ट्रंप की 15 सूत्री ईरान युद्धविराम योजना पर बढ़ा टकराव, सख्त अमेरिकी शर्तों को तेहरान ने किया खारिज, मध्य पूर्व में शांति की राह और जटिल बनी

अमेरिका की शर्तें सख्त, ईरान का इनकार; शांति वार्ता पर गहराता संकट

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Trump ceasefire plan: जब दुनिया के दो सबसे ताकतवर देश एक मेज पर नहीं बैठना चाहते, और बीच में एक युद्ध जल रहा हो, तो शांति की कोई भी कोशिश उतनी आसान नहीं होती जितनी दिखती है। ट्रंप की 15 सूत्री योजना ठीक इसी जटिल परिस्थिति में सामने आई है।

Trump ceasefire plan: ट्रंप की युद्ध विराम योजना क्या है और इसे कैसे भेजा गया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर पांच दिनों तक हमला नहीं करने की घोषणा के बाद तेहरान को 15 सूत्री युद्ध विराम प्रस्ताव भेजा। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए ईरानी अधिकारियों तक पहुंचाया गया। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों के अनुसार, यह पहली बार है जब अमेरिका ने पाकिस्तान को इस स्तर की कूटनीतिक जिम्मेदारी सौंपी है। पाकिस्तान ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश भी की है।

Trump ceasefire plan: ट्रंप की 15 सूत्री योजना में ईरान से क्या मांगा गया है

ट्रंप के प्रस्ताव में ईरान के लिए बेहद कठोर शर्तें रखी गई हैं। सबसे पहली और सबसे बड़ी मांग यह है कि ईरान को अपना पूरा परमाणु कार्यक्रम समाप्त करना होगा और भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता देनी होगी। इसके अलावा ईरानी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना होगा। 60 प्रतिशत संवर्धित लगभग 450 किलोग्राम यूरेनियम का पूरा भंडार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को सौंपना होगा।

Trump ceasefire plan: ट्रंप की योजना में और क्या शर्तें शामिल हैं

परमाणु मुद्दे के अलावा ट्रंप ने ईरान से अपने क्षेत्रीय प्रॉक्सी अभियानों को पूरी तरह समाप्त करने और सहयोगी मिलिशिया समूहों को हर प्रकार का समर्थन बंद करने की मांग की है। आईएईए को पूरे ईरान में बिना किसी रोक के जांच का पूरा अधिकार देना होगा। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि हार्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक नौवहन के लिए हमेशा खुला रखा जाए और ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को दूरी और संख्या दोनों में सीमित करना होगा।

Trump ceasefire plan: ईरान ने इन शर्तों पर क्या प्रतिक्रिया दी है

ईरान ने अमेरिका की इन मांगों को स्वीकार करने से पूरी तरह इनकार किया है। तेहरान ने अपनी अलग शर्तें सामने रखी हैं जो अमेरिकी प्रस्ताव से बिल्कुल विपरीत हैं। ईरान की पहली मांग यह है कि युद्ध विराम आंशिक नहीं बल्कि पूर्ण हो और इसमें अमेरिका तथा इजरायल दोनों शामिल हों। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अपने संप्रभु अधिकार को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगा। इसके अलावा तेहरान ने युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा मांगा है।

Trump ceasefire plan: इजरायल इस युद्ध विराम योजना को लेकर क्यों हैरान है

ट्रंप की युद्ध विराम पहल ने इजरायल को आश्चर्यचकित कर दिया है। इजरायल लगातार अमेरिका से ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने की पैरवी कर रहा था और उसकी मंशा थी कि ईरान के परमाणु और सैन्य ढांचे को पूरी तरह नष्ट किया जाए। ऐसे में जब ट्रंप ने अचानक वार्ता का रास्ता चुना तो इजरायल को यह कदम अपनी रणनीति के विरुद्ध लगा। उल्लेखनीय है कि मिस्र के मध्यस्थता प्रयासों में भी इजरायल को शामिल नहीं किया गया है।

Trump ceasefire plan: अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की राह में क्या बड़ी बाधाएं हैं

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अमेरिका और ईरान के बयान एकदम विरोधाभासी हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि वे डील करना चाहते हैं, लेकिन ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाग़ेर क़ालिबाफ़ ने सीधी बातचीत के किसी भी दावे से इनकार किया। ईरानी सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही अलीआबादी ने स्पष्ट कहा कि लड़ाई जारी रहेगी और पूर्ण विजय तक सशस्त्र सेनाएँ अडिग हैं।

Trump ceasefire plan: हार्मुज जलडमरूमध्य और खार्ग द्वीप विवाद क्या है

हार्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। ईरान ने इस पर अपनी पकड़ बनाए रखी है जिससे अंतरराष्ट्रीय नौवहन बाधित हो गया है। अमेरिका के मरीन यूनिटों की क्षेत्र में बढ़ती तैनाती से यह अटकलें तेज हो गई हैं कि वाशिंगटन ईरान के खार्ग द्वीप पर नियंत्रण की कोशिश कर सकता है। ईरान ने चेतावनी दी है कि ऐसी किसी भी कोशिश पर वह खाड़ी में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा देगा।

निष्कर्ष

ट्रंप की 15 सूत्री योजना और ईरान की कठोर शर्तों के बीच जो खाई दिख रही है वह इस बात का प्रमाण है कि यह संघर्ष कितना गहरा है। एक तरफ अमेरिका ईरान के परमाणु ढांचे को बदलना चाहता है, तो दूसरी तरफ ईरान अपनी संप्रभुता पर समझौते के लिए तैयार नहीं है। दुनिया की नजरें अब इस बात पर हैं कि पाकिस्तान और मिस्र के मध्यस्थता प्रयास इस गतिरोध को तोड़ पाते हैं या नहीं।

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