मार्च में आ रहा है महापर्व! चैती छठ की तारीखें हुईं तय, अभी नोट करें नहाय खाय से उषा अर्घ्य तक का पूरा शेड्यूल

चैती छठ महापर्व 22 मार्च से शुरू, नहाय खाय से उषा अर्घ्य तक 4 दिन का कैलेंडर, सूर्य देव-छठी मैया की पूजा का महत्व

0

Chaiti Chhath 2026: साल में दो बार मनाया जाने वाला छठ महापर्व एक बार फिर दस्तक देने वाला है। कार्तिक छठ की तरह ही चैत्र महीने में मनाई जाने वाली चैती छठ भी लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का सबसे बड़ा पर्व है। इस बार चैती छठ मार्च 2026 में पड़ रही है और व्रती अभी से इसकी तैयारियों में जुट गए हैं। अगर आप भी इस पावन पर्व का व्रत रखने वाले हैं या परिवार में कोई व्रती है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। यहां जानें चैती छठ 2026 की सही तारीखें, चारों दिनों का महत्व और पूजा की पूरी विधि।

Chaiti Chhath 2026: चैती छठ क्या है और क्यों है खास

छठ पूजा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि यह सूर्य देव और छठी मैया के प्रति असीम श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। पहली बार कार्तिक महीने में जिसे कार्तिकी छठ कहते हैं और दूसरी बार चैत्र महीने में जिसे चैती छठ के नाम से जाना जाता है। चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से शुरू होकर यह महापर्व सप्तमी तिथि तक चलता है। चैती छठ मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। यह व्रत परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए रखा जाता है।

Chaiti Chhath 2026: चैती छठ 2026 कब से शुरू है

इस साल चैती छठ का महापर्व 22 मार्च 2026 रविवार से शुरू होगा और 25 मार्च 2026 बुधवार को उषा अर्घ्य के साथ इसका समापन होगा। यानी इस बार यह पावन पर्व पूरे 4 दिन मनाया जाएगा। व्रती अभी से घाटों की सफाई और पूजा सामग्री की व्यवस्था में लग जाते हैं ताकि पर्व के दौरान कोई कमी न रह जाए।

Chaiti Chhath 2026: चैती छठ 2026 का पूरा कैलेंडर

  • नहाय खाय (पहला दिन): 22 मार्च 2026, रविवार

  • खरना पूजा (दूसरा दिन): 23 मार्च 2026, सोमवार

  • संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): 24 मार्च 2026, मंगलवार

  • उषा अर्घ्य (चौथा और अंतिम दिन): 25 मार्च 2026, बुधवार

Chaiti Chhath 2026: नहाय खाय से होती है शुरुआत

चैती छठ महापर्व का पहला दिन नहाय खाय के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रती प्रातःकाल उठकर किसी पवित्र नदी, तालाब या जलाशय में स्नान करते हैं। स्नान के बाद साफ और नए वस्त्र धारण किए जाते हैं। इस दिन का भोजन पूरी तरह सात्विक होता है। चने की दाल, लौकी की सब्जी और चावल इस दिन का मुख्य प्रसाद माना जाता है। भोजन को बिल्कुल शुद्ध और पवित्र तरीके से बनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन जो व्रती खाते हैं वही उनके पूरे व्रत की नींव बनता है इसलिए शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

Chaiti Chhath 2026: खरना पूजा का विशेष महत्व

दूसरे दिन यानी खरना के दिन का अपना एक अलग ही महत्व है। इस दिन व्रती पूरे दिन और रात निर्जला उपवास रखते हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद सूर्य देव की उपासना की जाती है और इसके बाद खीर और रोटी का प्रसाद तैयार किया जाता है। यह प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनाया जाता है। व्रती इसे ग्रहण करके पड़ोसियों और परिवार के सदस्यों में भी वितरित करते हैं। खरना के बाद से ही व्रती का 36 घंटे का कठोर निर्जला उपवास शुरू हो जाता है जो उषा अर्घ्य के बाद ही टूटता है।

Chaiti Chhath 2026: संध्या अर्घ्य, डूबते सूरज को नमन

तीसरे दिन शाम के समय व्रती नदी, तालाब या अन्य जलाशयों के घाटों पर एकत्र होते हैं। सूर्यास्त के समय डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। इस अवसर पर घाट पर भारी भीड़ जमा होती है। दीप जलाए जाते हैं, छठी मैया के गीत गाए जाते हैं और पूरे वातावरण में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। सूप में फल, ठेकुआ और अन्य पूजा सामग्री रखकर व्रती जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। यह दृश्य अत्यंत मनोरम और भावपूर्ण होता है।

Chaiti Chhath 2026: उषा अर्घ्य, व्रत का समापन

चौथा और अंतिम दिन उषा अर्घ्य का होता है। इस दिन व्रती ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घाट पर पहुंचते हैं और उगते सूरज को अर्घ्य अर्पित करते हैं। उषा काल यानी सूर्योदय के समय का यह दृश्य बेहद पवित्र और मनोरम होता है। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती अपना 36 घंटे का कठोर उपवास तोड़ते हैं। इसके बाद प्रसाद वितरण होता है और व्रत की समाप्ति होती है।

Chaiti Chhath 2026: सूर्य देव की उपासना का रहस्य

छठ पर्व में सूर्य देव की उपासना का वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों दृष्टिकोणों से गहरा महत्व है। सूर्य देव को समस्त जीवन का आधार माना जाता है। उनकी उपासना से न केवल आध्यात्मिक बल मिलता है बल्कि यह भी माना जाता है कि इससे परिवार में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का वास होता है। छठी मैया को संतानों की रक्षक माना जाता है इसलिए संतान की दीर्घायु और कल्याण के लिए यह व्रत विशेष रूप से रखा जाता है।

निष्कर्ष

चैती छठ का यह महापर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा की वो अमूल्य धरोहर है जो पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती आ रही है। इस बार 22 से 25 मार्च के बीच घाटों पर एक बार फिर आस्था का सैलाब उमड़ेगा और लाखों श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य देकर अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना करेंगे।

read more here

मोहब्बत जीती, मज़हब हारा! रिजवाना ने इस्लाम छोड़ा, बनी ‘पूजा’ और रचाई हिंदू रीति से शादी, सीतापुर में दो साल के प्यार की जीत, बजरंग दल ने कराई शादी

तेल संकट में भारत बना बांग्लादेश का मसीहा! पाइपलाइन से भेजा 5000 टन डीजल, सालाना 1.8 लाख टन की आपूर्ति, पड़ोसी देश की रसोई-उद्योग को मिली बड़ी राहत

ट्रंप ईरान को मिटाना चाहते हैं या डील करना? जंग के दूसरे हफ्ते में सच सामने आया — रिजीम चेंज फेल, IRGC से सौदा, कुर्द विद्रोह, परमाणु धमकी, जमीनी सेना,- सब विकल्प मेज पर, लेकिन कोई ठोस जीत नहीं!

PM Kisan Yojana 22nd Installment: 13 मार्च को आएंगे 2-2 हजार रुपये, सरकार ने किया आधिकारिक एलान, PM Modi असम दौरे पर करेंगे जारी, जानें किन किसानों को नहीं मिलेगा पैसा और कैसे चेक करें स्टेटस

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.