1 अप्रैल से टोल प्लाजा पर नहीं चलेगा नकद, सिर्फ FASTag और UPI से होगा भुगतान
1 अप्रैल 2026 से टोल टैक्स केवल FASTag या UPI से, नकद भुगतान पूरी तरह बंद
Toll Tax: हाईवे पर यात्रा करने वाले लोगों के लिए एक बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि 1 अप्रैल 2026 से देश के सभी टोल प्लाजा पूरी तरह कैशलेस हो जाएंगे। इसका मतलब यह है कि टोल टैक्स चुकाने के लिए अब नकद भुगतान की सुविधा पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। यात्रियों को केवल FASTag या UPI के माध्यम से ही टोल का भुगतान करना होगा। यह निर्णय यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने एक साक्षात्कार में इस योजना की पुष्टि की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि टोल नाकों पर नकद लेनदेन को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम को खत्म करना और यात्रियों को निर्बाध यात्रा का अनुभव देना है। सरकार का यह फैसला भारत को डिजिटल इंडिया की दिशा में एक कदम आगे ले जाएगा।
Toll Tax: 25 टोल प्लाजा पर चल रहा परीक्षण
सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना (Toll Tax) को अचानक लागू नहीं कर रही है बल्कि पहले इसका व्यापक परीक्षण किया जा रहा है। फिलहाल देश भर के 25 प्रमुख टोल प्लाजा पर ‘नो-स्टॉप’ कैशलेस व्यवस्था का ट्रायल चल रहा है। इन टोल नाकों पर वाहनों को रुकना नहीं पड़ता और भुगतान स्वचालित रूप से हो जाता है। इस परीक्षण से मिल रहे परिणाम उत्साहजनक हैं।
ट्रायल के दौरान यह देखा जा रहा है कि कैशलेस व्यवस्था से यातायात कितनी तेजी से प्रवाहित होता है। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि तकनीकी समस्याओं का सामना कैसे किया जाए। विभिन्न प्रकार के वाहनों और विभिन्न परिस्थितियों में इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को परखा जा रहा है। इस परीक्षण के सफल परिणामों के आधार पर ही पूरे देश में इसे लागू करने का निर्णय लिया गया है।
हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के बयान से साफ संकेत मिल रहे हैं कि 1 अप्रैल 2026 से यह नियम पूरे देश में प्रभावी हो जाएगा। जल्द ही सरकार इस बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी।
टोल पर जाम से मिलेगी मुक्ति

वर्तमान में FASTag अनिवार्य होने के बावजूद कई टोल प्लाजा (Toll Tax) पर नकद लेनदेन की सुविधा उपलब्ध है। जिन वाहनों में FASTag नहीं होता या जो लोग नकद भुगतान करना पसंद करते हैं, उनके कारण अक्सर लंबी कतारें लग जाती हैं। खुले पैसों का लेनदेन, रसीद बनाना और गिनती करना समय लेने वाली प्रक्रिया है। इस वजह से पीछे आने वाले वाहनों को अनावश्यक इंतजार करना पड़ता है।
कैशलेस व्यवस्था लागू होने के बाद यह समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। सभी वाहनों का भुगतान डिजिटल रूप से और तुरंत हो जाएगा। गाड़ियों को टोल बूथ पर रुकना नहीं पड़ेगा या बहुत कम समय के लिए रुकना होगा। इससे यातायात की गति बनी रहेगी और जाम की स्थिति नहीं बनेगी। यात्रियों का समय बचेगा और यात्रा अधिक सुखद होगी।
विशेष रूप से त्योहारों और छुट्टियों के दौरान जब हाईवे पर भारी यातायात होता है, तब यह व्यवस्था बहुत फायदेमंद साबित होगी। पहले जो यात्रा टोल नाकों पर घंटों रुकने के कारण थकाऊ हो जाती थी, अब वह निर्बाध और आरामदायक होगी।
सरकार के तीन बड़े उद्देश्य
सरकार का यह फैसला (Toll Tax) केवल डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे तीन महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं जो देश और नागरिकों दोनों के लिए लाभकारी हैं।
पहला और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य ईंधन की बचत है। जब वाहन टोल नाका पर रुकते हैं और फिर दोबारा चलते हैं, तो इस प्रक्रिया में अधिक ईंधन खर्च होता है। बार-बार रुकना और चलना इंजन पर दबाव डालता है और ईंधन की खपत बढ़ाता है। कैशलेस व्यवस्था से वाहन सामान्य गति से गुजर सकेंगे जिससे पेट्रोल और डीजल की काफी बचत होगी। यह न केवल यात्रियों की जेब पर बोझ कम करेगा बल्कि पर्यावरण के लिए भी अच्छा होगा।
दूसरा उद्देश्य पारदर्शिता लाना है। नकद लेनदेन में हेराफेरी या गड़बड़ी की संभावना रहती है। कभी-कभी पूरी रकम जमा नहीं होती या रिकॉर्ड सही तरीके से नहीं रखे जाते। डिजिटल भुगतान में हर लेनदेन स्वचालित रूप से रिकॉर्ड होता है। इससे टोल कलेक्शन में पूर्ण पारदर्शिता आएगी। सरकार को सटीक आंकड़े मिलेंगे और राजस्व में वृद्धि होगी। भ्रष्टाचार की संभावना भी कम होगी।
तीसरा उद्देश्य यात्रा की गति बढ़ाना है। खुले पैसों की गिनती, रसीद बनाना और कभी-कभी छुट्टे पैसों को लेकर बहस में जो समय बर्बाद होता है, वह सब बचेगा। यात्री तेजी से अपनी मंजिल तक पहुंच सकेंगे। व्यावसायिक वाहनों के लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद होगा क्योंकि समय की बचत सीधे उनकी आमदनी से जुड़ी है।
Toll Tax: बैरियर-फ्री टोलिंग की ओर बढ़ता कदम
नकद भुगतान को समाप्त करना सरकार की दीर्घकालीन योजना का पहला चरण मात्र है। अगला लक्ष्य मल्टी-लेन फ्री फ्लो यानी MLFF प्रणाली लागू करना है। इस व्यवस्था में भौतिक टोल नाके ही नहीं होंगे। हाईवे पर ऊपर लगे कैमरे और सेंसर वाहनों को पहचानेंगे और स्वचालित रूप से टोल काट लेंगे।
इस तकनीक में वाहन को रुकना बिल्कुल नहीं पड़ेगा। गाड़ी सामान्य गति से चलती रहेगी और भुगतान पृष्ठभूमि में हो जाएगा। यह व्यवस्था पूरी तरह सहज और उपयोगकर्ता के अनुकूल होगी। विकसित देशों में यह तकनीक पहले से लागू है और बहुत सफल साबित हुई है। भारत भी इस दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
MLFF प्रणाली से न केवल यातायात सुचारु होगा बल्कि टोल संचालन की लागत भी कम होगी। टोल बूथों पर कर्मचारियों की जरूरत नहीं रहेगी और पूरी प्रक्रिया स्वचालित हो जाएगी। इससे बची हुई राशि को सड़क सुधार और रखरखाव में लगाया जा सकेगा।
वाहन चालकों के लिए जरूरी सलाह
1 अप्रैल 2026 से पहले सभी वाहन मालिकों को तैयारी (Toll Tax) कर लेनी चाहिए। सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने FASTag की जांच करें। सुनिश्चित करें कि आपका FASTag खाता सक्रिय है और उसमें पर्याप्त बैलेंस है। यदि FASTag की वैधता समाप्त हो रही है तो उसे नवीनीकृत करा लें।
अगर आपके वाहन में अभी तक FASTag नहीं लगा है तो तुरंत लगवा लें। यह किसी भी बैंक से या अधिकृत पॉइंट ऑफ सेल पर आसानी से मिल जाता है। वाहन के विंडशील्ड पर सही तरीके से लगाएं ताकि टोल गेट पर इसे आसानी से स्कैन किया जा सके।
अपने मोबाइल फोन में UPI ऐप भी सक्रिय रखें। कभी-कभी तकनीकी कारणों से FASTag काम नहीं करता तो UPI के माध्यम से भुगतान किया जा सकता है। अपना UPI पिन याद रखें और नियमित रूप से उपयोग करके सुनिश्चित करें कि वह सही तरीके से काम कर रहा है।
नए नियम लागू (Toll Tax) होने के बाद अगर आप बिना डिजिटल भुगतान के साधन के टोल प्लाजा पर पहुंचते हैं तो गंभीर समस्या हो सकती है। आपको भारी जुर्माना देना पड़ सकता है या वापस लौटना पड़ सकता है। इसलिए समय रहते तैयारी कर लेना बुद्धिमानी है। यह बदलाव अनिवार्य है और इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है, इसलिए इसे सकारात्मक दृष्टिकोण से अपनाएं।
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