मिडिल ईस्ट जंग के धुएं से बढ़ा जहरीली बारिश का खतरा, सांस और त्वचा रोगों का जोखिम, स्वामी रामदेव ने बताए योग और आयुर्वेदिक उपाय, जानें कैसे करें खुद की सुरक्षा
प्रदूषित बारिश से बढ़े खतरे, रामदेव के योग और आयुर्वेद उपाय अपनाएं
Swami Ramdev: जब दूर किसी देश में जंग की आग जलती है तो उसका धुआं सिर्फ उस देश की सीमाओं तक नहीं रुकता बल्कि हवाओं के साथ सफर करते हुए हजारों किलोमीटर दूर बैठे आम इंसान की सांसों तक भी पहुंच सकता है।
Swami Ramdev: मध्य पूर्व की जंग से बेमौसम बारिश का क्या संबंध है
मिडिल ईस्ट में तेल और गैस के ठिकानों पर हुए हमलों के बाद भारी मात्रा में काला धुआं वायुमंडल में फैल रहा है। इस धुएं में जहरीली गैसें, बारीक कण और एसिडिक पदार्थ होते हैं जो ऊपरी वायुमंडल में बादलों के साथ घुलकर दूर देशों तक पहुंच सकते हैं।
जब ये दूषित बादल बारिश के रूप में बरसते हैं तो इसे वैज्ञानिक रूप से एसिड रेन या विषाक्त वर्षा कहा जाता है। ऐसी बारिश आंखों में जलन, त्वचा पर लालिमा, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है।
Swami Ramdev: जहरीले कणों से फेफड़ों और दिल पर क्या खतरा है
तेल जलने से बनने वाले अति सूक्ष्म कण जिन्हें फाइन पार्टिकुलेट मैटर कहा जाता है, सांस के जरिए फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं। ये कण अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों के लिए विशेष रूप से खतरनाक होते हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इन सूक्ष्म कणों का लंबे समय तक संपर्क हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालता है और माइग्रेन, सीने में जलन तथा पुरानी खांसी जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। बच्चों और बुजुर्गों में यह खतरा कई गुना अधिक होता है।
Swami Ramdev: स्वामी रामदेव के अनुसार योग से इम्यूनिटी कैसे मजबूत करें
विश्व प्रसिद्ध योग गुरु स्वामी रामदेव का कहना है कि जब बाहरी परिस्थितियां प्रतिकूल हों तो शरीर की आंतरिक रक्षा शक्ति को मजबूत करना ही सबसे बड़ा उपाय है। नियमित योगाभ्यास शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को उस स्तर तक ले जाता है जहां बाहरी प्रदूषण और मौसमी बदलाव शरीर को आसानी से प्रभावित नहीं कर पाते।
प्राणायाम विशेष रूप से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी है। अनुलोम विलोम और कपालभाति जैसे प्राणायाम फेफड़ों को मजबूत बनाते हैं और शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं।
Swami Ramdev: आयुर्वेद में कौन से उपाय शरीर को जहरीले प्रदूषण से बचाते हैं
आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ीबूटियां हैं जो शरीर की प्राकृतिक डिटॉक्सीफिकेशन प्रक्रिया को तेज करती हैं और प्रदूषण के दुष्प्रभावों से बचाव करती हैं। तुलसी श्वास तंत्र की रक्षा करने वाली सबसे प्रभावी आयुर्वेदिक औषधि मानी जाती है।
गिलोय और अश्वगंधा इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक हैं जबकि हल्दी में मौजूद करक्यूमिन सूजन रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण शरीर को अंदर से सुरक्षित करता है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार इन जड़ीबूटियों का नियमित सेवन शरीर की सुरक्षा कवच को काफी मजबूत बनाता है।
Swami Ramdev: बेमौसम बारिश में बाहर निकलते समय क्या सावधानियां बरतें
प्रदूषित मौसम और बेमौसम बारिश के दौरान कुछ सरल लेकिन महत्वपूर्ण सावधानियां बरतकर स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सकता है। बाहर निकलते समय मास्क पहनना अनिवार्य रूप से करना चाहिए विशेषकर जब वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब हो।
बारिश में भीगने से बचना चाहिए और यदि भीग जाएं तो तुरंत साफ पानी से नहाएं और कपड़े बदलें। आंखों को पानी से अच्छी तरह धोएं और किसी भी प्रकार की जलन या एलर्जी के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
Swami Ramdev: खानपान में क्या बदलाव करें जब मौसम दूषित हो
इस तरह के प्रदूषित मौसम में खानपान की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। विटामिन सी से भरपूर फल जैसे आंवला, संतरा और नींबू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं और फेफड़ों को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाते हैं।
गर्म पानी में शहद और अदरक का सेवन गले और श्वास नलिका को सुरक्षित रखता है। बाहर का खाना और ऐसे पेय पदार्थ जिनमें बर्फ हो, इस दौरान विशेष रूप से परहेज करने चाहिए क्योंकि ये संक्रमण का खतरा बढ़ाते हैं।
निष्कर्ष
मध्य पूर्व की जंग अब केवल एक भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि एक वैश्विक स्वास्थ्य चेतावनी बन चुकी है। जब दुनिया के एक कोने में आग लगती है तो उसकी आंच दूसरे कोने तक पहुंचती है। ऐसे में सबसे बुद्धिमानी यही है कि हम अपने शरीर को अंदर से इतना मजबूत बनाएं कि बाहरी प्रदूषण और मौसमी उथलपुथल हमें आसानी से नुकसान न पहुंचा सके। योग, आयुर्वेद और सावधान जीवनशैली इस समय सबसे बड़े रक्षा कवच हैं।
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