फैसलों के आधार पर ये पूरी तरह वैध हैं।
ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया – फैसले को बताया शर्मनाक
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस की और अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शर्मनाक फैसला लिया है। ट्रंप ने कहा कि अदालत ने हमारी बात नहीं सुनी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट विपक्ष के दबाव में आ गया। यह बयान राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि एक राष्ट्रपति का सुप्रीम कोर्ट के फैसले को इस तरह खुलेआम चुनौती देना असामान्य है। ट्रंप ने आगे कहा कि मैंने दूसरे राष्ट्रपतियों से ज्यादा अच्छे फैसले लिए हैं। मैंने अमेरिका को अरबों डॉलर का फायदा कराया है।
अमेरिका की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा करना मेरी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से देश की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान होगा। जब उन्हें बहुमत से लिए गए इस फैसले की खबर दी गई उस समय वे डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के करीब 24 गवर्नरों से व्यक्तिगत बैठक कर रहे थे। ट्रंप की यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि वे इस फैसले को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
Trump Tariffs: सभी देशों पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाखुश नजर आ रहे ट्रंप ने तत्काल पलटवार करते हुए सभी देशों पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि टैरिफ पर मेरे पास और भी विकल्प हैं। अब मैं और ज्यादा टैरिफ वसूल सकता हूं। अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा जरूरी है। ट्रंप ने कहा कि 10 फीसदी का ग्लोबल टैरिफ लगाया जाएगा। यह एक व्यापक शुल्क होगा जो सभी देशों से आयात होने वाली वस्तुओं पर लागू होगा।
यह घोषणा बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका मतलब है कि भारत सहित सभी देशों को अमेरिका में अपने उत्पाद निर्यात करने के लिए 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क देना होगा। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की सुरक्षा के लिए मैं और ज्यादा टैरिफ लगा सकता हूं। यह बयान स्पष्ट करता है कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद अपनी टैरिफ नीति को जारी रखने के लिए दृढ़संकल्प हैं। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वे किस कानूनी प्रावधान के तहत यह नया टैरिफ लगाएंगे।
Trump Tariffs: ट्रंप प्रशासन के पास क्या हैं अन्य विकल्प
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से ट्रंप को पूरी तरह से टैरिफ लगाने से नहीं रोका जा सकता क्योंकि उनके पास दूसरे कानूनों का इस्तेमाल करने का विकल्प है। लेकिन इस फैसले से उनकी कुछ शक्तियों पर ज्यादा रोक लग गई है। ट्रंप प्रशासन के बड़े अधिकारियों का कहना है कि वे दूसरे तरीकों से टैरिफ की व्यवस्था को पहले जैसी ही रखने की कोशिश करेंगे। अमेरिका में कई अन्य व्यापार कानून हैं जिनका उपयोग राष्ट्रपति कर सकते हैं। उदाहरण के लिए ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 के तहत राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर टैरिफ लगा सकते हैं।
ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि इन प्रावधानों के तहत टैरिफ लगाने के लिए विस्तृत जांच और प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। IEEPA की तुलना में ये प्रक्रियाएं अधिक समय लेने वाली और जटिल हैं। फिर भी ट्रंप प्रशासन इन विकल्पों पर विचार कर रहा है।
भारत और अन्य देशों पर क्या होगा असर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रंप के नए टैरिफ ऐलान का भारत सहित सभी देशों पर मिश्रित प्रभाव पड़ेगा। एक ओर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले के टैरिफ को रद्द करना राहत की बात है। इससे भारतीय निर्यातकों को पहले लगाए गए भारी शुल्क से मुक्ति मिल सकती थी। भारत से अमेरिका को दवाइयां, कपड़ा, रत्न आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और आईटी सेवाओं का निर्यात होता है। पहले के टैरिफ से ये सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे थे। दूसरी ओर ट्रंप द्वारा 10 फीसदी अतिरिक्त ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा चिंता का विषय है। यदि यह लागू होता है तो भारतीय उत्पादों की लागत बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी। भारत सरकार को इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखनी होगी।
Trump Tariffs: अमेरिकी जनता की प्रतिक्रिया और आर्थिक प्रभाव
सर्वेक्षणों से पता चलता है कि आम अमेरिकी लोगों में ट्रंप द्वारा लगाए गए ये टैरिफ ज्यादा लोकप्रिय नहीं थे। आम लोगों का मानना था कि टैरिफ की वजह से महंगाई बढ़ रही है और घरेलू खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है। जब किसी देश पर आयात शुल्क लगाया जाता है तो उसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ता है। आयातकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है जिसे वे अंतिम उपभोक्ताओं से वसूलते हैं। इससे खाद्य पदार्थ, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े और अन्य उत्पाद महंगे हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लोगों को उम्मीद थी कि कीमतें कम होंगी।
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