थलापति विजय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, जन नायकन की रिलीज पर फिर लगा ब्रेक, 20 जनवरी तक इंतजार

थलापति विजय की आखिरी फिल्म पर संकट के बादल, CBFC सर्टिफिकेट विवाद में हाईकोर्ट सुनवाई तय

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Jana Nayagan: दक्षिण के सुपरस्टार थलापति विजय की राजनीतिक पारी से पहले की अंतिम फिल्म जन नायकन को लेकर मुसीबतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। बुधवार 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें निराशा हाथ लगी है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया है और हाईकोर्ट में 20 जनवरी को होने वाली सुनवाई में ही निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

यह फैसला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए जी मसीह की पीठ ने सुनाया। फिल्म (Jana Nayagan) को सेंसर बोर्ड से ए सर्टिफिकेट मिलने के मामले में विवाद चल रहा है और अब विजय के पास 20 जनवरी की सुनवाई का इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

Jana Nayagan
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सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि चूंकि यह प्रकरण 20 जनवरी को मद्रास हाईकोर्ट में पहले से ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है इसलिए उसी तारीख को इस पर अंतिम निर्णय सुनाया जाए। याचिका में मुख्य रूप से फिल्म को वयस्क दर्शकों के लिए ए सर्टिफिकेट दिए जाने के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के फैसले को चुनौती दी गई थी। शुरुआत में 19 जनवरी को शीर्ष अदालत में सुनवाई निर्धारित थी लेकिन बाद में इसे आगे बढ़ाकर 15 जनवरी कर दिया गया था। हालांकि बुधवार की सुनवाई में भी कोई ठोस राहत नहीं मिली।

Jana Nayagan: विजय के लिए संकट गहराया

मद्रास हाईकोर्ट में जन नायकन को राहत नहीं मिलने के बाद विजय और उनकी टीम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि देश की सर्वोच्च अदालत से तत्काल राहत मिल जाएगी और फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो जाएगा। लेकिन बुधवार को आया फैसला उनकी उम्मीदों के एकदम विपरीत रहा। अब उनके पास 20 जनवरी की हाईकोर्ट सुनवाई का इंतजार करने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। उस दिन आने वाला निर्णय ही इस पूरे विवाद का अंतिम समाधान होगा।

पोंगल पर नहीं हो सकी रिलीज

जन नायकन (Jana Nayagan) को मूल रूप से 9 जनवरी को तमिल त्योहार पोंगल के अवसर पर रिलीज होना था। यह विजय के सिनेमा करियर की आखिरी फिल्म होने के कारण प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह था। हालांकि सेंसर बोर्ड की तरफ से समय पर प्रमाण पत्र जारी नहीं होने के कारण फिल्म अंतिम क्षणों में मुश्किल में फंस गई।

इससे पहले एकल न्यायाधीश ने CBFC को फिल्म को मंजूरी देने का निर्देश दिया था और मामले को समीक्षा समिति के पास भेजने के फिल्म बोर्ड के निर्णय को रद्द कर दिया था। न्यायाधीश ने कहा था कि एक बार जब बोर्ड ने प्रमाण पत्र जारी करने का निर्णय ले लिया था तो अध्यक्ष के पास इसे समीक्षा समिति को भेजने का अधिकार नहीं था।

Jana Nayagan: सेंसर बोर्ड ने की थी अपील

फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने एकल न्यायाधीश के इस आदेश के विरुद्ध तत्काल डिवीजन बेंच में अपील दायर की। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरेशन और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर डिवीजन बेंच के समक्ष अपील के आधार प्रस्तुत किए। CBFC ने 6 जनवरी को फिल्म निर्माता को एक पत्र भेजा था जिसमें सूचित किया गया था कि मामला समीक्षा समिति को भेजा जा रहा है। इस पत्र को याचिका में चुनौती नहीं दी गई थी लेकिन एकल न्यायाधीश ने उस पत्र को निरस्त कर दिया और बोर्ड को सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दे दिया।

डिवीजन बेंच ने क्या कहा

अपने आदेश में डिवीजन बेंच ने टिप्पणी की कि याचिका 6 जनवरी को दायर की गई थी और सेंसर बोर्ड को अपना जवाब प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया था। इसी कारण फिल्म की रिलीज स्थगित हो गई। बेंच ने माना कि प्रक्रियात्मक न्याय का पालन किया जाना आवश्यक है और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। यह निर्णय फिल्म निर्माताओं के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।

Jana Nayagan: विजय का राजनीतिक सफर

थलापति विजय ने हाल के वर्षों में राजनीति में सक्रिय भागीदारी शुरू कर दी है। उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी तमिल वेत्री कलगम का गठन किया है और तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय हैं। जन नायकन उनकी फिल्मी करियर की अंतिम फिल्म (Jana Nayagan) मानी जा रही है। इस फिल्म के बाद वे पूरी तरह से राजनीति में उतर जाएंगे और अभिनय से संन्यास ले लेंगे। यही कारण है कि यह फिल्म (Jana Nayagan) प्रशंसकों के लिए बेहद खास है क्योंकि यह विजय को बड़े पर्दे पर देखने का आखिरी मौका होगी।

फिल्म की तैयारियां और प्रचार

जन नायकन (Jana Nayagan) की शूटिंग और पोस्ट प्रोडक्शन का काम काफी पहले पूरा हो चुका था। फिल्म के निर्माताओं ने बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान भी शुरू किया था। पोस्टर ट्रेलर और टीजर जारी किए गए थे जिन्हें दर्शकों ने शानदार प्रतिक्रिया दी थी। सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर जबरदस्त चर्चा थी। थिएटरों में एडवांस बुकिंग भी शुरू हो चुकी थी। लेकिन सेंसर विवाद ने सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया।

Jana Nayagan: प्रशंसकों की निराशा

विजय के करोड़ों प्रशंसक इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। पोंगल पर फिल्म नहीं आने से उनमें गहरी निराशा है। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार फिल्म की रिलीज (Jana Nayagan) के लिए मांग कर रहे हैं और हैशटैग ट्रेंड करा रहे हैं। कई प्रशंसकों ने थिएटरों के बाहर प्रदर्शन भी किए। वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द कानूनी पेचीदगियां सुलझें और फिल्म सिनेमाघरों में आए।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें 20 जनवरी को होने वाली मद्रास हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। उस दिन आने वाला फैसला इस पूरे मामले का अंत करेगा। अगर हाईकोर्ट फिल्म के पक्ष में फैसला सुनाता है तो जन नायकन जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। हालांकि अगर फैसला विपरीत रहा तो फिल्म निर्माताओं के लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। विजय और उनकी टीम अपने कानूनी सलाहकारों के साथ मिलकर रणनीति बना रही है। दर्शक और फिल्म इंडस्ट्री दोनों ही 20 जनवरी का इंतजार कर रहे हैं।

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