12 अगस्त 2026 को लगेगा साल का दूसरा पूर्ण सूर्य ग्रहण, 1 मिनट 53 सेकंड तक दिन में छाएगा अंधेरा और आसमान में दिखाई देंगे तारे
2026 का दूसरा Total Solar Eclipse, कुछ देशों में दिन में दिखेंगे तारे
Total Solar Eclipse: खगोलीय घटनाओं से भरा साल 2026 अब अपनी दूसरी बड़ी घटना की ओर बढ़ रहा है। 12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) लगने जा रहा है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा और कुछ इलाकों में दिन के उजाले में अंधेरा छा जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार इस ग्रहण की अवधि लगभग 1 मिनट 53 सेकंड रहेगी, जिसमें आसमान में तारे दिखाई देने लगेंगे और सूर्य का कोरोना (बाहरी परत) साफ नजर आएगा।
यह घटना उत्तरी गोलार्ध के कई देशों में देखी जाएगी और खगोल प्रेमियों के लिए यह एक दुर्लभ अवसर होगा। 1999 के बाद यूरोप में पहली बार इतना स्पष्ट पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देने वाला है। भारत में हालांकि यह ग्रहण नहीं दिखेगा, लेकिन इसकी खगोलीय और ज्योतिषीय चर्चा जोरों पर है।
पूर्ण सूर्य ग्रहण क्या है और कैसे होता है?
पूर्ण सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है। इस स्थिति में सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं। चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है और कुछ इलाकों में पूर्ण अंधकार जैसा माहौल बन जाता है।
इस दौरान तापमान में गिरावट आती है, पक्षी अपने घोसलों की ओर लौटने लगते हैं और कुछ जानवर रात वाला व्यवहार करने लगते हैं। वैज्ञानिकों के लिए यह सूर्य की बाहरी परत ‘कोरोना’ का अध्ययन करने का सबसे अच्छा मौका होता है, जो सामान्य दिनों में सूर्य की चमक के कारण दिखाई नहीं देती।
12 अगस्त 2026 ग्रहण: कब और कहां दिखेगा?
यह ग्रहण 12 अगस्त 2026 को भारतीय समय के अनुसार रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे तक चलेगा। पूर्ण ग्रहण की अवधि करीब 1 मिनट 53 सेकंड रहेगी। पूर्ण ग्रहण दिखने वाले प्रमुख स्थानों में ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन के उत्तरी हिस्से, आर्कटिक क्षेत्र, रूस के कुछ उत्तरी इलाके और पुर्तगाल के कुछ हिस्से शामिल हैं।
इसके अलावा पश्चिमी यूरोप, उत्तरी अमेरिका, उत्तरी अफ्रीका और एशिया के कुछ उत्तरी भागों में यह आंशिक रूप से दिखाई देगा। इस ग्रहण का पाथ आर्कटिक ओशन से गुजरते हुए ग्रीनलैंड, आइसलैंड और फिर स्पेन की ओर जाएगा। खास बात यह है कि यह यूरोप के लिए 27 साल बाद आने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण है।
Total Solar Eclipse: भारत में क्यों नहीं दिखेगा ग्रहण?
भारत में यह पूर्ण सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा। जब ग्रहण लगेगा, उस समय भारत में रात होगी और सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा। इसलिए भारतीय आकाश में इस घटना का कोई प्रभाव दिखाई नहीं देगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जहां ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सूतक काल भी मान्य नहीं होता। ऐसे में 12 अगस्त को भारत में सामान्य दिनचर्या रहेगी। पूजा-पाठ, भोजन, मंदिरों के कपाट खुलने या अन्य धार्मिक गतिविधियों पर कोई पाबंदी नहीं होगी।
Total Solar Eclipse: ज्योतिषीय महत्व और राशियों पर प्रभाव
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य ग्रहण का ज्योतिषीय प्रभाव काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह श्रावण मास की अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या के दिन लग रहा है, जो स्वयं में पवित्र माना जाता है। कुछ राशियों पर इस ग्रहण का प्रभाव ज्यादा पड़ सकता है। विशेषकर सिंह, कर्क, मीन और धनु राशि वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
ग्रहण के दौरान मंत्र जाप, दान-पुण्य और शांति पूजा करने से नकारात्मक प्रभाव कम किए जा सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण को सूर्य की शक्ति में अस्थायी कमी माना जाता है। इसलिए इस दिन महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने या नई योजनाएं बनाने से बचना चाहिए।
वैज्ञानिक महत्व और शोध के अवसर
वैज्ञानिकों के लिए यह ग्रहण सूर्य के कोरोना का अध्ययन करने का सुनहरा मौका है। कोरोना सूर्य की सबसे बाहरी परत है, जहां सोलर विंड और अन्य गतिविधियां होती हैं। पूर्ण ग्रहण के दौरान ही इसे नंगी आंखों से देखा जा सकता है।
दुनिया भर के खगोल वैज्ञानिक और शोध संस्थान इस घटना को रिकॉर्ड करने की तैयारी में हैं। नासा, ईएसए और अन्य संगठन स्पेशल ऑब्जर्वेशन कैंपेन चला रहे हैं।
Total Solar Eclipse: ग्रहण देखने की तैयारी और सुरक्षा
जो लोग पूर्ण या आंशिक ग्रहण देखने वाले क्षेत्रों में हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। सूर्य को कभी भी बिना फिल्टर के सीधे न देखें। इसके लिए केवल ISO 12312-2 प्रमाणित सोलर व्यूअर या सोलर ग्लासेस का ही इस्तेमाल करें।
कैमरा, बाइनोकुलर या टेलीस्कोप के साथ भी उचित सोलर फिल्टर का होना बेहद जरूरी है। पूर्ण ग्रहण की मुख्य संक्षिप्त अवधि में ही बिना फिल्टर के देखा जा सकता है, लेकिन शुरुआत और अंत के चरणों में पूरी सावधानी जरूरी है।
Total Solar Eclipse: 2026 के अन्य ग्रहण
साल 2026 में कुल चार ग्रहण लग रहे हैं, जिनमें दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं। 12 अगस्त का यह दूसरा सूर्य ग्रहण है। इससे पहले फरवरी के महीने में एक और सूर्य ग्रहण लगा था। दुनिया भर के खगोल प्रेमी इन अद्भुत घटनाओं को यादगार बनाने के लिए विशेष यात्राएं प्लान कर रहे हैं।
ऐसी घटनाओं का सांस्कृतिक महत्व
भारतीय संस्कृति में ग्रहण को एक महत्वपूर्ण खगोलीय और धार्मिक घटना माना जाता है। प्राचीन काल से ही ग्रहणों को देवासुर संग्राम या राहु-केतु की छाया से जोड़ा जाता रहा है। दुनिया भर की विभिन्न संस्कृतियों में भी सूर्य ग्रहण से जुड़ी अनेक मान्यताएं हैं। कुछ जगहों पर इसे कूटनीतिक रूप से अशुभ माना जाता है तो कुछ संस्कृतियों में इसे प्रकृति के अनोखे चमत्कार के रूप में देखा जाता है।
निष्कर्ष: प्रकृति का अद्भुत खेल
12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण प्रकृति की अद्भुत शक्ति का प्रमाण है। हालांकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा, लेकिन खगोल प्रेमी लाइव स्ट्रीमिंग या भविष्य की घटनाओं के लिए तैयारी कर सकते हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि हम ब्रह्मांड के एक छोटे से हिस्से में रहते हैं और आकाशीय घटनाएं हमें विनम्र बनाती हैं।
वैज्ञानिक दृष्टि से हो या ज्योतिषीय, यह ग्रहण निश्चित रूप से चर्चा का विषय बना रहेगा। जो लोग इस ग्रहण को प्रत्यक्ष देखने जा रहे हैं, उन्हें सुरक्षित और आनंदपूर्ण अनुभव की शुभकामनाएं। बाकी लोग लाइव प्रसारण देखकर इस खगोलीय उत्सव का हिस्सा बन सकते हैं।
read more here
Redmi Note 14 Pro 5G: क्रोमा पर ₹30,999 वाला फोन अब सिर्फ ₹22,499 में, HDFC बैंक ऑफर से और सस्ता